डेंगू पॉजिटिव मरीज मिलने के बाद से लोगों में हड़कंप

Published at :11 Sep 2018 4:33 AM (IST)
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डेंगू पॉजिटिव मरीज मिलने के बाद से लोगों में हड़कंप

पूर्णिया : शहर में डेंगू पॉजिटिव मरीज मिलने के बाद से लोगों में हड़कंप मच गया है. ऐसे में डेंगू के प्रति जागरूक होना बहुत जरूरी है. क्योंकि लोगों को परेशान करने वाले जागरूकता ही इस रोग से बचाव का मुख्य इलाज है. इसके लिए बस थोड़ा सतर्क रहना जरूरी है. बरसात के समय में […]

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पूर्णिया : शहर में डेंगू पॉजिटिव मरीज मिलने के बाद से लोगों में हड़कंप मच गया है. ऐसे में डेंगू के प्रति जागरूक होना बहुत जरूरी है. क्योंकि लोगों को परेशान करने वाले जागरूकता ही इस रोग से बचाव का मुख्य इलाज है. इसके लिए बस थोड़ा सतर्क रहना जरूरी है. बरसात के समय में डेंगू के मच्छर जन्म लेने लगते हैं. ऐसे में थोड़ी सतर्कता हमें इस रोग से बचा सकता है. इस मामले में शहर के जाने माने चिकित्सक डॉ एन के झा ने बताये बचाव के उपाय.

यह है डेंगू के लक्षण. डेंगू एडीज मच्छरों के काटने से होता है. इस रोग में तेज बुखार के साथ शरीर पर लाल-लाल चकत्ते दिखायी देते है. इसमें 104 डिग्री तेज बुखार आता है और सिर में तेज दर्द होता है. शरीर के साथ जोड़ों में भी दर्द होता है. खाना पचाने में दिक्कत होती है. उल्टी होना, भूख कम लगना व ब्लड प्रेशर कम हो जाना इसके कुछ अन्य लक्षण हैं. इसके अलावा चक्कर आना, कमजोरी महसूस होना और बॉडी में प्लेटलेट्स की कमी हो जाना खास लक्षण हैं. लीवर और सीने में फ्लूइड जमा हो जाता है.अगर ऊपर दिये गये लक्षणों में से कोई लक्षण दिखाई दे तो तुरंत डॉक्टर के पास जाना चाहिए. डेंगू की जांच के लिए एनएस 1 टेस्ट किया जाता है. जिसके आधार पर डॉक्टर तय करते हैं कि मरीज को डेंगू है या नहीं.
दिन में काटता है एडीज मच्छर. डेंगू का मच्छर आम तौर पर दिन में काटता है. गर्मी और बारिश के मौसम में यह बीमारी तेजी से पनपती है. डेंगू के मच्छर हमेशा साफ पानी में पनपते हैं. जैसे छत पर लगी पानी की टंकी, घड़ों और बाल्टियों में जमा पीने का पानी, कूलर का पानी, गमलों में भरा पानी, टायर, नारियल के खोपड़े आदि में जमा पानी में एडीज मच्छर पनपता है. ऐसे में बरसात से पूर्व ही इन सामानों को नष्ट कर दें. घर के आस पास जमा पानी में केरोसिन तेल डाल कर भी मच्छरों का सफाया किया जा सकता है.
डेंगू मरीजों को खूब पिलायें नारियल पानी. वैसे तो डेंगू का इलाज चिकित्सकीय प्रक्रिया से डॉक्टरों के द्वारा किया जाता है, लेकिन सावधानी के तौर पर आप भी कुछ तरीके अपना सकते हैं. रोगी को ज्यादा से ज्यादा तरल चीजें दिया जाये, ताकि उसके शरीर में पानी की कमी न हो. डेंगू में गिलोई के पत्ते काफी उपयोगी होते हैं. मरीज को पपीते के पत्ते पानी में पीस कर दिये जा सकते हैं. यह शरीर में प्लेटलेट्स बढ़ाने का काम करते हैं, लेकिन देने से पहले एक बार डॉक्टर की सलाह जरूर लें.मरीज को डिस्प्रीन और एस्प्रीन की गोली कभी ना दें. बुखार कम करने के लिए पैरासीटामॉल की गोली दी जा सकती है. जितना हो सके नारियल पानी और जूस पिलायें.
सील के बाद आखिर किसके आदेश से खुल गये पैथोलॉजी
विभाग का नजरिया
पैथोलॉजी का संचालन सिर्फ एमडी पैथो, डीसीपी व डीएनबी डिप्लोमाधारी डॉक्टर ही चला सकते हैं. इसके अलावे जो भी पैथोलॉजी का संचालन कर रहे हैं. हाइकोर्ट की नजर में अवैध हैं. अवैध पैथोलॉजी पर हाइकोर्ट के आदेश के बाद विभाग सख्त है. वैसे संचालकों पर कार्रवाई की तलवार लटकती रहेगी. जितने भी लैब तकनीशियन पैथोलॉजी का संचालन कर रहे हैं, वे किसी मानक वाले पैथोलॉजी से संबद्ध होकर जांच कर सकते हैं. छापेमारी का सिलसिला निरंतर जारी रहेगा.
डॉ कृष्ण मोहन पूर्वे, सिविल सर्जन, पूर्णिया
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