पति की लंबी उम्र के लिए महिलाओं ने रखा व्रत, फतुहा और दनियावां में वट वृक्ष के पास उमड़ी श्रद्धा

Published by : karunatiwari Updated At : 16 May 2026 10:12 AM

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वाट सावित्री पूजा

Patna News: पटना जिले के फतुहा और दनियावां इलाके में शुक्रवार को सुहागिन महिलाओं ने वट सावित्री व्रत पूरे श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया.

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Patna News: (एस.के. सिंह की रिपोर्ट) पटना जिले के फतुहा और दनियावां इलाके में शुक्रवार को सुहागिन महिलाओं ने वट सावित्री व्रत पूरे श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया. महिलाओं ने वट वृक्ष की पूजा कर पति की लंबी उम्र, परिवार की सुख-समृद्धि और संतान की खुशहाली की कामना की. पूजा स्थलों पर सुबह से ही महिलाओं की भीड़ देखने को मिली.

वट वृक्ष की पूजा के लिए सुबह से जुटीं महिलाएं

फतुहा और आसपास के विभिन्न इलाकों में महिलाओं ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ वट वृक्ष की पूजा की. सुहागिन महिलाएं सुबह स्नान कर व्रत रखकर पूजा स्थल पहुंचीं, जहां दीप, धूप, फूल और प्रसाद अर्पित किए गए. कई स्थानों पर महिलाओं ने सामूहिक रूप से पूजा-अर्चना की और भजन-कीर्तन भी गाए.

महिलाओं का मानना है कि वट वृक्ष की पूजा करने से परिवार में सुख-शांति बनी रहती है और सभी संकट दूर होते हैं. ग्रामीण क्षेत्रों में यह पर्व आस्था और परंपरा का महत्वपूर्ण प्रतीक माना जाता है.

पति की लंबी उम्र और परिवार की खुशहाली की कामना

वट सावित्री व्रत को लेकर महिलाओं में खास उत्साह देखने को मिला. महिलाओं ने पति की दीर्घायु, बच्चों की खुशहाली और परिवार की समृद्धि के लिए पूरे दिन व्रत रखा. पूजा के दौरान महिलाएं एक-दूसरे को शुभकामनाएं देती नजर आईं.

स्थानीय लोगों के अनुसार यह परंपरा वर्षों पुरानी है और पीढ़ियों से चली आ रही है. इस पूजा को महिलाओं की सामाजिक एकता और सांस्कृतिक पहचान से भी जोड़कर देखा जाता है.

सावित्री और सत्यवान की कथा से जुड़ी है मान्यता

वट सावित्री व्रत का संबंध हिंदू धर्म की प्रसिद्ध पौराणिक कथा सावित्री और सत्यवान से जुड़ा हुआ है. मान्यता के अनुसार राजा अश्वपति की पुत्री सावित्री ने सत्यवान को पति के रूप में चुना था, जबकि ऋषियों ने पहले ही उनकी अल्पायु होने की भविष्यवाणी कर दी थी.

कहा जाता है कि निर्धारित दिन सत्यवान वट वृक्ष के नीचे बेहोश होकर गिर पड़े और उनके प्राण निकल गए. तभी यमराज उनके प्राण लेने पहुंचे, लेकिन सावित्री अपने पति के पीछे-पीछे चलती रहीं. उनकी निष्ठा, बुद्धिमानी और अटूट प्रेम से प्रसन्न होकर यमराज ने सत्यवान को पुनर्जीवन दे दिया.

वट सावित्री व्रत को लेकर महिलाओं में गहरी आस्था

इसी पौराणिक कथा के बाद से विवाहित महिलाएं वट सावित्री व्रत रखती हैं और वट वृक्ष की पूजा करती हैं. धार्मिक मान्यता है कि इस व्रत से पति की लंबी आयु, अखंड सौभाग्य और परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहती है.

श्रद्धा और विश्वास के साथ मनाया जाने वाला यह पर्व आज भी ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में महिलाओं के बीच विशेष महत्व रखता है.

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लेखक के बारे में

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करुणा तिवारी बिहार के आरा, वीर कुंवर सिंह की धरती से आती हैं। उन्होंने पत्रकारिता में अपने करियर की शुरुआत Doordarshan Bihar के साथ की। 8 वर्षों तक टीवी और डिजिटल माध्यम में सक्रिय रहने के बाद, वर्तमान में वह प्रभात खबर डिजिटल, बिहार टीम के साथ कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं। उन्हें बिहार की राजनीति, ग्राउंड रिपोर्टिंग और सामाजिक मुद्दों में विशेष रुचि है। अपने काम के प्रति समर्पित करुणा हर दिन कुछ नया सीखने और बेहतर करने की कोशिश करती हैं, ताकि सशक्त और प्रभावी पत्रकारिता के माध्यम से समाज तक सच्चाई पहुंचा सकें।

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