PMCH में बड़ी सुविधा: अब 24 घंटे रेस्पिरेटरी इमरजेंसी, टीबी, अस्थमा और सांस के मरीजों को मिलेगा तुरंत इलाज
Published by : Karuna Tiwari Updated At : 14 Jun 2026 10:20 AM
Patna PMCH
Patna News: राजधानी पटना के पीएमसीएच में श्वसन रोगियों के लिए बड़ी राहत की खबर है. अब अस्पताल में 24 घंटे रिस्पिरेटरी इमरजेंसी सेवा शुरू की जा रही है. इससे टीबी, अस्थमा और अन्य गंभीर सांस रोगों के मरीजों को बिना देरी के विशेषज्ञ इलाज मिल सकेगा.
Patna News: (आनंद तिवारी की रिपोर्ट)
राजधानी में बढ़ते प्रदूषण और मौसम के उतार-चढ़ाव के बीच श्वसन रोगियों की संख्या लगातार बढ़ रही है. ऐसे में पीएमसीएच में 24 घंटे रेस्पिरेटरी इमरजेंसी शुरू होने से मरीजों को बड़ा लाभ मिलेगा. पहले फेफड़ों से जुड़े मरीजों को मेडिसिन इमरजेंसी में भर्ती किया जाता था और जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ डॉक्टरों को बुलाना पड़ता था, जिससे इलाज में देरी होती थी. अब अलग यूनिट बनने से तुरंत उपचार संभव होगा.
पुराने इमरजेंसी वार्ड में 20 बेड आरक्षित
पीएमसीएच प्रशासन ने पुराने इमरजेंसी वार्ड में 20 बेड रिस्पिरेटरी मरीजों के लिए आरक्षित किए हैं. अस्पताल अधीक्षक डॉ राजीव कुमार सिंह ने बताया कि यह विभाग आधुनिक सुविधाओं से लैस होगा. यहां न्यूमोनिया, अस्थमा, टीबी, ब्रोंकाइटिस, फेफड़ों के संक्रमण और अन्य सांस संबंधी बीमारियों का तुरंत इलाज किया जाएगा. मरीजों को ऑक्सीजन सपोर्ट, नेबुलाइजेशन, पल्मोनरी फंक्शन टेस्ट और अन्य इमरजेंसी सुविधाएं उपलब्ध रहेंगी.
ब्रोंकोस्कोपी और अन्य जांच की सुविधा
इस यूनिट में ब्रोंकोस्कोपी जांच की सुविधा सीयूबी बिल्डिंग के तीसरे फ्लोर पर उपलब्ध कराई गई है. इसके अलावा अन्य जरूरी जांचें इमरजेंसी विभाग में ही की जाएंगी. मरीजों के बेहतर इलाज के लिए सभी आवश्यक मेडिकल सुविधाएं एक ही जगह उपलब्ध होंगी.
मरीजों को मिलेगा सीधा लाभ
24 घंटे रिस्पिरेटरी इमरजेंसी शुरू होने से मरीजों को अब रात या आपात स्थिति में भटकना नहीं पड़ेगा. पहले कई मरीजों को निजी अस्पतालों का सहारा लेना पड़ता था, लेकिन अब उन्हें पीएमसीएच में ही बेहतर इलाज मिल सकेगा. यह विभाग आगे चलकर श्वसन रोगों का प्रमुख केंद्र बन सकता है.
आधुनिक सुविधाओं का विस्तार
इस केंद्र में स्लीप स्टडी की सुविधा भी दी जाएगी, जिससे खर्राटे और नींद में सांस रुकने जैसी समस्याओं का इलाज संभव होगा. एलर्जी टेस्टिंग सेंटर की भी व्यवस्था की जाएगी, जिससे धूल, धुआं और परागकणों से होने वाली एलर्जी की पहचान हो सकेगी. इसके साथ ही ब्रोंकोस्कोपी और थोराकोस्कोपी जैसी जांचों से फेफड़ों के कैंसर और टीबी जैसी बीमारियों का सटीक पता लगाया जा सकेगा.
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By Karuna Tiwari
करुणा तिवारी पत्रकारिता में अपने करियर की शुरुआत Doordarshan Bihar के साथ की. 8 वर्षों तक टीवी और डिजिटल माध्यम में सक्रिय रहने के बाद, वर्तमान में वह प्रभात खबर डिजिटल, बिहार टीम के साथ कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं. उन्हें बिहार की राजनीति, ग्राउंड रिपोर्टिंग और सामाजिक मुद्दों में विशेष रुचि है. अपने काम के प्रति समर्पित करुणा हर दिन कुछ नया सीखने और बेहतर करने की कोशिश करती हैं.
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