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50% आरक्षण से लेकर शराबबंदी तक: सीएम नीतीश के 10 क्रांतिकारी फैसले, जिसने बदली बिहार की सूरत

Updated at : 06 Mar 2026 9:37 PM (IST)
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cm nitish decision

नीतीश कुमार की फाइल फोटो

Nitish Kumar: बिहार में महिलाओं के सशक्तीकरण और सामाजिक बदलाव को लेकर नीतीश सरकार ने कई अहम फैसले लिए. पंचायतों में 50% आरक्षण, सरकारी नौकरियों में अवसर, जीविका योजना और शराबबंदी जैसे कदमों ने महिलाओं के साथ कमजोर वर्गों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.

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Nitish Kumar: बिहार की राजनीति में विकास और सामाजिक बदलाव की चर्चा जब भी होती है, तो मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के कई फैसलों का जिक्र जरूर होता है. खासकर महिलाओं के सशक्तीकरण और समाज के कमजोर तबकों को आगे बढ़ाने के लिए उनकी सरकार ने कई अहम योजनाएं लागू कीं. पंचायतों में महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण देने से लेकर शराबबंदी और रोजगार योजनाओं तक, इन फैसलों ने बिहार के सामाजिक ढांचे में बड़ा बदलाव लाने का दावा किया जाता है.

पंचायतों में 50% आरक्षण से बढ़ी महिलाओं की भागीदारी

नीतीश कुमार सरकार ने देश में पहली बार बिहार में महिलाओं को त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था और नगर निकायों में 50 प्रतिशत आरक्षण देने का ऐतिहासिक फैसला लिया. इस निर्णय के बाद गांव से लेकर शहर तक स्थानीय राजनीति में महिलाओं की भागीदारी तेजी से बढ़ी.

आज स्थिति यह है कि बिहार में स्थानीय निकायों में महिलाओं की भागीदारी 55 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है. बिहार के इस मॉडल को बाद में आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, केरल, महाराष्ट्र, ओडिशा, राजस्थान, त्रिपुरा और उत्तराखंड जैसे कई राज्यों ने भी अपनाया.

पुलिस और सरकारी नौकरियों में भी बढ़ा महिलाओं का प्रतिनिधित्व

महिलाओं को सुरक्षा व्यवस्था में भी बराबर अवसर देने के लिए वर्ष 2013 में बिहार पुलिस में 35 प्रतिशत महिला आरक्षण लागू किया गया. इसका असर यह हुआ कि आज राज्य के कुल पुलिस बल में लगभग 30 प्रतिशत महिलाएं हैं और महिला पुलिसकर्मियों की संख्या 31 हजार से अधिक हो चुकी है.

इसके अलावा 2016 से सभी सरकारी सेवाओं में भी महिलाओं के लिए 35 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण लागू किया गया. इंजीनियरिंग और मेडिकल कॉलेजों में भी लड़कियों के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान किया गया है.

‘जीविका दीदी’ बनीं ग्रामीण अर्थव्यवस्था की ताकत

ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए वर्ष 2006 में ‘जीविका’ परियोजना की शुरुआत की गई. इस योजना के तहत स्वयं सहायता समूहों के जरिए महिलाओं को रोजगार और आर्थिक गतिविधियों से जोड़ा गया.

आज राज्य में 1 करोड़ 40 लाख से अधिक महिलाएं ‘जीविका दीदी’ के रूप में काम कर रही हैं और 11 लाख से अधिक स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी हैं. इस मॉडल की सफलता को देखते हुए केंद्र सरकार ने भी देशभर में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन लागू किया.

मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना से आर्थिक मदद

महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से 2025 में मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना शुरू की गई. इसके तहत अब तक करीब 1.81 करोड़ महिलाओं के बैंक खातों में 10-10 हजार रुपये की राशि भेजी जा चुकी है.

इसके अलावा जो महिलाएं अपना रोजगार बढ़ाना चाहती हैं, उन्हें दो-दो लाख रुपये तक की अतिरिक्त आर्थिक सहायता देने की भी व्यवस्था की गई है.

कन्या उत्थान योजना से बदली लड़कियों की स्थिति

स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में सुधार के लिए नीतीश सरकार ने कन्या उत्थान योजना शुरू की. इस योजना का असर यह हुआ कि राज्य में जन्म पंजीकरण की दर में उल्लेखनीय वृद्धि हुई. राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण के अनुसार जन्म पंजीकरण में काफी बढ़ोतरी दर्ज की गई है. वहीं जननी बाल सुरक्षा योजना के कारण अस्पतालों में प्रसव कराने वाली महिलाओं की संख्या भी तेजी से बढ़ी.

जहां 2006-07 में केवल 4 प्रतिशत महिलाएं ही अस्पताल में प्रसव के लिए जाती थीं, वहीं अब यह आंकड़ा 50 प्रतिशत से अधिक हो चुका है.

शराबबंदी को बताया गया सामाजिक सुधार का कदम

अप्रैल 2016 में बिहार सरकार ने राज्य में पूर्ण शराबबंदी लागू करने का फैसला लिया. इसके बाद 2 अक्टूबर 2016 को नया मद्य निषेध कानून लागू किया गया. सरकार का दावा है कि शराबबंदी से घरेलू हिंसा में 35 से 40 प्रतिशत तक कमी आई और परिवारों में आर्थिक बचत बढ़ी है. खासकर ग्रामीण इलाकों में महिलाओं ने इस फैसले का खुलकर समर्थन किया.

कानून व्यवस्था सुधार से बदली बिहार की छवि

2005 के बाद बिहार में कानून व्यवस्था को मजबूत करने के लिए स्पीडी ट्रायल और सख्त पुलिसिंग की नीति अपनाई गई. इसके चलते कई कुख्यात अपराधियों को जेल भेजा गया. सरकार का दावा है कि इन कदमों से राज्य की छवि में बड़ा बदलाव आया और लोगों के बीच सुरक्षा का भरोसा बढ़ा.

बाल विवाह और दहेज के खिलाफ राज्यव्यापी अभियान

साल 2017 में बाल विवाह और दहेज प्रथा के खिलाफ राज्यव्यापी अभियान चलाया गया. इस अभियान में करीब ढाई करोड़ लोगों ने इन सामाजिक कुरीतियों को खत्म करने की शपथ ली. महिला हेल्पलाइन की स्थापना भी इसी दिशा में एक अहम कदम माना जाता है. राज्य के सभी 38 जिलों में स्थापित हेल्पलाइन घरेलू हिंसा और यौन उत्पीड़न से पीड़ित महिलाओं को कानूनी और मनोवैज्ञानिक सहायता देती है.

शिक्षा और कौशल विकास पर भी जोर

महिलाओं की साक्षरता बढ़ाने के लिए 2009-10 में अक्षर अंचल योजना शुरू की गई, जिसके जरिए 67 लाख से अधिक महिलाओं को साक्षर बनाया गया. बाद में महादलित, अल्पसंख्यक और अति पिछड़ा वर्ग को भी इस अभियान से जोड़ा गया.

इसके अलावा ‘हुनर’ और ‘औजार’ कार्यक्रमों के माध्यम से अल्पसंख्यक समुदाय की लड़कियों को व्यावसायिक प्रशिक्षण और टूल किट उपलब्ध कराई गई, ताकि वे स्वरोजगार शुरू कर सकें.

20 साल में कई योजनाएं की गईं लागू

पिछले दो दशकों में बिहार में महिलाओं के सशक्तीकरण, सामाजिक सुधार और कमजोर वर्गों के उत्थान को लेकर कई योजनाएं लागू की गईं. पंचायतों में आरक्षण से लेकर शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार तक, इन पहलों ने राज्य के सामाजिक ढांचे को प्रभावित किया है. सरकार का दावा है कि इन योजनाओं ने बिहार की महिलाओं को न सिर्फ अधिकार दिए, बल्कि उन्हें आर्थिक और सामाजिक रूप से भी मजबूत बनाया.

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Abhinandan Pandey

लेखक के बारे में

By Abhinandan Pandey

भोपाल से शुरू हुई पत्रकारिता की यात्रा ने बंसल न्यूज (MP/CG) और दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अनुभव लेते हुए अब प्रभात खबर डिजिटल तक का मुकाम तय किया है. वर्तमान में पटना में कार्यरत हूं और बिहार की सामाजिक-राजनीतिक नब्ज को करीब से समझने का प्रयास कर रहा हूं. गौतम बुद्ध, चाणक्य और आर्यभट की धरती से होने का गर्व है. देश-विदेश की घटनाओं, बिहार की राजनीति, और किस्से-कहानियों में विशेष रुचि रखता हूं. डिजिटल मीडिया के नए ट्रेंड्स, टूल्स और नैरेटिव स्टाइल्स के साथ प्रयोग करना पसंद है.

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