नीतीश कुमार के करीबी रहे केसी त्यागी रालोद में शामिल हुए, निभाएंगे नई भूमिका

Published by : Paritosh Shahi Updated At : 23 Mar 2026 6:58 AM

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जयंत चौधरी और केसी सिंह

KC Tyagi: जदयू के वरिष्ठ नेता रहे केसी त्यागी ने पार्टी छोड़कर राष्ट्रीय लोकदल का दामन थाम लिया है. दिल्ली में जयंत चौधरी की मौजूदगी में उन्होंने सदस्यता ली. उनके इस फैसले को बिहार और यूपी की राजनीति में बड़ा बदलाव माना जा रहा है.

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KC Tyagi: बिहार सीएम नीतीश कुमार के खास रहे केसी त्यागी ने अब जनता दल यूनाइटेड (जदयू) से पूरी तरह दूरी बनाकर नई पार्टी जॉइन कर ली है.वह रविवार को नई दिल्ली में राष्ट्रीय लोकदल में शामिल हो गए. रालोद अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी की मौजूदगी में केसी त्यागी ने पार्टी की सदस्यता ली. इस दौरान दोनों नेताओं ने एक साथ मंच साझा किया और कार्यक्रम में कई अन्य नेता भी मौजूद रहे.

जदयू में हो रहा बदलाव

जयंत चौधरी ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर उनका स्वागत किया और कहा कि उनके आने से पार्टी को मजबूती मिलेगी. यह फैसला ऐसे समय में आया है जब नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के बाद जदयू के अंदर कई बदलाव हो रहे हैं. केसी त्यागी ने पहले ही पार्टी से दूरी बना ली थी और सदस्यता रिन्यू नहीं कराई थी.

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केसी त्यागी के बारे में जानिये

केसी त्यागी जदयू के पुराने और अनुभवी नेताओं में गिने जाते रहे हैं. उन्होंने पार्टी में महासचिव, प्रवक्ता और राजनीतिक सलाहकार जैसी कई अहम जिम्मेदारियां संभाली हैं. वह लंबे समय तक नीतीश कुमार के करीबी माने जाते थे. इतिहास की बात करें तो जदयू की स्थापना 2003 में समता पार्टी और जनता दल के विलय से हुई थी.

उस समय जॉर्ज फर्नांडिस पार्टी के अध्यक्ष थे और केसी त्यागी महासचिव थे. इसके अलावा उन्होंने शरद यादव के साथ भी लंबे समय तक काम किया. अब उनके रालोद में जाने को राजनीतिक नजर से बड़ा कदम माना जा रहा है. इससे आने वाले समय में उत्तर प्रदेश और बिहार की राजनीति पर भी असर पड़ सकता है.

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परितोष शाही पिछले 4 वर्षों से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की और वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल की बिहार टीम का हिस्सा हैं. राजनीति, सिनेमा और खेल, विशेषकर क्रिकेट में उनकी गहरी रुचि है. जटिल खबरों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाना और बदलते न्यूज माहौल में तेजी से काम करना उनकी विशेषता है. परितोष शाही ने पत्रकारिता की पढ़ाई बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) से की. पढ़ाई के दौरान ही पत्रकारिता की बारीकियों को समझना शुरू कर दिया था. खबरों को देखने, समझने और लोगों तक सही तरीके से पहुंचाने की सोच ने शुरुआत से ही इस क्षेत्र की ओर आकर्षित किया. पत्रकारिता में करियर की पहली बड़ी शुरुआत बिहार विधानसभा चुनाव 2020 के दौरान हुई, जब उन्होंने जन की बात के साथ इंटर्नशिप की. इस दौरान बिहार के 26 जिलों में जाकर सर्वे किया. यह अनुभव काफी खास रहा, क्योंकि यहां जमीनी स्तर पर राजनीति, जनता के मुद्दों और चुनावी माहौल को बहुत करीब से समझा. इसी अनुभव ने राजनीतिक समझ को और मजबूत बनाया. इसके बाद राजस्थान पत्रिका में 3 महीने की इंटर्नशिप की. यहां खबर लिखने की असली दुनिया को करीब से जाना. महज एक महीने के अंदर ही रियल टाइम न्यूज लिखने लगे. इस दौरान सीखा कि तेजी के साथ-साथ खबर की सटीकता कितनी जरूरी होती है. राजस्थान पत्रिका ने उनके अंदर एक मजबूत डिजिटल पत्रकार की नींव रखी. पत्रकारिता के सफर में आगे बढ़ते हुए पटना के जनता जंक्शन न्यूज पोर्टल में वीडियो प्रोड्यूसर के रूप में भी काम किया. यहां कैमरे के सामने बोलना, प्रेजेंटेशन देना और वीडियो कंटेंट की बारीकियां सीखीं. करीब 6 महीने के इस अनुभव ने कैमरा फ्रेंडली बनाया और ऑन-स्क्रीन प्रेजेंस को मजबूत किया. 1 अप्रैल 2023 को राजस्थान पत्रिका को प्रोफेशनल तौर पर ज्वाइन किया. यहां 17 महीने में कई बड़े चुनावी कवरेज में अहम भूमिका निभाई. लोकसभा चुनाव 2024 में नेशनल टीम के साथ जिम्मेदारी संभालने का मौका मिला. इसके अलावा मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के दौरान भी स्टेट टीम के साथ मिलकर काम किया. इस दौरान चुनावी रणनीति, राजनीतिक घटनाक्रम और बड़े मुद्दों पर काम करने का व्यापक अनुभव मिला. फिलहाल परितोष शाही प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम के साथ जुड़े हुए हैं. यहां बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान कई बड़ी खबरों को रियल टाइम में ब्रेक किया, ग्राउंड से जुड़े मुद्दों पर खबरें लिखीं और वीडियो भी बनाए. बिहार चुनाव के दौरान कई जिलों में गांव- गांव घूम कर लोगों की समस्या को जाना-समझा और उनके मुद्दे को जन प्रतिनिधियों तक पहुंचाया. उनकी कोशिश हमेशा यही रहती है कि पाठकों और दर्शकों तक सबसे पहले, सही और असरदार खबर पहुंचे. पत्रकारिता में लक्ष्य लगातार सीखते रहना, खुद को बेहतर बनाना और भरोसेमंद पत्रकार के रूप में अपनी पहचान मजबूत करना है.

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