Ramadan: रमजान के पाक महीने में महिलाएं निभा रही हैं दोहरी भूमिका, इबादत और कर्तव्य साथ-साथ
Published by : Paritosh Shahi Updated At : 18 Mar 2025 4:15 AM
AI फोटो
Ramadan: महिलाएं रमजान के पाक महीने के दौरान अपने परिवार, सहयोगियों और सहकर्मियों के सहयोग से अपने कार्यों को सुचारू रूप से मैनेज कर रही हैं. आइए जानते हैं कि शहर की मुस्लिम महिलाएं कैसे रमजान के दौरान अपनी दिनचर्या को संतुलित कर रही हैं.
Ramadan: अभी रमजान का पाक महीना चल रहा है. इस दौरान महिलाओं की जिम्मेदारियां काफी बढ़ गयी हैं. रमजान मुस्लिम महिलाओं के लिए भी आध्यात्मिक शांति और आत्मसंयम का समय होता है. लेकिन यह उनके लिए केवल इबादत का समय नहीं होता, बल्कि घर और काम दोनों की जिम्मेदारी भी उनके कंधों पर होती हैं. रोजा रखते हुए कामकाजी महिलाएं जहां ऑफिस में अपने दायित्व निभा रही हैं, वहीं गृहिणियां घर की देखभाल और पाक महीना की तैयारियों में जुटी रहती हैं.

ड्यूटी के दौरान पानी पीकर रोजा तोड़ती हूं: खुशबू खातून
पटना के लहसुना थाना में एसएचओ के पद पर कार्यरत ‘खुशबू खातून’ बचपन से ही रोजा रख रही हैं. उनका चयन 2018 में बिहार पुलिस में हुआ था. वह बताती हैं, सुबह ड्यूटी जाने से पहले सहरी करती हूं और नमाज अदा करती हूं. लेकिन ड्यूटी के दौरान रोजा निभाना आसान नहीं होता. कई बार अचानक कोई घटना हो जाती है, तो वहां फौरन पहुंचना जरूरी होता है. ऐसे में इफ्तार का समय बीत जाता है, तब मजबूरन पानी पीकर रोजा खोलना पड़ता है. खुशबू अपने रोजे को खुदा की इबादत मानते हुए निभाती हैं और साथ ही ड्यूटी को अपना कर्तव्य मानकर पूरी लगन से करती हैं.

हर दिन पूरे परिवार के साथ रोजा रखती हूं : सबीना आरजू
पटना के सब्जीबाग में रहने वाली ‘सबीना आरजू’ गृहिणी हैं और उनके लिए रमजान के दौरान जिम्मेदारियां कई गुना बढ़ जाती हैं. वह कहती हैं, रोजा रखते हुए इफ्तारी और रात का खाना बनाना, घर की साफ-सफाई करना चुनौतीपूर्ण होता है. सुबह तीन बजे उठकर सहरी की तैयारी करना, फिर फज्र की नमाज पढ़ना और कुरान की तिलावत करना मेरी दिनचर्या में शामिल है. दिन में थोड़ा आराम कर लेती हूं, ताकि शाम को इफ्तार की तैयारी कर सकूं. सबीना मानती हैं कि इबादत और खुदा का नाम लेने से हर मुश्किल आसान हो जाती है.

अफसर और सहकर्मी सहयोग करते हैं : नुसरत जहां
गांधी मैदान थाना में इंस्पेक्टर के पद पर कार्यरत ‘नुसरत जहां’ कहती हैं, रमजान के दौरान महिलाएं केवल रोजा ही नहीं रखतीं, बल्कि अपनी पारिवारिक और पेशेवर जिम्मेदारियों को भी निभाती हैं. चाहे वह पुलिस की ड्यूटी हो, ऑफिस का काम हो या घर की देखभाल. मैं पिछले 30 वर्षों से रोजा रख रही हूं. रमजान के दौरान मेरी ड्यूटी जारी रहती है, लेकिन मेरे सहयोगी और अफसर काफी मदद करते हैं. कई बार ऐसा भी होता है कि ड्यूटी के कारण इफ्तार का समय बीत जाता है, तब पानी पीकर रोजा खोलना पड़ता है.
रोजा रखते हुए घर व बिजनेस संभालती हूं : शाजिया कैसर
फुलवारी की रहने वाली ‘शाजिया कैसर’ एक सफल महिला उद्यमी हैं. वह बताती हैं, घर और बिजनेस दोनों को संभालने के साथ रमजान की इबादत करना मेरे लिए सबसे अहम होता है. मैंने अपने काम को तीन हिस्सों में बांटा है- सुबह सहरी और नमाज, दोपहर ऑफिस और शाम को इफ्तारी की तैयारी. वह बताती हैं कि इफ्तार के बाद शरीर बहुत थक जाता है, लेकिन खुदा की इबादत में जो सुकून मिलता है, वह इस थकान को दूर कर देता है. यह महीना हमें न केवल आत्मसंयम सिखाता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि मेहनत व लगन से किसी भी चुनौती को पार किया जा सकता है.
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By Paritosh Shahi
परितोष शाही पिछले 4 वर्षों से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की और वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल की बिहार टीम का हिस्सा हैं. राजनीति, सिनेमा और खेल, विशेषकर क्रिकेट में उनकी गहरी रुचि है. जटिल खबरों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाना और बदलते न्यूज माहौल में तेजी से काम करना उनकी विशेषता है. परितोष शाही ने पत्रकारिता की पढ़ाई बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) से की. पढ़ाई के दौरान ही पत्रकारिता की बारीकियों को समझना शुरू कर दिया था. खबरों को देखने, समझने और लोगों तक सही तरीके से पहुंचाने की सोच ने शुरुआत से ही इस क्षेत्र की ओर आकर्षित किया. पत्रकारिता में करियर की पहली बड़ी शुरुआत बिहार विधानसभा चुनाव 2020 के दौरान हुई, जब उन्होंने जन की बात के साथ इंटर्नशिप की. इस दौरान बिहार के 26 जिलों में जाकर सर्वे किया. यह अनुभव काफी खास रहा, क्योंकि यहां जमीनी स्तर पर राजनीति, जनता के मुद्दों और चुनावी माहौल को बहुत करीब से समझा. इसी अनुभव ने राजनीतिक समझ को और मजबूत बनाया. इसके बाद राजस्थान पत्रिका में 3 महीने की इंटर्नशिप की. यहां खबर लिखने की असली दुनिया को करीब से जाना. महज एक महीने के अंदर ही रियल टाइम न्यूज लिखने लगे. इस दौरान सीखा कि तेजी के साथ-साथ खबर की सटीकता कितनी जरूरी होती है. राजस्थान पत्रिका ने उनके अंदर एक मजबूत डिजिटल पत्रकार की नींव रखी. पत्रकारिता के सफर में आगे बढ़ते हुए पटना के जनता जंक्शन न्यूज पोर्टल में वीडियो प्रोड्यूसर के रूप में भी काम किया. यहां कैमरे के सामने बोलना, प्रेजेंटेशन देना और वीडियो कंटेंट की बारीकियां सीखीं. करीब 6 महीने के इस अनुभव ने कैमरा फ्रेंडली बनाया और ऑन-स्क्रीन प्रेजेंस को मजबूत किया. 1 अप्रैल 2023 को राजस्थान पत्रिका को प्रोफेशनल तौर पर ज्वाइन किया. यहां 17 महीने में कई बड़े चुनावी कवरेज में अहम भूमिका निभाई. लोकसभा चुनाव 2024 में नेशनल टीम के साथ जिम्मेदारी संभालने का मौका मिला. इसके अलावा मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के दौरान भी स्टेट टीम के साथ मिलकर काम किया. इस दौरान चुनावी रणनीति, राजनीतिक घटनाक्रम और बड़े मुद्दों पर काम करने का व्यापक अनुभव मिला. फिलहाल परितोष शाही प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम के साथ जुड़े हुए हैं. यहां बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान कई बड़ी खबरों को रियल टाइम में ब्रेक किया, ग्राउंड से जुड़े मुद्दों पर खबरें लिखीं और वीडियो भी बनाए. बिहार चुनाव के दौरान कई जिलों में गांव- गांव घूम कर लोगों की समस्या को जाना-समझा और उनके मुद्दे को जन प्रतिनिधियों तक पहुंचाया. उनकी कोशिश हमेशा यही रहती है कि पाठकों और दर्शकों तक सबसे पहले, सही और असरदार खबर पहुंचे. पत्रकारिता में लक्ष्य लगातार सीखते रहना, खुद को बेहतर बनाना और भरोसेमंद पत्रकार के रूप में अपनी पहचान मजबूत करना है.
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