भू-गर्भ जल के प्रभावी व विश्वसनीय आंकड़ें मिलेंगे, वैज्ञानिक तरीके से विश्लेषण भी होगा

Updated at : 09 Apr 2024 12:24 AM (IST)
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भू-गर्भ जल के प्रभावी व विश्वसनीय आंकड़ें मिलेंगे, वैज्ञानिक तरीके से विश्लेषण भी होगा

राज्य के सभी पंचायतों में भू-गर्भ जल को ऑटोमेटिक रिकॉर्डर से मापा जायेगा. सभी 8800 पंचायतों में ऑटोमेटिक रिकॉर्डर लगाये जायेंगे. इसके माध्यम से मिलने वाले आंकड़ें व्यापक और विश्वसनीय होंगे. इससे मिले आंकड़ों का विश्लेषण ज्यादा प्रभावी ढंग से हो पायेगा. वहीं, भू- गर्भ जल भंडारण के लिए राज्य के सभी क्षेत्रों में एक्यूफर मैपिंग कर इससे प्राप्त आंकड़ों का वैज्ञानिक रूप से विश्लेषण भी किया जायेगा.

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– जल संकट के संकेत, ऑटोमेटिक रिकॉर्डर से मापा जायेगा भू-गर्भ जल – 8800 पंचायतों में लगेंगे रिकॉर्डर, अभी डिजिटल वाटर लेवल रिकॉर्डर से लिया जा रहा माप मनोज कुमार, पटना राज्य के सभी पंचायतों में भू-गर्भ जल को ऑटोमेटिक रिकॉर्डर से मापा जायेगा. सभी 8800 पंचायतों में ऑटोमेटिक रिकॉर्डर लगाये जायेंगे. इसके माध्यम से मिलने वाले आंकड़ें व्यापक और विश्वसनीय होंगे. इससे मिले आंकड़ों का विश्लेषण ज्यादा प्रभावी ढंग से हो पायेगा. वहीं, भू- गर्भ जल भंडारण के लिए राज्य के सभी क्षेत्रों में एक्यूफर मैपिंग कर इससे प्राप्त आंकड़ों का वैज्ञानिक रूप से विश्लेषण भी किया जायेगा. कृषि रोड मैप के माध्यम से ऑटोमेटिक रिकॉर्डर लगाये जायेंगे. लघु जल संसाधन विभाग की कार्य योजना में इसे शामिल किया गया है. वर्तमान में जिला व प्रखंडों में डिजिटल वाटर लेवल रिकॉर्डर के माध्यम से भू-गर्भ जल मापा जा रहा है. कृषि रोड मैप की रिपोर्ट में भविष्य में बिहार में जल संकट के संकेत बताये गये हैं. इस कारण अभी से कवायद शुरू की जा रही है. ……………………… भविष्य में आवश्यकता से कम पानी की उपलब्धता कृषि रोड मैप की रिपोर्ट के अनुसार, राज्य में वर्ष 2050 तक जल की कुल अनुमानित आवश्यकता 145048 एमसीएम है. इसमें कृषि के लिए 104706 एमसीएम व गैर कृषि कार्य के लिए 40342 एमसीएम जल की आवश्यकता है. वर्तमान में यह आवश्यकता राज्य में उपलब्ध सतही जल 132175 एमसीएम से अधिक है. रिपोर्ट में कहा गया है कि बिहार में जल की उपलब्धता कम है. भावी जल संकट की गंभीरता को देखते हुए उपाय करने की आवश्यकता है. ……………………… भूमि में खारेपन का भी कराया जायेगा अध्ययन आहर, पइन, जलाशय और चेकडैम में गाद भर जाने से जल संचयन और सिंचाई क्षमता कम हो जाती है. यहां से गाद खत्म करने के लिए सिल्क मैनेजमेंट विभाग का प्रस्ताव विभाग की ओर से रखा गया है. सिंचाई के कारण भूमि में खारेपन की समस्या भी हो जाती है. इस खारेपन का अध्ययन कराया जायेगा. साथ ही इसमें सुधार के लिए भी कार्य योजना बनायी जायेगी.

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