बिहार का एक ऐसा गांव जहां साल में एक दिन के लिए लगता है लॉकडाउन, घर छोड़ जंगल चले जाते हैं लोग...

Published by : Abhinandan Pandey Updated At : 04 May 2025 11:26 AM

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naurangiya village bihar

Bihar Unique Story: बिहार के बगहा के नौरंगिया गांव में हर साल बैसाख नवमी को एक अनोखी परंपरा निभाई जाती है. जहां गांववासी देवी के प्रकोप से बचने के लिए 12 घंटे के लिए पूरा गांव छोड़कर वनवास पर चले जाते हैं. इस दिन गांव में सन्नाटा पसरा रहता है और लोग जंगल में पूजा-पाठ कर देवी को प्रसन्न करते हैं.

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Bihar Unique Story: बिहार के बगहा अनुमंडल के नौरंगिया गांव में एक अनोखी परंपरा सदियों से जीवित है, जो आधुनिक दौर में भी लोगों की आस्था और परंपरा के प्रति गहरी निष्ठा को दर्शाती है. यहां हर साल बैसाख मास की नवमी तिथि को पूरा गांव 12 घंटे के लिए स्वेच्छा से ‘वनवास’ पर चला जाता है. इस दिन गांव में संपूर्ण लॉकडाउन जैसी स्थिति होती है. कोई अपने घर में नहीं रुकता, न व्यवसाय चलता है और न ही कोई सामाजिक गतिविधि.

महामारी और आपदा से जन्मी परंपरा

स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, कई दशक पहले नौरंगिया गांव भयानक महामारी, हैजा, चेचक और प्राकृतिक आपदाओं की चपेट में आ गया था. गांव में लगातार आगजनी की घटनाएं हो रही थीं, जिससे लोग भयभीत थे. तभी एक तपस्वी परमहंस बाबा को मां दुर्गा ने स्वप्न में दर्शन देकर आदेश दिया कि गांववासी हर साल एक दिन के लिए गांव को खाली कर जंगल में जाकर साधना करें. इसी आदेश का पालन करते हुए, यह परंपरा शुरू हुई, जो आज तक पूरी आस्था से निभाई जा रही है.

जंगल में होती है मां दुर्गा की पूजा

हर साल बैसाख नवमी को नौरंगिया गांव के लोग अपने घर, खेत और दुकानें छोड़कर वाल्मीकि टाइगर रिजर्व के भजनी कुट्टी जंगल में दिनभर के लिए शरण लेते हैं. वहां वे मां दुर्गा की पूजा करते हैं, जंगल में भोजन बनाते हैं और रात होने तक वहीं रहते हैं. सूर्यास्त के बाद जब गांव लौटते हैं, तो मंदिर से जल लेकर अपने-अपने घरों में छिड़कते हैं. मान्यता है कि इस जल से घर की शुद्धि होती है और देवी का आशीर्वाद बना रहता है.

आस्था की मिसाल: बीमार लोग भी जाते हैं वनवास

इस परंपरा की सबसे खास बात यह है कि गांव में चाहे बच्चा हो या बुजुर्ग, स्वस्थ हो या बीमार हर व्यक्ति जंगल जाता है. कुछ लोग असहायों को सहारा देकर भी ले जाते हैं. इस दौरान पूरा गांव वीरान हो जाता है, लेकिन कभी चोरी या असामाजिक गतिविधि की घटना सामने नहीं आती. यह गांववासियों के आपसी विश्वास और अनुशासन की अनूठी मिसाल है.

आज की पीढ़ी भी निभा रही परंपरा

जहां आज की युवा पीढ़ी परंपराओं से दूर होती जा रही है, वहीं नौरंगिया के युवा भी इस वनवास को उतनी ही श्रद्धा से निभाते हैं. यह परंपरा सिर्फ देवी की कृपा पाने की साधना नहीं, बल्कि समाज को एकता, आस्था और अनुशासन का पाठ पढ़ाने वाला उत्सव बन गया है.

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अभिनंदन पांडेय पिछले दो वर्षों से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत प्रिंट मीडिया से की और दैनिक जागरण, भोपाल में काम किया. वर्तमान में वह प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम के हिस्सा हैं. राजनीति, खेल और किस्से-कहानियों में उनकी खास रुचि है. आसान भाषा में खबरों को लोगों तक पहुंचाना और ट्रेंडिंग मुद्दों को समझना उन्हें पसंद है. अभिनंदन ने पत्रकारिता की पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल से की. पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने पत्रकारिता की बारीकियों को समझना शुरू कर दिया था. खबरों को सही तरीके से लोगों तक पहुंचाने की सोच ने उन्हें इस क्षेत्र की ओर आकर्षित किया. दैनिक जागरण में रिपोर्टिंग के दौरान उन्होंने भोपाल में बॉलीवुड के कई बड़े कलाकारों और चर्चित हस्तियों के इंटरव्यू किए. यह अनुभव उनके करियर के लिए काफी अहम रहा. इसके बाद उन्होंने प्रभात खबर डिजिटल में इंटर्नशिप की, जहां उन्होंने डिजिटल पत्रकारिता की वास्तविक दुनिया को करीब से समझा. बहुत कम समय में उन्होंने रियल टाइम न्यूज लिखना शुरू कर दिया. इस दौरान उन्होंने सीखा कि तेजी के साथ-साथ खबर की सटीकता भी बेहद जरूरी होती है. फिलहाल वह प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम के साथ काम कर रहे हैं. बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान उन्होंने कई बड़ी खबरों को रियल टाइम में कवर किया, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और वीडियो कंटेंट भी तैयार किए. उनकी कोशिश हमेशा यही रहती है कि पाठकों और दर्शकों तक सबसे पहले, सही और भरोसेमंद खबर पहुंचे. पत्रकारिता में उनका लक्ष्य लगातार सीखते रहना, खुद को बेहतर बनाना और एक विश्वसनीय पत्रकार के रूप में अपनी पहचान मजबूत करना है.

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