बिहार के 213 प्रखंडों में स्नातक तक होगी पढ़ाई, नीतीश सरकार ने नए डिग्री कॉलेज खोलने का लिया फैसला

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बिहार सीएम नीतीश कुमार

Bihar Government: बिहार के 213 कॉलेज विहीन प्रखंडों में जुलाई 2026 से स्नातक की पढ़ाई शुरू होगी. शुरुआत में ये क्लासेज प्लस-टू स्कूलों के भवनों में चलेंगी. सरकार ने इसके लिए 10 हजार करोड़ का बजट रखा है और इसमें वोकेशनल कोर्स भी शामिल किए जाएंगे.

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Bihar Government: मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के सात निश्चय-3 योजना के तहत बिहार के उन 213 प्रखंडों में नए डिग्री कॉलेज खोले जाएंगे, जहां अब तक उच्च शिक्षा का कोई साधन मौजूद नहीं था. सबसे खास बात यह है कि सरकार ने इन कॉलेजों में इसी साल जुलाई 2026 से स्नातक (Graduation) की पढ़ाई शुरू करने का लक्ष्य रखा है. उच्च शिक्षा विभाग इस योजना को जमीन पर उतारने के लिए युद्ध स्तर पर काम कर रहा है. सरकार के इस फैसले से ग्रामीण क्षेत्रों के छात्रों को पढ़ाई के लिए अपने घर से दूर न जाना पड़ेगा.

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सरकार ने क्या उपाय निकला

नए कॉलेजों के भव्य भवनों के निर्माण में अभी समय लगेगा, इसलिए सरकार ने एक दूसरा रास्ता निकाला है. जब तक डिग्री कॉलेजों की अपनी बिल्डिंग तैयार नहीं हो जाती, तब तक इन प्रखंडों के प्लस-टू स्कूलों के नए भवनों में कॉलेज की कक्षाएं चलेंगी. शिक्षा विभाग इस बात पर विचार कर रहा है कि स्कूल और कॉलेज की कक्षाओं का समय अलग-अलग रखा जाए ताकि दोनों के संचालन में कोई परेशानी न हो. इन कॉलेजों को संबंधित विश्वविद्यालयों से मान्यता दिलाई जाएगी और इन्हें सरकारी कॉलेज का दर्जा दिया जाएगा.

रोजगार के बेहतर बनेंगे

छात्रों को पढ़ाने के लिए अनुभवी हेडमास्टर की नियुक्ति की जाएगी. इन कॉलेजों में केवल पारंपरिक विषय ही नहीं, बल्कि साइंस, आर्ट्स और कॉमर्स की पूरी व्यवस्था होगी. इसके अलावा, आधुनिक जरूरतों को देखते हुए हर कॉलेज में चुनिंदा वोकेशनल कोर्स के लिए अलग विभाग बनाने का भी प्रस्ताव है. प्रत्येक वोकेशनल विभाग में एक प्रोफेसर और दो सहायक प्रोफेसर नियुक्त किए जाएंगे, जिससे युवाओं को डिग्री के साथ-साथ रोजगार के बेहतर अवसर भी मिल सकें.

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भारी भरकम बजट का हुआ प्रावधान

इस प्रोजेक्ट के लिए राज्य सरकार ने बजट में भारी-भरकम राशि का प्रावधान किया है. उच्च शिक्षा के लिए लगभग 10 हजार करोड़ रुपये खर्च किए जाने का अनुमान है. इसमें नए कॉलेजों की स्थापना के साथ-साथ 55 मौजूदा संस्थानों को सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के रूप में विकसित करना भी शामिल है. शिक्षा मंत्री सुनील कुमार खुद भूमि चयन और प्रोसेस की निगरानी कर रहे हैं. कई प्रखंडों में जमीन चिन्हित की जा चुकी है.

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