Union Budget 2023 से बिहार सरकार को काफी उम्मीदें, जानिए क्या है राज्य सरकार की मांगें

एक फरवरी को 2023-24 का आम बजट पेश किया जायेगा. केंद्रीय बजट से इस साल बिहार को काफी उम्मीदें हैं. जनता के साथ ही राज्य सरकार ने भी बजट से कई आस लगा रखें हैं. इसमें सबसे पहला है विशेष राज्य का दर्जा.
बुधवार को पेश होने वाले केंद्रीय बजट 2023-24 से बिहार के लोगों के साथ-साथ राज्य सरकार को भी काफी उम्मीदें हैं. राज्य सरकार ने प्री-बजट मीटिंग में अपनी आकांक्षाएं केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के सामने रख दी हैं. राज्य सरकार की पहली मांग बिहार को विशेष राज्य का दर्जा या विशेष पैकेज देने की है. वित्त मंत्री विजय कुमार चौधरी ने कहा कि केंद्र सरकार बिहार को विशेष राज्य का दर्जा नहीं दे सकती है, तो विशेष सहायता पैकेज दे, नहीं तो कम- से- कम केंद्रीय योजनाओं में हिस्सेदारी की शेयरिंग पैटर्न को 90:10 कर दिया जाये, यानी केंद्रांश 90 फीसदी और राज्यांश 10 फीसदी होनी चाहिए.
विजय कुमार चौधरी ने कहा कि अच्छा तो यह होता कि केंद्र सरकार अपनी योजनाओं की राशि खुद दे, ताकि राज्य सरकार अपनी राशि से अपनी योजना चला सके. वित्त मंत्री ने मुख्यमंत्रियों के समूह और नीति आयोग की अनुसंशा का हवाला देते हुए कहा कि केंद्रीय योजनाओं की संख्या कम करके 30 की जाये.
वित्त मंत्री ने कहा कि वर्तमान में सौ के करीब केंद्रीय योजनाएं राज्यों में चल रही हैं. बिहार जैसे गरीब राज्यों के लिए राज्यांश 30 हजार करोड़ का प्रबंध अपने राजस्व से करना पड़ता है. यह परेशानी का सबब है. नीति आयोग के मल्टी डाइमेंशनल पोवर्टी इंडेक्स के अनुसार बिहार गरीब है. इसके बावजूद केंद्र प्रायोजित योजनाओं के मैचिंग ग्रांट के रूप में लगभग 55 फीसदी राज्यांश के रूप में खर्च करना पड़ता है. केंद्र प्रायोजित योजनाओं में राज्यांश घटने की बजाय पिछले कुछ वर्षों से लगातार बढ़ता जा रहा है. पहले केंद्रांश 75 फीसदी था, फिर 60 फीसदी हुआ. अब तो कुछ योजनाओं में यह कम होकर 50 फीसदी हो गया है.
वित्त मंत्री विजय कुमार चौधरी ने ने कहा कि वर्ष 2020-21 में पूंजीगत व्यय के लिए राज्यों को ब्याज मुक्त ऋण देने दिये गये थे. केंद्र सरकार को इस योजना का विस्तार अगले वित्तीय वर्ष 2023-24 के बजट में भी करना चाहिए. यह केंद्र का एक स्वागत योग्य कदम है. इस योजना के लिए उपलब्ध करायी गयी राशि का उपयोग अगले वित्तीय वर्षों में करने की भी अनुमति दी जानी चाहिए. इन सब के अलावा बिहार जैसे पिछड़े राज्यों को सड़क, उद्योग, आइटी, शिक्षा आदि क्षेत्रों में निवेश की घोषणा की उम्मीद केंद्र सरकार से है.
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