Bihar Election 2025: बिहार चुनाव में खिला ‘फूलों का बाजार’, नामांकन से पहले समर्थक झोंक रहे लाखों रुपये, डिजाइन तक की एडवांस बुकिंग

Updated at : 14 Oct 2025 8:51 AM (IST)
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'flower market' flourished in the Bihar elections.

'flower market' flourished in the Bihar elections.

Bihar Election 2025: पटना के फूल बाजारों में इन दिनों राजनीति की खुशबू घुली हुई है. नामांकन से पहले गुलाब और गेंदा की मांग इस कदर बढ़ी है कि थोक विक्रेता महीनों पहले की तरह बुकिंग में व्यस्त हैं.

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Bihar Election 2025: बिहार विधानसभा चुनाव के लिए नामांकन प्रक्रिया शुरू होते ही नेताओं और उनके समर्थकों ने फूलों के बाजार में नई हलचल ला दी है. चुनावी नारों से पहले अब स्वागत के लिए तैयार हो रही हैं मालाएं, बुके और गुलाब की पंखुड़ियां. पटना के कंकड़बाग, बोरिंग रोड, स्टेशन रोड और पटना सिटी की फूल मंडियों में इन दिनों नजारा किसी त्योहार से कम नहीं.

विधानसभा चुनाव में नामांकन की सरगर्मी अब बाजारों में भी महसूस की जा रही है. उम्मीदवारों के समर्थक अपने नेताओं के नामांकन जुलूस को भव्य बनाने के लिए फूलों की जमकर खरीदारी कर रहे हैं. गुलाब, गेंदा और उनकी पंखुड़ियों की मांग इतनी बढ़ गई है कि व्यापारी तारीख और डिजाइन पूछकर एडवांस ऑर्डर ले रहे हैं.

कई थोक विक्रेताओं का कहना है कि इस बार नामांकन के साथ ही जीत के जश्न के लिए भी फूलों की बुकिंग की जा रही है. बड़े-बड़े काफिलों में नेता और समर्थक फूल मंडियों में पहुंच रहे हैं. कोई नामांकन रैली के लिए माला बुक कर रहा है तो कोई चुनावी नतीजों के दिन के लिए पहले से फूलों की व्यवस्था कर चुका है.

मांग के साथ बढ़ी कीमतें

चुनावी सीजन में फूलों की मांग के साथ दाम भी तेजी से बढ़े हैं. इस बार गुलाब और गेंदा के दामों में 30 से 40 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हुई है. थोक विक्रेता पप्पू बताते हैं, “गेंदा का एक गुच्छा, जिसमें 20 लड़ी होती है, अब 400 रुपये में मिल रहा है. गुलाब के बुके की कीमत 300 से लेकर 1000 रुपये तक जा रही है.”

कीमत बढ़ने के कारण खरीदी की मात्रा में कुछ कमी जरूर आई है. जो समर्थक पहले 40 से 50 हजार रुपये के फूल ले जाते थे, वे अब 20 से 30 हजार रुपये में ही काम चला रहे हैं. बावजूद इसके, बाजार में रौनक और खरीददारों की भीड़ में कोई कमी नहीं है.

फूलों का चुनावी लॉजिस्टिक्स

फूलों की बढ़ी मांग ने मंडियों में अतिरिक्त कामकाज बढ़ा दिया है. माला गूंथने वाले कारीगरों को रात-रातभर काम करना पड़ रहा है. मंडी में रोज सैकड़ों किलो फूलों की खेप आ रही है, जिन्हें ट्रकों से विभिन्न इलाकों में भेजा जा रहा है. चुनावी माहौल ने फूल व्यापारियों को भी नई उम्मीद दी है.

चुनाव का मौसम हमारे लिए त्यौहार जैसा होता है. जितनी भीड़ आज फूल मंडी में दिख रही है, वो साल में सिर्फ छठ और दीवाली पर ही दिखती है.

चुनाव की तैयारी सिर्फ रैलियों, नारों और पोस्टरों तक सीमित नहीं है. इस बार फूलों की माला और गुलाब की पंखुड़ियां भी राजनीति के मंच पर अपनी खास जगह बना चुकी हैं. पटना के बाजारों में फैली यह महक बताती है कि चुनावी राजनीति अब रंगों और खुशबुओं से भी जुड़ चुकी है.

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Pratyush Prashant

लेखक के बारे में

By Pratyush Prashant

महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.

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