पटना हॉस्टल कांड: कोर्ट का CBI से सवाल- पीड़िता का मोबाइल कहां है? हॉस्टल मालिक की जमानत पर फैसला सुरक्षित

Published by :Abhinandan Pandey
Published at :12 Mar 2026 4:46 PM (IST)
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patna hostel case hearing

शंभू गर्ल्स हॉस्टल और मनीष रंजन की तस्वीर

Patna NEET Student Death Case: पटना NEET छात्रा मौत मामले में शंभू गर्ल्स हॉस्टल के मालिक की जमानत याचिका पर कोर्ट में लंबी सुनवाई हुई. सुनवाई के दौरान कोर्ट ने CBI से जांच को लेकर कई तीखे सवाल पूछे, जबकि पीड़िता की मां ने जांच एजेंसियों पर लीपापोती का आरोप लगाया.

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Patna NEET Student Death Case: पटना NEET छात्रा मौत मामले में गुरुवार को कोर्ट में अहम सुनवाई हुई. इस केस में बेउर जेल में बंद शंभू गर्ल्स हॉस्टल बिल्डिंग के मालिक मनीष रंजन की जमानत याचिका पर दूसरे दिन भी बहस चली. सुनवाई के लिए मनीष रंजन को जेल से कोर्ट में पेश किया गया. करीब चार घंटे तक चली इस सुनवाई में दोनों पक्षों ने अपने-अपने तर्क रखे. लंबी बहस के बाद कोर्ट ने फिलहाल जमानत पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है.

चार घंटे चली सुनवाई, दो घंटे जज के चेंबर में बहस

गुरुवार को कोर्ट में जमानत याचिका पर करीब चार घंटे तक सुनवाई हुई. इसमें करीब दो घंटे तक बहस जज के चेंबर में चली. इससे पहले ओपन कोर्ट में दोनों पक्षों के वकीलों ने दलीलें रखीं. पीड़ित पक्ष के वकील ने पटना हाईकोर्ट के फुल बेंच के एक पुराने फैसले का हवाला देते हुए मनीष रंजन को जमानत देने का विरोध किया. इस पर बचाव पक्ष के वकील ने आपत्ति जताई. दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया.

कोर्ट ने CBI से पूछे कई अहम सवाल

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने जांच एजेंसी CBI से कई तीखे सवाल पूछे. कोर्ट ने CBI के अधिकारी पवन श्रीवास्तव से पूछा कि पीड़िता का मोबाइल कहां है. CBI ने बताया कि मोबाइल SIT से मिलने के बाद उसे सीज कर दिया गया. इसके बाद कोर्ट ने पूछा कि क्या मोबाइल की जांच की गई. इस पर CBI ने कहा कि अभी जांच नहीं हुई है.

मोबाइल सीज किया, लेकिन जांच नहीं

कोर्ट ने आगे पूछा कि मनीष रंजन के मोबाइल की जांच हुई या नहीं. इस पर भी CBI ने ‘नहीं’ में जवाब दिया. तब कोर्ट ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि जब मोबाइल की जांच ही नहीं करनी थी तो उसे सीज क्यों किया गया.

CBI ने कोर्ट को बताया कि अब तक कुल 8 लोगों के मोबाइल फोन सीज किए गए हैं. जब कोर्ट ने पूछा कि इनमें से कितनों की जांच हुई है, तो एजेंसी ने बताया कि अभी किसी की भी जांच नहीं हुई है और सभी फोन मालखाना में रखे हैं.

हत्या की जांच पर भी उठे सवाल

कोर्ट ने यह भी पूछा कि इस केस में अटेम्प्ट टू मर्डर का मामला दर्ज किया गया है, क्या इसे मर्डर में बदला जाएगा. इस सवाल पर भी CBI ने साफ जवाब नहीं दिया. कोर्ट ने यह भी पूछा कि पीड़िता की मौत का कारण पता लगाया गया या नहीं. इस पर भी एजेंसी ने ‘नहीं’ कहा. इसके बाद कोर्ट ने सवाल किया कि जब लड़की की मौत हो चुकी थी, तब हत्या का केस क्यों दर्ज नहीं किया गया.

हॉस्टल के लोगों की जांच पर भी सवाल

कोर्ट ने जांच को लेकर कई और सवाल उठाए. कोर्ट ने पूछा कि हॉस्टल में रहने वाले अन्य लोगों की जांच क्यों नहीं की गई. साथ ही यह भी पूछा कि मनीष रंजन का बयान रिकॉर्ड क्यों नहीं किया गया. CBI के पास इन सवालों का स्पष्ट जवाब नहीं था.

वार्डन और सफाई कर्मचारी को लेकर भी सवाल

कोर्ट ने पूछा कि 6 जनवरी के बाद पीड़िता के कमरे में कौन-कौन गया था. इस पर CBI ने बताया कि एक सफाई कर्मचारी, एक वार्डन और एक दोस्त कमरे में गए थे.

जब कोर्ट ने वार्डन का नाम पूछा तो CBI अधिकारी सही नाम नहीं बता सके. कोर्ट ने यह भी पूछा कि क्या सफाई कर्मचारी का बयान लिया गया. CBI ने कहा कि वह अनपढ़ है, इसलिए बयान नहीं लिया गया. इस पर कोर्ट ने कहा कि अनपढ़ होने से बयान लेने में क्या दिक्कत है.

संवेदनशील मामला बताकर बंद कमरे में सुनवाई

इसके बाद CBI की महिला वकील ने आपत्ति जताई. उन्होंने कहा कि मामला बेहद संवेदनशील है और जांच से जुड़ी जानकारी ओपन कोर्ट में नहीं दी जा सकती. इसके बाद आगे की सुनवाई जज के चेंबर में हुई.

कोर्ट के बाहर रो पड़ी पीड़िता की मां

सुनवाई के बाद कोर्ट के बाहर मीडिया से बात करते हुए पीड़िता की मां भावुक हो गईं. उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस और जांच एजेंसियां मामले में लीपापोती कर रही हैं. मां ने कहा कि उनकी बेटी को इंसाफ नहीं मिल रहा है. उन्होंने दावा किया कि हॉस्टल में बड़े नेताओं और प्रभावशाली लोगों के बेटे आते-जाते थे.

सरकार पर भी लगाए आरोप

पीड़िता की मां ने सरकार पर भी गंभीर आरोप लगाए. उन्होंने कहा कि गरीब की बेटी के लिए कोई आवाज नहीं उठाता. सरकार ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ की बात करती है, लेकिन गरीब की बेटियों के साथ न्याय नहीं होता. मीडिया से बात करते-करते पीड़िता की मां भावुक होकर रोने लगीं और बाद में बेहोश हो गईं. फिलहाल इस पूरे मामले में अब सबकी नजर कोर्ट के फैसले पर टिकी हुई है.

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अभिनंदन पांडेय डिजिटल माध्यम में पिछले 2 सालों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. बंसल न्यूज (MP/CG) और दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अनुभव लेते हुए अब प्रभात खबर तक का मुकाम तय किए हैं. अभी डिजिटल बिहार टीम में काम कर रहे हैं. सामाजिक-राजनीतिक नब्ज को करीब से समझने का प्रयास करते हैं. देश-विदेश की घटनाओं, बिहार की राजनीति, और किस्से-कहानियों में विशेष रुचि रखते हैं. डिजिटल मीडिया के नए ट्रेंड्स, टूल्स और नैरेटिव स्टाइल्स के साथ प्रयोग करना पसंद है.

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