भवानीपुर बना ‘मनोवैज्ञानिक युद्धक्षेत्र’, ममता के गढ़ में शुभेंदु की एंट्री से दिलचस्प हुआ मुकाबला, क्या ‘मिनी इंडिया’ तोड़ेगा दीदी की अजेय छवि?

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Bhabanipur Assembly Seat 2026: भवानीपुर विधानसभा सीट पर ममता बनर्जी और शुभेंदु अधिकारी के बीच कांटे की टक्कर है. भाजपा ने यहां बूथ स्तर पर किलेबंदी की है, जबकि टीएमसी ‘घर की बेटी’ के नारे के साथ मैदान में है.
खास बातें
Bhabanipur Assembly Seat 2026: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 की सबसे बड़ी और हाई-प्रोफाइल लड़ाई अब भवानीपुर की गलियों में सिमट आयी है. दक्षिण कोलकाता की यह साधारण-सी दिखने वाली सीट ‘प्रतिष्ठा की लड़ाई’ बन चुकी है. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, जो यहां से तीन बार की विधायक हैं, उनका सीधा मुकाबला नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी से है.
नंदीग्राम के बाद दीदी के गढ़ में शुभेंदु की चुनौती
भाजपा ने इस सीट को एक मनोवैज्ञानिक युद्धक्षेत्र की तरह पेश किया है. नंदीग्राम की ऐतिहासिक हार के बाद, अब दीदी के अपने गढ़ में शुभेंदु अधिकारी की चुनौती ने पश्चिम बंगाल के सियासी तापमान बढ़ा दिया है.
क्यों अहम है भवानीपुर विधानसभा?
कोलकाता नगर निगम के 8 वार्डों में फैला भवानीपुर विधानसभा अपनी सामाजिक विविधता के लिए जाना जाता है. इसे ‘मिनी इंडिया’ कहना गलत नहीं होगा. यहां बंगाली हिंदुओं के साथ-साथ गुजराती व्यापारी, पंजाबी, सिख, मारवाड़ी, जैन और बड़ी संख्या में मुस्लिम मतदाता रहते हैं. बिहार, ओडिशा और झारखंड के प्रवासियों की भी यहां अच्छी तादाद है.
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जातीय समीकरण और हिंदू वोटों का ध्रुवीकरण
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के आंतरिक आंकड़ों के अनुसार, यहां करीब 26.2 प्रतिशत कायस्थ, 24.5 प्रतिशत मुस्लिम, 14.9 प्रतिशत प्रवासी, 10.4 प्रतिशत मारवाड़ी और 7.6 प्रतिशत ब्राह्मण मतदाता हैं. भाजपा इसी सामाजिक समीकरण के सहारे बंगाली और गैर-बंगाली हिंदू वोटों को एकजुट करने की रणनीति पर काम कर रही है.
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TMC का दांव : ‘घर की बेटी’ बनाम विकास की राजनीति
तृणमूल कांग्रेस (TMC) इस मुकाबले को आक्रामकता की बजाय भावनात्मक मोड़ दे रही है. पार्टी ममता बनर्जी को मुख्यमंत्री की बजाय ‘पड़ोस की दीदी’ और ‘घर की बेटी’ के रूप में पेश कर रही है. लक्ष्मी भंडार, कन्याश्री और महिलाओं के लिए सामाजिक सुरक्षा योजनाओं को टीएमसी अपनी जीत का मुख्य आधार मान रही है. कोलकाता के मेयर फिरहाद हकीम का कहना है कि भवानीपुर के लोग ममता बनर्जी को कभी नहीं छोड़ेंगे.
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भाजपा की बूथ-दर-बूथ घेराबंदी
शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व में भाजपा ने महीनों पहले से भवानीपुर की किलेबंदी शुरू कर दी थी. भाजपा का मानना है कि यदि भवानीपुर में ममता बनर्जी को मात दी जाती है, तो उनकी ‘अजेय’ छवि पूरी तरह टूट जायेगी. भाजपा नेता देबजीत सरकार के मुताबिक, जनता अब तुष्टीकरण से ऊब चुकी है और राज्य में ‘राम राज्य’ चाहती है.
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Bhabanipur Assembly Seat 2026: 29 अप्रैल को जनता करेगी फैसला
2021 में नंदीग्राम में ममता बनर्जी को हराने वाले शुभेंदु अधिकारी अब 5 साल बाद दीदी के घर में सेंध लगाने पहुंचे हैं. तृणमूल के लिए यह अपनी राजनीतिक सत्ता बचाने की लड़ाई है, तो भाजपा के लिए बंगाल की सबसे शक्तिशाली नेता के दुर्ग को ढाहने का मौका. भवानीपुर का यह रोमांचक मुकाबला 29 अप्रैल को होने वाले दूसरे चरण के मतदान में सबसे चर्चित केंद्र है.
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By मिथिलेश झा
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