पूर्ण शराबबंदी : बिहार में शराब से जुड़े सभी अपराध गैरजमानती

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 05 Jul 2016 6:22 AM

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पटना : राज्य में लागू शराबबंदी कानून आनेवाले समय में अधिक सख्त होगा. इसके लिए उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग ने नये उत्पाद विधेयक-2016 में कई स्तरों पर महत्वपूर्ण संशोधन किये हैं. संबंधित प्रस्ताव को जल्द ही कैबिनेट की मंजूरी मिलने जा रही है. इसके बाद इसे 29 जुलाई से शुरू होने जा रहे विधानमंडल […]

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पटना : राज्य में लागू शराबबंदी कानून आनेवाले समय में अधिक सख्त होगा. इसके लिए उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग ने नये उत्पाद विधेयक-2016 में कई स्तरों पर महत्वपूर्ण संशोधन किये हैं. संबंधित प्रस्ताव को जल्द ही कैबिनेट की मंजूरी मिलने जा रही है. इसके बाद इसे 29 जुलाई से शुरू होने जा रहे विधानमंडल के मॉनसून सत्र में पेश किया जायेगा. विधानमंडल के दोनों सदनों की मंजूरी मिलने के बाद नया शराबबंदी कानून अधिक सख्ती से पूरे राज्य में लागू हो जायेगा.

नये उत्पाद कानून में कई स्तरों पर विशेष बदलाव किये गये हैं. अब शराब से जुड़ी किसी तरह की गतिविधि को पूरी तरह से अपराध की श्रेणी में रखा गया है. इसके तहत अगर कोई व्यक्ति शराब से जुड़ी किसी तरह की गतिविधि में पकड़ा जाता है, तो वह पूरी तरह से गैरजमानती होगा. अब कोई व्यक्ति किसी दूसरे राज्य या स्थान से शराब पीकर यहां आ जाता है, तब भी उसे उतना ही दोषी माना जायेगा, जितना राज्य में शराब पीये हुए पकड़ा जाता है. इस अपराध को गैरजमानती श्रेणी में शामिल किया गया है.
शराब से जुड़ी किसी तरह की गतिविधि को अपराध से अलग करके नहीं रखा गया है. राज्य में शराब मतलब सीधा अपराध हो जायेगा. शराब की किसी तरह की बरामदगी, उपयोग, ट्रांसपोर्टेशन समेत अन्य किसी तरह के क्रियाकलापों को गैरजमानती अपराध की श्रेणी में रखने का प्रावधान किया गया है. यहां तक कि अगर किसी के घर में शराब रखी भी पकड़ी जाती है, तब भी वह गैरजमानती श्रेणी का अपराध माना जायेगा.
शराब से जुड़े मामलों की सुनवाई के लिए विशेष अदालत का गठन और उत्पाद दारोगा को कई स्तर पर अधिकार बढ़ाने समेत अन्य बातें भी जुड़ी हुई हैं.
क्यों पड़ी जरूरत : पांच अप्रैल से पूर्ण शराबबंदी की घोषणा की गयी थी. इसके लिए बिहार उत्पाद अधिनियम-1915 को संशोधित करके उत्पाद (संशोधन) अधिनियम-2016 लागू किया गया. लेकिन, तीन महीने के दौरान इस नये विधेयक में कई बातों पर फिर से संशोधन करने की जरूरत महसूस की गयी.
हाल में पटना हाइकोर्ट ने घर में शराब पकड़े जाने के दो-तीन मामलों में लोगों को जमानत दे दी थी. इसके मद्देनजर नये उत्पाद कानून में इन बातों को भी संशोधित करके जोड़ दिया गया है. शराबबंदी मतलब पूरी तरह से बंद, किसी व्यक्ति का इससे किसी तरह का कोई सरोकार नहीं होगा, नये संशोधन में इन बातों का ध्यान रखा गया है. इसके बाद फिर से संशोधन किया जा रहा है.
उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग ने प्रस्ताव को किया तैयार
ये अपराध भी गैरजमानती
शराब की किसी तरह की बरामदगी, उपयोग, ट्रांसपोर्टेशन समेत अन्य किसी तरह के क्रियाकलाप
अगर किसी के घर में शराब रखी भी पकड़ी जाती है, तब भी वह गैरजमानती अपराध माना जायेगा
अभी औसतन 52 दिनों में मिल रही जमानत
पांच अप्रैल से पांच जुलाई के बीच 6435 पर एफआइआर दर्ज की गयी, जिनमें 6314 को जेल भेजा जा चुका है. इनमें 447 को अब तक जमानत मिल चुकी है. औसतन 52 दिनों में लोगों को जमानत मिल रही है. आनेवाले दिनों में इस कानून को ज्यादा सख्त किया जायेगा.
गांवों में मोटरसाइकिल दस्ता मारेगा छापे
पटना : राज्य में शराबबंदी को पूरी सख्ती से लागू करने के लिए कई स्तरों पर चौकसी बढ़ायी जा रही है. ग्रामीण और सुदूरवर्ती इलाकों में अवैध शराब के कारोबारियों को पकड़ने के लिए अब मोटरसाइकिल दस्ता तैयार किया गया है. उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग ने यह नयी पहल की है. 15 दिनों में यह विशेष दस्ता काम करने लगेगा. इसके लिए फिलहाल 194 मोटरसाइकिलों की व्यवस्था की जा रही है.
यह जानकारी उत्पाद आयुक्त कुंवर जंग बहादुर ने सोमवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में दी. उन्होंने कहा कि इस दस्ते में फिलहाल विभाग के ही सिपाही और दारोगा को शामिल किया गया है. आनेवाले समय में ऐसी व्यवस्था पुलिस महकमे के लिए भी की जायेगी. वर्तमान में यह प्रयोग रेल पुलिस में किया गया था, जो काफी सफल रहा.
उन्होंने कहा कि यह दस्ता संकीर्ण और बेहद दुर्गम रास्तों के जरिये भीतरी इलाकों में जाकर अवैध शराब के कारोबारियों के खिलाफ कार्रवाई करने में सक्षम साबित होते हैं. नशामुक्त बिहार के अभियान को कारगर बनाने के लिए एक पोर्टल भी तैयार किया गया है, जिसमें मद्य निषेध की सारी सूचनाएं अपलोड की गयी हैं. इससे आम लोगों को सभी तरह की जानकारियां मिल सकती हैं. उन्होंने कहा कि राज्य में अब तक 428 डिजिटल लॉक की बिक्री हो चुकी है. 1751 वाहनों में यह लॉक लगाये जा चुके हैं. उत्पाद सामग्री लेकर राज्य होकर गुजरनेवाली सभी वाहनों में लॉक लगाने का काम शुरू हो गया है.
शराब की जांच के लिए मशीन का उपयोग
शराबियों की जांच के लिए 289 ब्रेथ एनालाइजर उपलब्ध हैं. सभी सीमावर्ती जिलों में छह-छह मशीनें दी गयी हैं. ब्रेथ एनालाइजर मशीन के साथ 50-50 पाइप भी दिये गये हैं, जिसका उपयोग अलग-अलग लोगों की जांच करने के लिए किया जाये.
सभी जिलों में दो-दो वकील तैनात
सभी जिलों में उत्पाद से जुड़े मामलों की मॉनीटरिंग करने और इसके मुकदमे को लड़ने के लिए कम-से-कम दो वकील तैनात कर दिये गये हैं. बड़े जिलों में चार वकील तैनात किये गये हैं. साथ ही बड़े जिलों में दो स्पेशल लोक अभियोजक और छोटे जिलों में एक स्पेशल लोक अभियोजक की प्रतिनियुक्ति करने का निर्देश विभाग ने डीएम को दिया है. इससे शराब के मामलों में फंसे आरोपितों की जमानत जल्द नहीं होने और ऐसे मामलों की सशक्त मॉनीटरिंग करने में काफी सहायता मिलेगी.
बिहार से सटे झारखंड के जिलों में शराब से राजस्व 40 प्रतिशत बढ़ा
रांची (विवेक चंद्र) : बिहार में शराबबंदी झारखंड सरकार का खजाना बढ़ा रही है. बिहार से लगे झारखंड के सीमावर्ती जिलों में शराब की बिक्री में जबरदस्त इजाफा हुआ है. पिछले वर्ष की तुलना में बिहार से सटे झारखंड के सीमावर्ती जिलों ने शराब से रिकाॅर्ड राजस्व वसूली की है.
झारखंड के 10 जिले बिहार की सीमा छूते हैं. इन सीमावर्ती जिलों को शराब से मिलनेवाले राजस्व में 40.36 प्रतिशत का इजाफा हुआ है. सीमावर्ती
जिलों में पिछले साल अब तक शराब से 1900.89 लाख रुपये का राजस्व अर्जित किया था. वहीं, इस साल अब तक 2667.90 लाख रुपये राजस्व मिल चुका है. स्थिति यह है कि सीमावर्ती जिले शराब की बिक्री से सरकार द्वारा दिये गये राजस्व लक्ष्य से अधिक वसूली कर चुके हैं.
बिहार की सीमा से सटे झारखंड के राज्यों में शराब की बिक्री सबसे अधिक हजारीबाग, पलामू और गिरिडीह में हो रही है. हजारीबाग जिले ने नये वित्तीय वर्ष के पहले दो महीनों में शराब से 430.70 लाख रुपये का राजस्व कमाया है. गिरिडीह 371 करोड़ और पलामू भी 361 लाख रुपये का राजस्व अर्जित कर चुका है. दुमका और देवघर जिले में भी शराब की रिकार्ड बिक्री हुई है. इन दोनों जिलों में भी शराब से 200 लाख रुपये से अधिक राजस्व मिला है.
अब तक झारखंड को 2310 लाख रुपये का राजस्व मिला
पूरे झारखंड में शराब से मिलने वाले राजस्व में बढ़ोतरी हुई है. पिछले वर्ष की तुलना में चालू वित्तीय वर्ष में अब तक शराब से होने वाली आय में 2310 लाख रुपये की वृद्धि हुई है.
राज्य में शराब से मिलने वाले राजस्व का वृद्धि प्रतिशत 16.86 है. वर्ष 2015-16 के पहले दो महीनों में 137 करोड़ रुपये का राजस्व आया था. वहीं, 2016-17 के मई महीने तक शराब से 160 करोड़ रुपये राजस्व वसूला गया है. उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग के अफसर राजस्व वसूली में हो रही वृद्धि को बिहार में शराबबंदी के फैसले से जोड़ कर देख रहे हैं. सीमावर्ती इलाकों में शराब के राजस्व में आयी गुणात्मक वृद्धि भी इसी की ओर संकेत देती है.
शराब से राजस्व
जिला 2016-17 2015-16
पलामू 361.78 226.23
गढ़वा 139.56 122.23
हजारीबाग 430.70 476.90
चतरा 89.65 72.30
कोडरमा 166.10 128.51
गिरिडीह 371.83 283.03
दुमका 232.26 164.97
गोड्डा 95.92 82.48
साहेबगंज 105.90 99.75
देवघर 246.16 214.49
कुल 2667.90 1900.89
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