फ्रिज-आरओ के दौर में फिर बढ़ी 'देशी फ्रिज' की डिमांग, हाट-बाजारों में सजी दुकानें

Published by : Preeti Dayal Updated At : 22 May 2026 2:32 PM

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बिहटा में मिट्टी के घड़े की दुकान

Bihar News: बिहार में भीषण गर्मी के कारण लोगों का हाल बेहाल है. इस बीच देशी फ्रिज से मशहूर मिट्टी के घड़े की डिमांड बढ़ गई है. भीषण गर्मी में लोगों को मिट्टी के घड़े का सोंधा पानी खूब भा रहा है. सड़क किनारे और हाट-बाजारों में मिट्टी के बर्तनों की दुकानें सज गईं हैं.

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Bihar News: (बिहटा से मोनु कुमार मिश्रा की रिपोर्ट) भीषण गर्मी और लगातार बढ़ते तापमान के बीच बिहटा में एक बार फिर पारंपरिक मिट्टी के घड़े और सुराही की मांग तेजी से बढ़ने लगी है. फ्रिज और आरओ के बढ़ते इस्तेमाल के बावजूद लोग अब प्राकृतिक ठंडक और स्वास्थ्य लाभ के कारण देशी फ्रिज यानी मिट्टी के घड़े की ओर लौट रहे हैं.

शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों तक सड़क किनारे और हाट-बाजारों में मिट्टी के बर्तनों की दुकानें सज गई हैं, जहां सुबह से शाम तक खरीदारों की भीड़ देखी जा रही है. बिहटा प्रखंड के बिहटा बाजार, राघोपुर तीन इलाकों मुहानी, कन्हौली, सदीसोपुर इलाके और आस-पास के गांवों में इन दिनों घड़ा, सुराही और टोटी वाले मटकों की बिक्री जोरों पर है.

क्या कहना है दुकानदारों का?

दुकानदारों का कहना है कि इस बार अप्रैल-मई की शुरुआत से ही गर्मी ने तेवर दिखाना शुरू कर दिया, जिससे बिक्री पिछले सालों की तुलना में अधिक हो गई है. खासकर बिजली कटौती और अनियमित आपूर्ति के कारण लोग कम खर्च में ठंडा पानी पाने के लिए फिर पारंपरिक विकल्प अपना रहे है.

इस तरह के मटकों की बढ़ी लोकप्रियता

समय के साथ मिट्टी के बर्तनों का स्वरूप भी बदल रहा है. पहले जहां सामान्य खुले मुंह वाले घड़े बिकते थे, वहीं अब टोटी लगे मटके, डिजाइनदार सुराही और सजावटी घड़े लोगों की पहली पसंद बन रहे हैं. पांच लीटर से लेकर 30 लीटर तक के मटके बाजार में उपलब्ध हैं. टोटी वाले मटकों की कीमत सामान्य घड़ों से 50 से 100 रुपये अधिक है, फिर भी इनकी मांग सबसे ज्यादा है.

फ्रिज के पानी से ज्यादा पसंद आ रहा घड़े का पानी

स्थानीय लोगों का कहना है कि फ्रिज का अत्यधिक ठंडा पानी कई बार गला खराब कर देता है, जबकि मिट्टी के घड़े का पानी प्राकृतिक रूप से ठंडा और स्वादिष्ट होता है. घड़े के पानी की सोंधी खुशबू और ठंडक लोगों को राहत दे रही है. कई संपन्न परिवार भी घर में फ्रिज होने के बावजूद पीने के लिए घड़े का पानी ही इस्तेमाल कर रहे हैं.

स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी

मिट्टी के बर्तन विक्रेता कमल पंडित और राजू पंडित ने बताया कि घड़े का पानी शरीर का तापमान संतुलित रखने में मदद करता है और लू से बचाव में भी कारगर माना जाता है. मिट्टी के सूक्ष्म छिद्र पानी को प्राकृतिक रूप से ठंडा रखते हैं. उन्होंने बताया कि रंग या पेंट किए गए मटकों की अपेक्षा साधारण मिट्टी के घड़े अधिक बेहतर होते हैं, क्योंकि उनमें वाष्पीकरण की प्रक्रिया बनी रहती है.

महंगाई ने बढ़ाई कुम्हारों की चिंता

कुम्हार समुदाय के लोगों का कहना है कि गर्मी का मौसम ही उनकी कमाई का मुख्य समय होता है. लेकिन मिट्टी, लकड़ी और परिवहन खर्च बढ़ने से लागत काफी बढ़ गई है. एक ट्रैक्टर मिट्टी की कीमत करीब दो से तीन हजार रुपये तक पहुंच गई है, जबकि लकड़ी भी महंगी हो गई है. इसके बावजूद मांग के अनुसार अलग-अलग डिजाइन और आकार के मटके तैयार किए जा रहे हैं.

गांवों में अब भी कायम है परंपरा

बिहटा और आस-पास के ग्रामीण इलाकों में आज भी कई परिवार गर्मी शुरू होते ही घड़ा और सुराही खरीदना जरूरी मानते हैं. खासकर बुजुर्गों का मानना है कि मिट्टी के बर्तन का पानी शरीर को प्राकृतिक ठंडक देता है और यह स्वास्थ्य के लिए सुरक्षित भी होता है. यही वजह है कि आधुनिक उपकरणों के दौर में भी देशी फ्रिज का क्रेज फिर लौटता नजर आ रहा है.

कुम्हारों को सरकार से उम्मीद

कुम्हार समुदाय को उम्मीद है कि बिहार सरकार मिट्टी के पारंपरिक कारोबार को बढ़ावा देने के लिए विशेष सहायता देगी. कारीगरों को सस्ती मिट्टी, आसान ऋण, आधुनिक प्रशिक्षण और बाजार की सुविधा मिलने से उनका रोजगार मजबूत होगा और देशी घड़े-सुराही बनाने की परंपरा भी संरक्षित रह सकेगी.

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प्रीति दयाल, प्रभात खबर डिजिटल में बतौर कंटेंट राइटर काम कर रहीं हैं. यूट्यूब पोर्टल सिटी पोस्ट लाइव से पत्रकारिता की शुरुआत की. इसके बाद डेलीहंट और दर्श न्यूज जैसे मीडिया संस्थानों में काम कर चुकीं हैं. डिजिटल मीडिया और कंटेंट राइटिंग में साढ़े 3 साल का अनुभव है. खबरें लिखना, वेब कंटेंट तैयार करने और ट्रेंडिंग सब्जेक्ट पर सटीक और प्रभावी खबरें लिखने का काम कर रहीं हैं. प्रीति दयाल ने पत्रकारिता की पढ़ाई संत जेवियर्स कॉलेज ऑफ मैनेजमेंट एंड टेक्नोलॉजी से की. इस दौरान पत्रकारिता से जुड़ी कई विधाओं को सीखा. मीडिया संस्थानों में काम करने के दौरान डिजिटल जर्नलिज्म से जुड़े नए टूल्स, तकनीकों और मीडिया ट्रेंड्स को सीखा. पहली बार लोकसभा चुनाव 2024 और बिहार विधानसभा चुनाव 2025 जैसे बड़े चुनावी कवरेज में काम करने का अवसर मिला. इस दौरान बिहार की राजनीति, चुनावी रणनीतियों, राजनीतिक दलों और प्रमुख नेताओं से जुड़े कई प्रभावशाली और पाठकों की रुचि के अनुसार कंटेंट तैयार किए. चुनावी माहौल को समझते हुए राजनीतिक विश्लेषण और ट्रेंडिंग मुद्दों पर आधारित खबरों को आसान और प्रभावी भाषा में तैयार करना कार्यशैली का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है. कंटेंट रिसर्च, SEO आधारित लेखन, सोशल मीडिया फ्रेंडली कंटेंट तैयार करना और तेजी से बदलते न्यूज वातावरण में काम करना प्रमुख क्षमताओं में शामिल है. बिहार की राजनीति, सामाजिक मुद्दों, सिनेमा और देश-दुनिया की महत्वपूर्ण घटनाओं पर रुचि और समझ है. टीम के साथ बेहतर समन्वय बनाकर काम करना और समय सीमा के अंदर गुणवत्तापूर्ण काम पूरा करना कार्यशैली का हिस्सा है. प्रीति दयाल का उद्देश्य डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में लगातार सीखते हुए अपनी पत्रकारिता कौशल को और बेहतर बनाना और पाठकों तक विश्वसनीय और प्रभावशाली खबरें पहुंचाना है.

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