हजारीबाग में शिक्षा व्यवस्था चरमराई, 2 BEEO के भरोसे 1484 स्कूल, मैट्रिक रैंकिंग में गिरावट
Published by : Sameer Oraon Updated At : 22 May 2026 5:25 AM
हजारीबाग जिला शिक्षा पदाधिकारी का दफ्तार
Hazaribagh Education Department: झारखंड के हजारीबाग जिले में अधिकारियों की भारी कमी और नियमित निरीक्षण न होने से स्कूली शिक्षा व्यवस्था चरमरा गई है. जिला मैट्रिक परीक्षा की राज्य रैंकिंग में 7वें से फिसलकर 14वें पायदान पर आ गया है. डीईओ के पास 5 और डीएसई के पास 3 पदों का प्रभार है, वहीं 16 प्रखंडों के लिए सिर्फ 2 बीईईओ कार्यरत हैं. पूरी ग्राउंड रिपोर्ट यहां पढ़ें.
हजारीबाग से आरिफ की रिपोर्ट
Hazaribagh Education Department, हजारीबाग : उत्तरी छोटानागपुर प्रमंडल का मुख्यालय और कभी राज्य का ‘एजुकेशन हब’ माना जाने वाला हजारीबाग जिला इन दिनों स्कूली शिक्षा के मोर्चे पर बेहद बदहाल स्थिति से गुजर रहा है. जिले की शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह प्रशासनिक ढुलमुल नीति और कागजी दावों के भरोसे चल रही है. इसका सबसे बड़ा और चिंताजनक प्रमाण हाल ही में जारी झारखंड अधिविध परिषद (JAC) की वार्षिक मैट्रिक परीक्षा के नतीजों में देखने को मिला.
हजारीबाग का रैंकिंग फिसला
राज्य स्तर पर कभी टॉप-10 में रहने वाला हजारीबाग जिला वर्ष 2025 की सातवीं (7th) रैंकिंग से सीधे फिसलकर वर्ष 2026 में 14वें स्थान पर पहुंच गया है. इस करारी गिरावट के बाद जब उपायुक्त (DC) हेमंत सती की पैनी नजर शिक्षा विभाग के कामकाज पर पड़ी, तो अधिकारियों द्वारा स्कूलों का नियमित निरीक्षण न करने और कागजी रिपोर्टिंग की पूरी पोल-पट्टी खुलकर सामने आ गई है.
CRP के भरोसे चल रही है इंस्पेक्शन रिपोर्ट
समग्र शिक्षा अभियान के तहत हजारीबाग जिले भर के 1484 सरकारी स्कूलों में नियमित निरीक्षण (स्कूल चेकिंग), शैक्षणिक सुधार और बुनियादी ढांचों के विकास पर सरकार हर साल करोड़ों रुपये पानी की तरह बहा रही है. नियम और शेड्यूल के मुताबिक अधिकारियों को समय-समय पर फील्ड में जाकर स्कूलों का औचक निरीक्षण करना है. जिले की 252 पंचायतों में स्थित 16 प्रखंडों के 1484 स्कूलों को 112 संकुल संसाधन केंद्रों (CRC) में बांटा गया है. इन केंद्रों पर झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद के तहत संकुल साधन सेवी (CRP) कार्यरत हैं. विभागीय सूत्रों की मानें तो जिले के आला शिक्षा अधिकारी खुद दफ्तरों से बाहर नहीं निकलते. वे कार्यालय में आराम से बैठकर इन्हीं सीआरपी (CRP) के भरोसे ग्राउंड रिपोर्ट तैयार करवा लेते हैं. अगर इस करोड़ों रुपये के निरीक्षण फंड और जमीनी हकीकत की निष्पक्ष जांच कराई जाए, तो बेहद चौंकाने वाले खुलासे हो सकते हैं.
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DEO के पास 5 तो DSE संभाल रहे हैं 3 पदों का बोझ
हजारीबाग में शिक्षा व्यवस्था बेपटरी होने की सबसे मुख्य वजह प्रशासनिक स्तर पर अधिकारियों की घोर कमी और ‘मल्टी-टास्किंग’ का ओवरलोड है. जिले के दो शीर्ष अधिकारी एक साथ कई महत्वपूर्ण पदों की कुर्सियां संभाल रहे हैं. जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO) प्रवीण रंजन लंबे समय से एक साथ 5 पदों का दायित्व संभाल रहे हैं. डीईओ के अलावा उनके पास उत्तरी छोटानागपुर प्रमंडल के क्षेत्रीय शिक्षा संयुक्त निदेशक (RJDE) का प्रभार है. इसके साथ ही वे हजारीबाग सरकारी बीएड कॉलेज और प्रतिष्ठित इंदिरा गांधी बालिका आवासीय प्लस टू स्कूल, दोनों के प्रभारी प्राचार्य (Principal) भी हैं. इसके अलावा वे झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद के जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (DPO) की भूमिका भी निभा रहे हैं.
यही हाल जिला शिक्षा अधीक्षक आकाश कुमार का भी है. वह एक साथ 3 महत्वपूर्ण पदों पर कार्य कर रहे हैं. डीएसई के मुख्य पद के साथ-साथ वे जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (DIET) के प्रभारी प्राचार्य हैं, और हजारीबाग झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद के सहायक जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (ADPO) का काम भी देख रहे हैं.
16 प्रखंडों का जिम्मा सिर्फ 2 अफसरों के कंधों पर
प्रखंड स्तर पर स्कूलों की कमान संभालने वाले प्रखंड शिक्षा प्रसार पदाधिकारियों (BEEO) की जिले में बेहद शर्मनाक स्थिति है. हजारीबाग के 16 प्रखंडों की मॉनिटरिंग के लिए मात्र 2 बीईईओ कार्यरत हैं. राकेश कुमार को अकेले 9 प्रखंडों की जिम्मेदारी संभालनी पड़ रही है, तो विजय राम के पास 7 प्रखंडों का अतिरिक्त कार्यभार है. ऐसे में सवाल उठना लाजमी है कि एक अधिकारी हर दिन अलग-अलग प्रखंडों के दर्जनों स्कूलों का निष्पक्ष और प्रभावी निरीक्षण कैसे कर सकता है?
कहां कितना सीआरसी, स्कूल और पंचायत
प्रखंड-सीआरसी-स्कूल-पंचायत
बरही – 07-118-20
बड़कागांव – 09-129-23
बरकट्ठा – 07-120-17
विष्णुगढ़ – 12-152-24
चरकुला – 03-45-09
चौपारण – 12-159-26
चुरचू – 05-70-08
डाडी – 05-63-14
दारू – 03-51-09
सदर – 07-95-20
इचाक – 11-103-19
कटकमदाग – 05-55-15
कटकमसांडी – 09-102-17
केरेडारी – 08-107-16
पदमा – 04-49-08
टाटीझरिया – 05-66-07
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समीर उरांव, डिजिटल मीडिया में सीनियर जर्नलिस्ट हैं और वर्तमान में प्रभात खबर.कॉम में सीनियर कटेंट राइटर के पद पर हैं. झारखंड, लाइफ स्टाइल और स्पोर्ट्स जगत की खबरों के अनुभवी लेखक समीर को न्यूज वर्ल्ड में 5 साल से ज्यादा का वर्क एक्सपीरियंस है. वह खबरों की नब्ज पकड़कर आसान शब्दों में रीडर्स तक पहुंचाना बखूबी जानते हैं. साल 2019 में बतौर भारतीय जनसंचार संस्थान से पत्रकारिता करने के बाद उन्होंने हिंदी खबर चैनल में बतौर इंटर्न अपना करियर शुरू किया. इसके बाद समीर ने डेली हंट से होते हुए प्रभात खबर जा पहुंचे. जहां उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग और वैल्यू ऐडेड आर्टिकल्स लिखे, जो रीडर्स के लिए उपयोगी है. कई साल के अनुभव से समीर पाठकों की जिज्ञासाओं का ध्यान रखते हुए SEO-ऑप्टिमाइज्ड, डेटा ड्रिवन और मल्टीपल एंगल्स पर रीडर्स फर्स्ट अप्रोच राइटिंग कर रहे हैं.
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