हजारीबाग में शिक्षा व्यवस्था चरमराई, 2 BEEO के भरोसे 1484 स्कूल, मैट्रिक रैंकिंग में गिरावट

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Hazaribagh Education Department

हजारीबाग जिला शिक्षा पदाधिकारी का दफ्तार

Hazaribagh Education Department: झारखंड के हजारीबाग जिले में अधिकारियों की भारी कमी और नियमित निरीक्षण न होने से स्कूली शिक्षा व्यवस्था चरमरा गई है. जिला मैट्रिक परीक्षा की राज्य रैंकिंग में 7वें से फिसलकर 14वें पायदान पर आ गया है. डीईओ के पास 5 और डीएसई के पास 3 पदों का प्रभार है, वहीं 16 प्रखंडों के लिए सिर्फ 2 बीईईओ कार्यरत हैं. पूरी ग्राउंड रिपोर्ट यहां पढ़ें.

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हजारीबाग से आरिफ की रिपोर्ट

Hazaribagh Education Department, हजारीबाग : उत्तरी छोटानागपुर प्रमंडल का मुख्यालय और कभी राज्य का ‘एजुकेशन हब’ माना जाने वाला हजारीबाग जिला इन दिनों स्कूली शिक्षा के मोर्चे पर बेहद बदहाल स्थिति से गुजर रहा है. जिले की शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह प्रशासनिक ढुलमुल नीति और कागजी दावों के भरोसे चल रही है. इसका सबसे बड़ा और चिंताजनक प्रमाण हाल ही में जारी झारखंड अधिविध परिषद (JAC) की वार्षिक मैट्रिक परीक्षा के नतीजों में देखने को मिला.

हजारीबाग का रैंकिंग फिसला

राज्य स्तर पर कभी टॉप-10 में रहने वाला हजारीबाग जिला वर्ष 2025 की सातवीं (7th) रैंकिंग से सीधे फिसलकर वर्ष 2026 में 14वें स्थान पर पहुंच गया है. इस करारी गिरावट के बाद जब उपायुक्त (DC) हेमंत सती की पैनी नजर शिक्षा विभाग के कामकाज पर पड़ी, तो अधिकारियों द्वारा स्कूलों का नियमित निरीक्षण न करने और कागजी रिपोर्टिंग की पूरी पोल-पट्टी खुलकर सामने आ गई है.

CRP के भरोसे चल रही है इंस्पेक्शन रिपोर्ट

समग्र शिक्षा अभियान के तहत हजारीबाग जिले भर के 1484 सरकारी स्कूलों में नियमित निरीक्षण (स्कूल चेकिंग), शैक्षणिक सुधार और बुनियादी ढांचों के विकास पर सरकार हर साल करोड़ों रुपये पानी की तरह बहा रही है. नियम और शेड्यूल के मुताबिक अधिकारियों को समय-समय पर फील्ड में जाकर स्कूलों का औचक निरीक्षण करना है. जिले की 252 पंचायतों में स्थित 16 प्रखंडों के 1484 स्कूलों को 112 संकुल संसाधन केंद्रों (CRC) में बांटा गया है. इन केंद्रों पर झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद के तहत संकुल साधन सेवी (CRP) कार्यरत हैं. विभागीय सूत्रों की मानें तो जिले के आला शिक्षा अधिकारी खुद दफ्तरों से बाहर नहीं निकलते. वे कार्यालय में आराम से बैठकर इन्हीं सीआरपी (CRP) के भरोसे ग्राउंड रिपोर्ट तैयार करवा लेते हैं. अगर इस करोड़ों रुपये के निरीक्षण फंड और जमीनी हकीकत की निष्पक्ष जांच कराई जाए, तो बेहद चौंकाने वाले खुलासे हो सकते हैं.

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DEO के पास 5 तो DSE संभाल रहे हैं 3 पदों का बोझ

हजारीबाग में शिक्षा व्यवस्था बेपटरी होने की सबसे मुख्य वजह प्रशासनिक स्तर पर अधिकारियों की घोर कमी और ‘मल्टी-टास्किंग’ का ओवरलोड है. जिले के दो शीर्ष अधिकारी एक साथ कई महत्वपूर्ण पदों की कुर्सियां संभाल रहे हैं. जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO) प्रवीण रंजन लंबे समय से एक साथ 5 पदों का दायित्व संभाल रहे हैं. डीईओ के अलावा उनके पास उत्तरी छोटानागपुर प्रमंडल के क्षेत्रीय शिक्षा संयुक्त निदेशक (RJDE) का प्रभार है. इसके साथ ही वे हजारीबाग सरकारी बीएड कॉलेज और प्रतिष्ठित इंदिरा गांधी बालिका आवासीय प्लस टू स्कूल, दोनों के प्रभारी प्राचार्य (Principal) भी हैं. इसके अलावा वे झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद के जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (DPO) की भूमिका भी निभा रहे हैं.

यही हाल जिला शिक्षा अधीक्षक आकाश कुमार का भी है. वह एक साथ 3 महत्वपूर्ण पदों पर कार्य कर रहे हैं. डीएसई के मुख्य पद के साथ-साथ वे जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (DIET) के प्रभारी प्राचार्य हैं, और हजारीबाग झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद के सहायक जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (ADPO) का काम भी देख रहे हैं.

16 प्रखंडों का जिम्मा सिर्फ 2 अफसरों के कंधों पर

प्रखंड स्तर पर स्कूलों की कमान संभालने वाले प्रखंड शिक्षा प्रसार पदाधिकारियों (BEEO) की जिले में बेहद शर्मनाक स्थिति है. हजारीबाग के 16 प्रखंडों की मॉनिटरिंग के लिए मात्र 2 बीईईओ कार्यरत हैं. राकेश कुमार को अकेले 9 प्रखंडों की जिम्मेदारी संभालनी पड़ रही है, तो विजय राम के पास 7 प्रखंडों का अतिरिक्त कार्यभार है. ऐसे में सवाल उठना लाजमी है कि एक अधिकारी हर दिन अलग-अलग प्रखंडों के दर्जनों स्कूलों का निष्पक्ष और प्रभावी निरीक्षण कैसे कर सकता है?

कहां कितना सीआरसी, स्कूल और पंचायत

प्रखंड-सीआरसी-स्कूल-पंचायत
बरही – 07-118-20
बड़कागांव – 09-129-23
बरकट्ठा – 07-120-17
विष्णुगढ़ – 12-152-24
चरकुला – 03-45-09
चौपारण – 12-159-26
चुरचू – 05-70-08
डाडी – 05-63-14
दारू – 03-51-09
सदर – 07-95-20
इचाक – 11-103-19
कटकमदाग – 05-55-15
कटकमसांडी – 09-102-17
केरेडारी – 08-107-16
पदमा – 04-49-08
टाटीझरिया – 05-66-07

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समीर उरांव

लेखक के बारे में

By समीर उरांव

इंटरनेशनल स्कूल ऑफ बिजनेस एंड मीडिया से बीबीए मीडिया में ग्रेजुएट होने के बाद साल 2019 में भारतीय जनसंचार संस्थान दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया. 5 साल से अधिक समय से प्रभात खबर में डिजिटल पत्रकार के रूप में कार्यरत हूं. इससे पहले डेली हंट में बतौर प्रूफ रीडर एसोसिएट के रूप में काम किया. झारखंड के सभी समसामयिक मुद्दे खासकर राजनीति, लाइफ स्टाइल, हेल्थ से जुड़े विषयों पर लिखने और पढ़ने में गहरी रुचि है. तीन साल से अधिक समय से झारखंड डेस्क पर काम कर रहा हूं. फिर लंबे समय तक लाइफ स्टाइल के क्षेत्र में भी काम किया हूं. इसके अलावा स्पोर्ट्स में भी गहरी रुचि है.

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