शराबबंदी पर नीतीश सरकार की जुबान लड़खड़ा रही है: सुशील

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 17 Dec 2015 7:57 PM

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पटना : पूर्व उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने कहा है कि राज्य में शराबबंदी के पूर्व ही सरकार की जुबान लड़खड़ा रही है. श्री मोदी ने ट्वीट कर कहा है कि कभी सिर्फ देसी शराब पर पाबंदी की बात होती है, तो कभी कहा जाता है कि राज्य में हर तरह की शराब के उत्पादन, […]

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पटना : पूर्व उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने कहा है कि राज्य में शराबबंदी के पूर्व ही सरकार की जुबान लड़खड़ा रही है. श्री मोदी ने ट्वीट कर कहा है कि कभी सिर्फ देसी शराब पर पाबंदी की बात होती है, तो कभी कहा जाता है कि राज्य में हर तरह की शराब के उत्पादन, बिक्री और उपभोग पर प्रतिबंध लगेगा. उन्होंने कहा है कि एक तरफ मुख्यमंत्री पूर्ण शराबबंदी का वादा निभाने की बात करते हैं, तो दूसरी तरफ लालू प्रसाद शराब कारोबारियों की व्यथा सुनते हैं. सत्ता के दो केंद्रों के बीच से बिहार स्टेट बिवरीज कारपोरेशन खुदरा विदेशी शराब की बिक्री भी अपने हाथ में लेने का रास्ता निकाल रही है.

उत्पाद आयुक्त ने अपने अधीनस्थ अधिकारियों को शराब गोदाम और दुकान के लिए हर जिले में जमीन खोजने का निर्देश जारी किया है. उन्होंने कहा है कि शराबबंदी को लेकर पता नहीं कौन नशे में है और कौन होश में, लेकिन बयानों से तो बहानेबाजी की गंध आ रही है.

एक अन्य ट्वीट में उन्होंने कहा है कि धोखाधड़ी से नेशनल हेराल्ड प्रेस की करोड़ों की सम्पत्ति हथियाने के मामले में अदालत पर राजनीतिक दबाव बनाने के लिए कांग्रेस ने पहले संसद ठप की. अब सहानुभूति पाने के लिए सोनिया गांधी और राहुल गांधी ने इस मामले में जमानत न लेकर जेल जाने का मन बनाया है. उन्हें लगता है कि जेल जाने वाले किसी भी व्यक्ति को देश की जनता महान मान लेती है और अगर नाम के साथ गांधी जुड़ा हो, तब तो धोखा देना बहुत आसान हो जाता है. नालंदा जिले में तैनात एक प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी के खिलाफ भ्रष्टाचार के सबूत मिले. 16 दिसंबर को निगरानी विभाग ने छापा मारकर पटना और नालंदा में आरोपी के एक मकान, दो फ्लैट और 13 भूखंड की अकूत संपत्ति का पता लगाया. अगर मुख्यमंत्री के गृह जिले के इस अधिकारी ने किसी तरह मुख्यमंत्री सचिवालय में अपनी पोस्टिंग करा ली होती, तो सीबीआइ को भी छापा मारने से पहले काफी हिम्मत जुटानी पड़ती. भ्रष्टाचार पर बिहार सरकार के राजनीतिक रवैये का लाभ क्या शिक्षा अधिकारी को नहीं मिलता ?

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