गर्मियों में AC क्यों फटते हैं? जानिए आग लगने की वजह और बचाव के तरीके

AC में आग लगने का खतरा क्यों बढ़ जाता है / एआई-जेनरेटेड रिप्रेजेंटेशनल इलस्ट्रेशन
देशभर में बढ़ती गर्मी के बीच एसी में आग लगने की घटनाएं बढ़ रही हैं. जानिए शॉर्ट सर्किट, ओवरहीटिंग और गैस लीकेज जैसी वजहों के बारे में और कैसे रखें अपने एसी को सुरक्षित.
देश के कई शहरों में इस साल रिकॉर्ड तोड़ गर्मी पड़ रही है और इसके साथ ही एयर कंडीशनर से जुड़ी आग की घटनाएं भी लगातार सामने आ रही हैं. दिल्ली, गाजियाबाद और अन्य शहरों में हाल के दिनों में एसी में आग लगने या कथित ब्लास्ट की घटनाओं ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है. ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर गर्मियों में एसी क्यों फटते हैं और क्या कुछ सावधानियां अपनाकर इस खतरे से बचा जा सकता है?
बढ़ती गर्मी और लगातार इस्तेमाल बन रहा बड़ा कारण
गर्मियों के दौरान एसी कई-कई घंटे लगातार चलता है. जब बाहरी तापमान बहुत ज्यादा होता है, तब एसी के कंप्रेसर, वायरिंग और अन्य इलेक्ट्रॉनिक पार्ट्स पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है. लंबे समय तक लगातार चलने से सिस्टम ओवरहीट हो सकता है. यदि किसी हिस्से में तकनीकी खराबी या वायरिंग की समस्या हो, तो चिंगारी पैदा होने और आग लगने का खतरा बढ़ जाता है.
विशेषज्ञों के अनुसार, बढ़ती एसी बिक्री और लगातार बढ़ते तापमान ने ऐसे मामलों की संभावना को पहले के मुकाबले अधिक बढ़ा दिया है.
शॉर्ट सर्किट कैसे बनता है आग की वजह?
एसी में आग लगने के सबसे आम कारणों में शॉर्ट सर्किट शामिल है. जब बिजली का प्रवाह गलत रास्ते से गुजरने लगता है या वायरिंग में खराबी आ जाती है, तब अत्यधिक गर्मी पैदा हो सकती है. यह गर्मी तारों की इंसुलेशन को पिघला सकती है और आग का कारण बन सकती है.
आमतौर पर घरों में लगे एमसीबी (मिनिएचर सर्किट ब्रेकर) ऐसी स्थिति में बिजली सप्लाई रोक देते हैं. लेकिन यदि एमसीबी खराब हो या वायरिंग मानकों के अनुरूप न हो, तो खतरा बढ़ सकता है.
क्या इन्वर्टर एसी ज्यादा सुरक्षित होते हैं?
इन्वर्टर एसी और नॉन-इन्वर्टर एसी के काम करने के तरीके में अंतर होता है. नॉन-इन्वर्टर एसी का कंप्रेसर बार-बार फुल स्पीड पर चालू और बंद होता है, जिससे सिस्टम पर ज्यादा दबाव पड़ सकता है.
दूसरी ओर, इन्वर्टर एसी जरूरत के अनुसार कंप्रेसर की स्पीड नियंत्रित करते हैं, जिससे ऊर्जा की बचत होती है और यांत्रिक दबाव भी कम रहता है. हालांकि इसका मतलब यह नहीं कि इन्वर्टर एसी में आग नहीं लग सकती. खराब वायरिंग, गैस लीकेज, वोल्टेज फ्लक्चुएशन या रखरखाव की कमी यहां भी जोखिम पैदा कर सकती है.
ये संकेत दिखें तो तुरंत सतर्क हो जाएं
यदि एसी से असामान्य आवाजें आने लगें, कमरे की कूलिंग अचानक कमजोर हो जाए, बार-बार ऑन-ऑफ होने लगे या जलने जैसी गंध महसूस हो, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए.
कई बार कंप्रेसर यूनिट के पास कॉपर पाइप पर हरा जंग दिखाई देना भी गैस लीकेज का संकेत हो सकता है. ऐसी स्थिति में तुरंत अधिकृत सर्विस इंजीनियर से जांच करवानी चाहिए.
एसी में आग लगने से बचने के लिए अपनाएं ये उपाय
गर्मी के मौसम में एसी को लगातार कई घंटों तक बिना ब्रेक चलाने से बचें. तापमान को 22 से 25 डिग्री सेल्सियस के बीच रखना बेहतर माना जाता है. बहुत कम तापमान पर एसी चलाने से मशीन पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है.
सुनिश्चित करें कि वायरिंग मजबूत और सही तरीके से जुड़ी हो. यदि आपके इलाके में बिजली का वोल्टेज बार-बार ऊपर-नीचे होता है, तो जरूरत पड़ने पर स्टेबलाइजर का इस्तेमाल किया जा सकता है.
एसी के फिल्टर और आउटडोर यूनिट की नियमित सफाई भी जरूरी है. आउटडोर यूनिट के आसपास सूखे पत्ते, कचरा या अन्य ज्वलनशील सामग्री जमा नहीं होने दें. साथ ही किसी भी मरम्मत या इंस्टॉलेशन के लिए केवल अधिकृत तकनीशियन की मदद लें.
बढ़ती जागरूकता ही सबसे बड़ा बचाव
एसी आज लगभग हर घर की जरूरत बन चुका है, लेकिन इसकी सुरक्षा को लेकर लापरवाही भारी पड़ सकती है. नियमित सर्विसिंग, सही वायरिंग और समय रहते तकनीकी समस्याओं की पहचान करके एसी से जुड़ी अधिकांश दुर्घटनाओं को रोका जा सकता है. गर्मियों में थोड़ी सावधानी आपके परिवार और घर दोनों को सुरक्षित रख सकती है.
यह भी पढ़ें: AC ऑन हुए घंटों हो गए लेकिन रूम अभी तक ठंडा नहीं हुआ? जानें आखिर क्या है वजहें
यह भी पढ़ें: AC का ये मोड बारिश में करेगा कमाल, उमस भी करेगा दूर और बिजली बिल भी आएगा कम
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
लेखक के बारे में
By राजीव कुमार
राजीव, हिंदी डिजिटल मीडिया के अनुभवी पत्रकार हैं और प्रभातखबर डॉट कॉम में कार्यरत हैं. अपने 15 वर्षों से अधिक के पत्रकारीय अनुभव के दौरान उन्होंने टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल सेक्टर की हजारों खबरों, एक्सप्लेनर, एनालिसिस और फीचर स्टोरीज पर काम किया है. आसान भाषा, गहरी रिसर्च और यूजर-फर्स्ट अप्रोच उनकी कंटेंट राइटिंग की सबसे बड़ी पहचान है.
राजीव की एक्सपर्टीज स्मार्टफोन, गैजेट्स, एआई, मशीन लर्निंग, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT), साइबर सिक्योरिटी, टेलीकॉम, कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स, ICE और हाइब्रिड कारों, ऑटोनोमस ड्राइविंग के साथ-साथ डिजिटल ट्रेंड्स जैसे टॉपिक्स में रही है. वे लगातार बदलती टेक और ऑटो इंडस्ट्री पर नजर रखते हैं और रिपोर्ट्स, ऑफिशियल डेटा, कंपनी अपडेट्स और एक्सपर्ट इनसाइट्स के आधार पर सटीक और भरोसेमंद जानकारी यूजर्स तक पहुंचाते हैं.
डिजिटल मीडिया में राजीव की खास पहचान SEO-ऑप्टिमाइज्ड और डेटा-ड्रिवेन कंटेंट के लिए भी रही है. Google Discover और यूजर एंगेजमेंट को ध्यान में रखते हुए वे ऐसे आर्टिकल्स तैयार करते हैं, जो न केवल जानकारी भरे होते हैं, बल्कि यूजर्स की जरूरत और सर्च ट्रेंड्स से भी मेल खाते हैं. टेक और ऑटो सेक्टर पर उनके रिव्यू, एक्सपर्ट इंटरव्यू, कॉम्पैरिजन-बेस्ड आर्टिकल्स और एक्सप्लेनर स्टोरीज को यूजर्स काफी पसंद करते हैं.
राजीव ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत वर्ष 2011 में प्रभात खबर दैनिक से की थी. शुरुआती दौर में उन्होंने देश-विदेश, कारोबार, संपादकीय, साहित्य, मनोरंजन, पॉजिटिव जर्नलिज्म और फीचर राइटिंग जैसे अलग-अलग बीट्स पर काम किया. इसके बाद डिजिटल प्लैटफॉर्म पर उन्होंने रिपोर्टिंग, वैल्यू-ऐडेड स्टोरीज और ट्रेंड आधारित कंटेंट के जरिए अपनी अलग पहचान बनाई.
जमशेदपुर में जन्मे राजीव की प्रारंभिक शिक्षा सीबीएसई स्कूल से हुई है. इसके बाद उन्होंने भारतीय विद्या भवन, पुणे से जर्नलिज्म ऐंड मास कम्यूनिकेशन में पोस्ट ग्रैजुएट डिप्लोमा किया. पत्रकारिता के मूल सिद्धांत 5Ws+1H पर उनकी मजबूत पकड़ उन्हें खबरों की गहराई समझने और उनको आसान, स्पष्ट और प्रभावी भाषा में यूजर्स तक पहुंचाने में मदद करती है.
जुड़िए [email protected] पर
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए










