बिखरे जूते, चप्पलें बयान कर रहे थे हादसे की दास्तां

पटना : पटना के गांधी मैदान के बाहर बीती शाम मची भगदड़ ने 32 जानें ले ली. विशाल और वीरान गांधी मैदान में दूर-दूर तक केवल बिखरी पड़ी थीं चप्पलें, जूते, खिलौने. ये सभी हादसे की कहानी बयान कर रहे थे.ये उन सब लोगों का सामान था जो गांधी मैदान के दक्षिणी पूर्वी छोर पर […]
पटना : पटना के गांधी मैदान के बाहर बीती शाम मची भगदड़ ने 32 जानें ले ली. विशाल और वीरान गांधी मैदान में दूर-दूर तक केवल बिखरी पड़ी थीं चप्पलें, जूते, खिलौने. ये सभी हादसे की कहानी बयान कर रहे थे.ये उन सब लोगों का सामान था जो गांधी मैदान के दक्षिणी पूर्वी छोर पर अपनी जान बचाने के लिए भागे चले गए थे और इनमें से कुछ सैंकड़ों की भीड़ के पैरों के नीचे रौंदे गए.
शहर के लोगों ने जिला प्रशासन पर आरोप लगाया कि दशहरा उत्सव संपन्न होने के बावजूद गांधी मैदान के निकासी द्वारों को लोगों के लिए नहीं खोला गया.गांधी मैदान से एग्जीबिशन रोड़ तक का करीब आधा किलोमीटर का रास्ता और कारगिल चौक तक के इतने ही रास्ते में जूते, चप्पल और भी ना जाने कितना सामान बिखरा पड़ा था. ये उन लोगों का सामान था जो बिजली का तार गिरने की अफवाह के बाद अपनी जान बचाने के लिए बाहर की ओर भागे थे.
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