लाखों की सरकारी दवा फेंके जाने पर हरकत में प्रशासन, जांच शुरू

Published by : Vivek Pandey Updated At : 28 May 2026 9:45 AM

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Hajipur News: चंवर में लाखों रुपये की दवा फेंके जाने की जांच करने पहुंचे महुआ एसडीओ व डीपीएम

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Hajipur News: (गोपाल कुमार) वैशाली जिले के महुआ थाना क्षेत्र बिलंदपुर गांव स्थित चंवर में फेंके गए लाखों रुपए के सरकारी दवा फेंके जाने की जांच अधिकारियों ने की. बुधवार की दोपहर महुआ एसडीओ विवेक चंद्र पटेल के साथ सदर अस्पताल के डीपीएम मनोज कुमार दल बल के साथ मौके पर पहुंच कर दवाओं की जांच की. हालांकि इस मामले में अधिकारियों ने किसी प्रकार का स्पष्ट खुलासा करने से बचते रहे. अधिकारियों के मौके पर पहुंचते ही स्थानीय ग्रामीणों की भीड़ जुट गई. ग्रामीण मौके पर डीएम तथा सिविल सर्जन को बुलाने की मांग पर अड़े थे. हालांकि विभागीय अधिकारियों का दावा है कि फेंकी गयी दवाएं सदर अस्पताल, सीएचसी या पीएचसी में सप्लाई की जाने वाली नहीं है. जांच अधिकारियों ने फेंके गए दवाओं का सैंपल लेकर बैच मिलान के लिए बीआइएमसीएल को भेज दिया है.

पोखरनुमा गड्ढे में फेंकी गई थी भारी मात्रा में सरकारी दवाएं

मालूम हो कि महुआ थाना क्षेत्र के बिलंदपुर चंवर में एक पोखरनुमा गड्ढे के पास भारी मात्रा में सरकारी दवा फेंके जाने से क्षेत्र में हड़कंप मच गया था. जानकारी मिलते ही भारी संख्या में मौके पर जुटे ग्रामीणों ने इसकी सूचना डीएम एवं सिविल सर्जन को दी थी. डीएम के निर्देश पर सदर अस्पताल के फार्मासिस्ट दीपक कुमार के नेतृत्व में स्वास्थ्य विभाग की टीम मौके पर पहुंच कर दवाओं की जांच की थी. इस दौरान कर्मियों ने दवा उठाने का प्रयास किया था, लेकिन ग्रामीणों ने मौके पर वरीय अधिकारी को बुलाने की मांग करते हुए दवा उठाने से रोक दिया था. जिसके बाद डीएम वर्षा सिंह के निर्देश पर बुधवार को महुआ एसडीओ तथा सदर अस्पताल के डीपीएम मौके पर पहुंच कर दवाओं का सैंपल लिया.

ग्रामीणों ने स्वास्थ्य विभाग के खिलाफ की नारेबाजी

बुधवार को फेंके गए दवा की जांच करने अधिकारियों के चले जाने एवं कार्रवाई के लिए कोई ठोस आश्वासन नहीं दिए जाने के बाद ग्रामीण और आक्रोशित हो गए. ग्रामीणों ने स्वास्थ्य विभाग तथा जिला प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की. ग्रामीण स्वास्थ्य विभाग एवं जिला प्रशासन पर मामले को दबाने के प्रयास करने का आरोप लगा रहे थे. ग्रामीणों ने बताया कि एक तरफ जब लोग सरकारी अस्पताल में इलाज कराने जाते है तो डॉक्टर अपनी कमीशन के चक्कर में बाहर की दवा लिख देते है. जिससे मरीज के परिजनों को महंगे दामों पर दवा खरीदनी पड़ती है. वहीं दूसरी ओर सरकार द्वारा सप्लाई दवाओं को खुलेआम चंवर में फेंका जा रहा है.

फेंकी गयी दवाएं मेडिकल कॉलेज में होती है सप्लाई- डीपीएम

दवाओं की जांच के लिए पहुंची टीम में शामिल सदर अस्पताल के डीपीएम मनोज कुमार ने बताया कि चंवर में फेंकी गयी दवाओं को देखने से पता चला है कि ये दवाएं किसी मेडिकल कॉलेज से लाकर फेंकी गयी है. बताया गया कि मौके से बरामद दवाओं में अधिकांश दवा किसी सदर अस्पताल, सीएचसी या पीएचसी में सप्लाई नहीं होती है. जांच के बाद संबंधित कॉलेज के कर्मियों के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी.

खुले में दवा फेंकना खतरनाक

मेडिकल विभाग के अधिकारी के अनुसार अस्पताल से निकलने वाली किसी भी प्रकार के कचरे या यूज किए गए मेडिकल एक्यूपमेंट को खुले में फेंकना खतरनाक है. यूज सीरिंज, एक्सपायर दवाएं या मेडिकेटेड कचरे का भी सही तरीके से निस्तारण किया जाना चाहिए. किसी भी मेडिकल कॉलेज या अस्पताल के द्वारा दवा को खुले में फेंकना कानूनी रूप से अपराध की श्रेणी में आता है.

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लेखक के बारे में

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विवेक रंजन पांडेय का जन्म और पालन-पोषण बिहार के गौरवशाली इतिहास और ज्ञान की भूमि नालंदा में हुआ. इसी पावन धरती के संस्कारों ने उन्हें समाज और व्यवस्था को गहराई से देखने का नजरिया दिया. पत्रकारिता के प्रति अपने जुनून को करियर बदलने के लिए उन्होंने पटना के आर्यभट्ट विश्वविद्यालय से पत्रकारिता की डिग्री हासिल की. पिछले 7 वर्षों से टीवी चैनल के जरिए रिपोर्टिंग फील्ड में लगातार सक्रिय हैं. Network 10 National News Channel से करियर की शुरुआत की. उसके बाद कई संस्थानों में काम किया. शिक्षा और राजनीति के साथ कृषि, महिला सुरक्षा से जुड़े मुद्दे पर विशेष रूचि रखते हैं. पत्रकारिता की बारीकियों को सीखा और ग्राउंड जीरो पर रहकर जनता से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया. वर्तमान में Prabhat Khabar के माध्यम से बिहार की खबरों को एक नया आयाम दे रहे हैं. वे बिहार की राजनीति के साथ-साथ देश की सियासी हलचलों पर भी पैनी नजर रखते हैं. अपने शानदार करियर में उन्होंने ​बिहार के वर्तमान मुख्यमंत्री जब वह उप मुख्यमंत्री थे तब इंटरव्यू किया. इसके साथ कैबिनेट के अधिकांश प्रमुख मंत्रियों का विशेष इंटरव्यू किया है. ​बिहार के शीर्ष नेताओं और नौकरशाहों को बहुत करीब से देखा, समझा और उनकी नीतियों का निष्पक्ष विश्लेषण किया. ​जटिल राजनीतिक घटनाक्रमों को बेहद सरल भाषा में जनता के सामने पेश किया है.

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