निराशा. वैष्णो देवी के दर्शन अधूरा छोड़ लौटे लोगों ने सुनायी पीड़ा भूख से जान गंवा रहे लोग

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 10 Sep 2014 8:42 AM

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पटना: जम्मू कश्मीर में आयी बाढ़ के कारण मां वैष्णो देवी के दर्शन के लिए बिहार से गये श्रद्धालुओं की इच्छा अधूरी ही रह गयी. उन्हें बीच रास्ते से ही निराश लौटना पड़ा. सूबे के करीब 230 लोग सोमवार की देर रात अर्चना एक्सप्रेस से पटना जंकशन पहुंचे. जंकशन पर अपने परिजनों से मिलते ही […]

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पटना: जम्मू कश्मीर में आयी बाढ़ के कारण मां वैष्णो देवी के दर्शन के लिए बिहार से गये श्रद्धालुओं की इच्छा अधूरी ही रह गयी. उन्हें बीच रास्ते से ही निराश लौटना पड़ा. सूबे के करीब 230 लोग सोमवार की देर रात अर्चना एक्सप्रेस से पटना जंकशन पहुंचे.

जंकशन पर अपने परिजनों से मिलते ही वे रो पड़े. सूबे के यात्रियों ने प्रभात खबर से बातचीत में बताया कि वहां बिहार के हजारों लोग पहाड़ पर फंसे हुए हैं. संख्या इतनी अधिक है कि सरकार की ओर से राहत कार्य भी कम पड़ जा रहे हैं. भूख व प्यास से कई लोग जान गंवा चुके हैं. होटल व ट्रांसपोर्टर नाजायज फायदा उठा रहे हैं.

सीएम राहत कोष से 10 करोड़ की मदद
मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने जम्मू-कश्मीर को बाढ़ आपदा प्रबंधन में सहयोग के लिए 10 करोड़ रुपये की राशि मुख्यमंत्री राहत कोष से देने की घोषणा की. उधर, जम्मू-कश्मीर के बाढ़पीड़ितों को राहत देने के लिए 20 हजार राहत सामग्री पैकेट पटना से भेजे जायेंगे. इन राहत पैकेटों को श्रीकृष्ण मेमोरियल हॉल में तैयार कराया जा रहा है. डीएम डॉ मनीष कुमार वर्मा ने बताया कि पैकेजिंग के संपूर्ण कार्य का व्यक्तिगत पर्यवेक्षण किया जा रहा है. पैकेट में दो किलो चूड़ा, चीनी/गुड़ 500 ग्राम, भुंजा हुआ चना 500 ग्राम, चना 500 ग्राम, बिस्किट दो पैकेट, दूध पाउडर एक पैकेट, मोमबत्ती एक पैकेट, माचिस चार अदद, दवा (पैरासिटामोल, ओआरएस एवं हैलोजन के टेबलेट्स) और एक टॉर्च बैटरी सहित.

तीन गुना अधिक किराये देकर कटरा से 18 किमी दूर होटल में जाकर किसी तरह जान बचायी. सेना व प्रशासन की मदद से हम लोगों का निकलना संभव हुआ.

किरण बाला (पटना)

पापा,बाबा व दादी की चिंता लगी रहती थी. कभी तो लगता था कि बाढ़ में हमलोग नहीं बह जाये,लेकिन माता ने हम सब को बचा लिया. पटना लौट कर राहत मिली.

वंश खत्री (पटना)

अपने बेटे संतोष प्रसाद को देखते ही सत्यनारायण रोने लगे. वे पांच सितंबर को जम्मू पहुंचे. देखा कि मंजर बदला हुआ था. जैसे-तैसे कटरा पहुंचे.

सत्य नारायण प्रसाद (नालंदा)

कटरा में फसने के बाद पिता व पत्नी को लेकर एक होटल पहुंचे. कटरा से लोग न तो ऊपर जा रहे थे और न ही चट्टानों के गिरने के बाद नीचे आ रहे थे.

सुरेंद्र प्रसाद (कटिहार)

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