ePaper

पटना : हिंदी ग्रंथ अकादमी की छपी पुस्तक में आदिवासियों पर भ्रामक तथ्य

Updated at : 18 Jan 2020 9:07 AM (IST)
विज्ञापन
पटना : हिंदी ग्रंथ अकादमी की छपी पुस्तक में आदिवासियों पर भ्रामक तथ्य

यूजीसी के अनुरूप होती हैं अकादमी की किताबें पटना : बिहार हिंदी ग्रंथ अकादमी की तरफ से 2015 में प्रकाशित पुस्तक ‘एेतिहासिक और सांस्कृतिक भारत का सर्वेक्षण’ (अतीत से अद्यतन तक) में आदिवासियों के संदर्भ में आपत्तिजनक तथ्य सामने आये हैं. बीएचयू में इतिहास के प्राध्यापक रहे जयशंकर मिश्र की लिखी इस किताब में आदिवासियों […]

विज्ञापन
यूजीसी के अनुरूप होती हैं अकादमी की किताबें
पटना : बिहार हिंदी ग्रंथ अकादमी की तरफ से 2015 में प्रकाशित पुस्तक ‘एेतिहासिक और सांस्कृतिक भारत का सर्वेक्षण’ (अतीत से अद्यतन तक) में आदिवासियों के संदर्भ में आपत्तिजनक तथ्य सामने आये हैं. बीएचयू में इतिहास के प्राध्यापक रहे जयशंकर मिश्र की लिखी इस किताब में आदिवासियों के बारे में भ्रामक तथ्य दिये गये हैं. इसमें बताया गया है कि ‘इनका जीवन मारकाट से भरा देखा जाता है. ये लोग जानवरों के मांस और कंदमूल का भोजन करते हैं. इनकी बोली एवं भाषा में कोई साहित्य नहीं मिलता. वे काले, मध्यम कद और भद्दे चेहरे वाले होते हैं.’ लेखक ने यह विवरण राजस्थान, मध्यप्रदेश, बिहार, उड़ीसा और असम के आदिवासियों के संदर्भ में दिया है.
किताब पढ़ने वालों के मुताबिक हैरत की बात यह है कि किताब में सर्वाधिक आदिवासी बहुल राज्यों मसलन छत्तीसगढ़, झारखंड, असम के अलावा दूसरे पूर्वोत्तर राज्यों का जिक्र तक नहीं है. इस पर समाजशास्त्रियों ने घाेर आपत्ति व्यक्त की है. अभी इसका प्रथम संस्करण ही उपलब्ध है. इस किताब के तथ्यों को भारत सरकार के वैज्ञानिक तथा तकनीकी शब्दावली आयोग और मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने मंजूरी दे रखी है. जानकारी के मुताबिक बिहार हिंदी ग्रंथ अकादमी की तरफ से प्रकाशित किताबें यूजीसी के पाठ्यक्रम के अनुरूप होती हैं.
क्या कहते हैं अधिकारी
किताब प्रकाशन की मंजूरी एक्सपर्ट कमेटी करती है. तत्कालीन एक्सपर्ट कमेटी ने किताब को पास किया होगा. मैं इस संदर्भ में और कुछ नहीं बता पाऊंगा.
दिनेश चंद्र झा, निदेशक, बिहार हिंदी ग्रंथ अकादमी पटना
एक्सपर्ट व्यू
लग रहा है कि आदिवासी समाज के बारे में लेखक घोर अज्ञानी हैं. उन्हें धरातल पर जाकर शोध करके लिखना चाहिए था. आदिवासियों के बारे में उनके विचार अपनी बनायी मान्यता पर हैं. यह निराशाजनक है. आदिवासियों के बारे में दी गयी यह जानकारी आपत्तिजनक है.
अनुज लुगन, समाज शास्त्री एवं शोधार्थी
आदिवासी बेहद सभ्य और सुसंस्कृत होते हैं. उनके घरों की स्वच्छता देखते बनती है. उनका साहित्य अनमोल है. वे लड़ाकू नहीं, शांतिपूर्ण और आत्म सम्मानी लोग हैं. लालच इनमें नहीं होता. किताब में आदिवासियों के बारे में लिखी बातें सत्य से पूरी तरह परे है.
प्रोफेसर आरएन शर्मा, समाजशास्त्री पटना विश्वविद्यालय
विज्ञापन
Prabhat Khabar Digital Desk

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन