अनुसंधान पर और करना होगा काम, जटिल बीमारियों पर काबू संभव

Updated at : 04 Dec 2019 5:44 AM (IST)
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अनुसंधान पर और करना होगा काम, जटिल बीमारियों पर काबू संभव

पटना सिटी : अनुसंधान से संभव है जटिल बीमारियों पर काबू पाना संभव है. संस्थान शोध के क्षेत्र में बेहतर कार्य कर रही है. आवश्यकता इस बात की है कि इससे और बेहतर कार्य करें. यह बात मंगलवार को अगमकुआं स्थित राजेंद्र स्मारक चिकित्सा विज्ञान अनुसंधान संस्थान के 56वें स्थापना दिवस व देशरत्न डॉ राजेंद्र […]

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पटना सिटी : अनुसंधान से संभव है जटिल बीमारियों पर काबू पाना संभव है. संस्थान शोध के क्षेत्र में बेहतर कार्य कर रही है. आवश्यकता इस बात की है कि इससे और बेहतर कार्य करें. यह बात मंगलवार को अगमकुआं स्थित राजेंद्र स्मारक चिकित्सा विज्ञान अनुसंधान संस्थान के 56वें स्थापना दिवस व देशरत्न डॉ राजेंद्र प्रसाद की जयंती पर आयोजित कार्यक्रम में वक्ताओं ने कही. वक्ताओं ने अपनी बातों को रखते हुए चिकित्सा व अनुसंधान के व्यापक क्षेत्र पर चर्चा की. इसमें कहा गया कि यहां विश्वस्तरीय लैब की व्यवस्था है. कार्यक्रम की अध्यक्षता संस्थान के निदेशक डॉ प्रदीप दास ने की. संचालन वैज्ञानिक डॉ सीएम लाल ने किया.

मुख्य अतिथि के तौर पर डॉ वीएम कटोच आइसीएमआर नयी दिल्ली के पूर्व सचिव ने संस्थान की प्रगति व कार्यकलाप पर प्रकाश डाला. विशिष्ट अतिथि के तौर पर डॉ गोपाल प्रसाद सिन्हा व डॉ जेके सिंह ने अनुसंधान व संस्थान के कार्यकलाप को खास तौर पर कालाजार कें मामले शोध को रेखांकित किया. सम्मानित अतिथि एम्स के पूर्व डीन डॉ एनके मेहरा को डॉ राजेंद्र प्रसाद ओरेसन अवार्ड से नवाजा गया. आयोजन में डॉ मेहरा ने व्याख्यान भी दिया. धन्यवाद ज्ञापन डॉ विद्या नंद रविदास ने किया.
आयोजन में डॉ कृष्ण पांडे,डॉ संजीव विमल, डॉ श्रीकांत केसरी, डॉ बहाव अली, डॉ दिवाकर सिंह दिनेश, डॉ श्याम नारायण, डॉ एनए सिद्दीकी, डॉ शुभांकर सिंह, संजय कुमार चौबे, उदय कुमार, नरेश कुमार सिन्हा, राकेश बिहारी वर्मा, नरेश समेत अन्य कर्मचारी व पदाधिकारी सक्रिय थे. दवाओं के ट्रायल की सुविधा मिली है संस्थान कोअगमकुआं स्थित राजेंद्र स्मारक चिकित्सा विज्ञान अनुसंधान संस्थान में दवा अर्थात ड्रग्स के बाजार में आने से पहले चार चरणों में होने वाली जांच में फेज वन के जांच व ट्रायल की सुविधा संस्थान को मिली है.
स्थापना दिवस पर आयोजित समारोह में संस्थान के निदेशक डॉ प्रदीप दास ने इसकी जानकारी दी और बताया कि दवा बाजार में आने से पहले चार फेज में जांच की जाती है. इसके बाद उसे बाजार में उतारा जाता है.ऐसी ही जांच व ट्रॉयल की सुविधा फेज वन के स्तर पर संस्थान को मिली है. निदेशक ने बताया कि मरीजों की बीमारियों पर अनुसंधान से पहले नेशनल एक्रीडेशन बोर्ड से अनुमति लेनी होती है.
तभी अनुसंधान हो पायेगा. बिहार में नेशनल एक्रीडेशन बोर्ड की अनुमति का दायित्व आरएमआरआइ को पहले ही मिला है. ऐसे में अनुसंधान आधारित प्रोजेक्ट रिपोर्ट बना कर संस्थान की एथिकल कमेटी को सौंपी जाती है. इसके बाद वो रिपोर्ट का अध्ययन कर अनुमति देगी, तभी अनुसंधान कर पायेंगे.
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