पटना एयरपोर्ट : नहीं शुरू हुआ एप्रोच लाइट एक्सटेंशन, विमानों की उड़ान पर छा सकती है ‘ धुंध ’

Updated at : 18 Nov 2019 9:12 AM (IST)
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पटना एयरपोर्ट : नहीं शुरू हुआ एप्रोच लाइट एक्सटेंशन, विमानों की उड़ान पर छा सकती है ‘ धुंध ’

अनुपम कुमार पटना : पटना एयरपोर्ट पर दिसंबर-जनवरी में विमानों की लैंडिंग में धुंध से होने वाली परेशानी को दूर करने के लिए पिछले वर्ष मुख्य सचिव के साथ एयरपोर्ट ऑथोरिटी के उच्च अधिकारियों की बैठक हुई थी. उसमें दिसंबर, 2019 से पहले रनवे के एप्रोच लाइट को 720 मीटर तक बढ़ाने का निर्णय हुआ […]

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अनुपम कुमार

पटना : पटना एयरपोर्ट पर दिसंबर-जनवरी में विमानों की लैंडिंग में धुंध से होने वाली परेशानी को दूर करने के लिए पिछले वर्ष मुख्य सचिव के साथ एयरपोर्ट ऑथोरिटी के उच्च अधिकारियों की बैठक हुई थी. उसमें दिसंबर, 2019 से पहले रनवे के एप्रोच लाइट को 720 मीटर तक बढ़ाने का निर्णय हुआ था.

लेकिन धुंध का मौसम शुरू होने में अब महज 10-15 दिन रह गये हैं और रनवे एक्सटेंशन का काम आवंटित भी नहीं हुआ. ऐसे में अब आगे की प्रक्रिया कितनी भी तेजी से की जाये, इस सर्दी में यहां लैंड करने वाले विमानों को एप्रोच लाइट एक्सटेंशन का लाभ नहीं मिल पायेगा. इससे घने धुंध में दृश्यता की कमी से विमानों के रद्द और डायवर्ट होने का सिलसिला जारी रहेगा व उससे यात्रियों को होनेवाली परेशानी बनी रहेगी.

700 मीटर दृश्यता में भी उतर पाते विमान

पटना एयरपोर्ट का रनवे जरूरत से बेहद छोटा है. यहां से परिचालित होने वाले बोईंग 737 और एयरबस 320 जैसे विमानों के लैंडिंग और टेकऑफ के लिए 3300 मीटर लंबा रनवे चाहिए जबकि पटना के रनवे की लंबाई केवल 2072 मीटर है. उसमें भी रेलवे लाइन और सचिवालय टावर जैसे एप्रोच फनल में आनेवाली बाधाओं के कारण लैंडिंग और टेकऑफ में अलग अलग सिरों से महज 1600-1700 मीटर रनवे का ही इस्तेमाल हो पाता है जो कि जरूरत से लगभग आधा है.

ऐसे में घने धुंध के समय जब दृश्यता घट कर 1200 मीटर से नीचे आ जाती है, विमानों का लैंडिंग और टेकऑफ संभव नहीं हो पाता. रनवे का विस्तार जगह की कमी के कारण संभव नहीं है. ऐसे में एप्रोच लाइट का विस्तार कर कमी को दूर करने का निर्णय लिया गया था. इसके अंतर्गत दो चरणों में

एप्रोच लाइट को 210 मीटर से बढ़ा 420 मीटर और 720 मीटर करना था. 420 मीटर एक्सटेंशन का काम पिछले वर्ष ही पूरा कर लिया गया और पीर अली पथ के साथ पटना जू के कुछ हिस्सों में भी एप्रोच लाइट लगा दिये गये.

इससे लैंडिंग की स्थिति में सुधार हुआ और 1000 मीटर तक की दृश्यता में भी विमान उतरने लगे. इस वर्ष भी पटना जू के भीतर ही 300 मीटर एप्रोच लाइट लगना था पर टेंडर निकालने और काम अवार्ड होने में देरी के कारण अब तक यह शुरू नहीं हो पाया है. यदि 720 मीटर तक रनवे का एक्सटेंशन कर लिया जाता तो 700 मीटर की दृश्यता में भी विमान उतर सकते थे और कुहासा के घना होने पर भी विमानों के रद्द और डायवर्ट होने का सिलसिला बहुत हद तक रुक सकता था.

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