बिहार के सभी निकायों में नालों पर से अतिक्रमण हटाने का चलेगा अभियान

Updated at : 16 Nov 2019 9:30 AM (IST)
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बिहार के सभी निकायों में नालों पर से अतिक्रमण हटाने का चलेगा अभियान

निकायों को अतिक्रमित नालों की सूची बनाने का निर्देश पटना : नगर विकास व आवास विभाग राज्य के सभी 142 निकाय क्षेत्र में नालों से अतिक्रमण हटाने का अभियान चलायेगा. सभी निकायों को अपने क्षेत्र की अतिक्रमित नालों की सूची तैयार करने को कहा गया है. अंचल अधिकारियों से सहयोग लेकर नाले की जमीन नापी […]

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निकायों को अतिक्रमित नालों की सूची बनाने का निर्देश
पटना : नगर विकास व आवास विभाग राज्य के सभी 142 निकाय क्षेत्र में नालों से अतिक्रमण हटाने का अभियान चलायेगा. सभी निकायों को अपने क्षेत्र की अतिक्रमित नालों की सूची तैयार करने को कहा गया है. अंचल अधिकारियों से सहयोग लेकर नाले की जमीन नापी कर अतिक्रमण करने वाले सभी मकानों को नोटिस दी जायेगी. फिर आगे की कार्रवाई की जायेगी. नगर विकास मंत्री सुरेश शर्मा ने बताया कि पटना के बाद दरभंगा, भागलपुर व मुजफ्फरपुर से लेकर अन्य कई बड़े निकायों में ऐसी समस्या है. मंत्री ने बताया कि अगर कहीं नाले के ऊपर बेघर लोग अपनी झोंपड़ी बना कर रहते हैं तो अतिक्रमण के नाम पर सिर्फ उनको हटाने की कार्रवाई ही नहीं होगी, बल्कि उनको स्लम में बसाने की प्लान भी तैयार किया जायेगा.
उन्होंने बताया कि मुजफ्फरपुर में इसकी पहल शुरू की गयी है. इसके अलावा सभी नगर निकायों में तालाबों के जीर्णोद्धार का काम भी शुरू किया रहा है. तालाब या पोखर के घाट का पक्का निर्माण करने और चारों तरफ पेड़ लगाने की कार्रवाई की जायेगी.नगर निकायों को क्षेत्र में टैंक की सफाई करने वाले वेंडरों को चिह्नित कर लाइसेंस देने का काम होगा. इधर, बोधगया में राजस्व व भूमि सुधार विभाग के मंत्री राम नारायण मंडल ने कहा कि सरकारी आहर व पोखरों को कब्जा कर निर्माण वाले जमीनों को कब्जा मुक्त कराया जायेगा.
निकायों को देना होगा वेंडरों को लाइसेंस
तीन वर्षों में सैप्टिक टैंक की करानी होगी सफाई
इस बार स्वच्छता सर्वेक्षण में एक नये घटक फीलक स्लज मैनेजमेंट को जोड़ा गया है. यह प्रोजेक्ट नमामि गंगे योजना का विस्तार है. नियम के अनुसार अगर आप का अपार्टमेंट या घर है तो उसके सैप्टिक टैंक की सफाई तीन वर्षों में एक बार कराना अनिवार्य होगा. सफाई के बाद कचरे को कोई नदी या तालाब में नहीं फेंका जा सकेगा. अगर उस समय में सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट नहीं है तो निकायों को इसकी व्यवस्था करनी होगी. ऐसे कचरे को एक मीटर गहरा गड्ढा बनाकर जमीन में दबाना होगा.
दस निकायों में शुरू नहीं हो पाया कचरा प्रबंधन
48 निकायों में शुरू होने वाले कचरा प्रबंधन अब तक मात्र 38 निकायों में काम शुरू हो पाया है. दस निकायों में गीला व सूखा कचरा अलग-अलग संग्रह करने की प्रक्रिया भी अब तक शुरू नहीं हो पायी है. कचरा को खाद बनाने का काम शुरू नहीं हो पाया है. इसके अलावा दिसंबर तक सभी निकायों में कचरा प्रबंधन के सभी छह प्रावधानों को लागू करने में अब और भी अधिक समय लगने की संभावना है. गौरतलब है कि स्वच्छता सर्वेक्षण 2020 के तहत राज्य के सभी 142 शहरी निकायों को सर्वेक्षण में भाग लेना है.
वर्गीकरण व प्रोसेंसिंग की है समस्या
सर्वेक्षण में सर्विस लेवल प्रोग्रेस के तहत निर्धारित 1500 अंक में 700 अंक ठोस कचरा प्रबंधन का है. इसमें कचरा के प्रोसेसिंग व निष्पादन, स्थायी सफाई कलेक्शन एंड ट्रांसपोटेशन व चार फीसदी अंक नये प्रयोग को लेकर दिये गये हैं. इस बार भी राज्य के अधिकतर शहरों में कचरा प्रोसेसिंग व निष्पादन को लेकर मामला फंसेगा क्योंकि राज्य के 142 निकायों के 95 फीसदी वार्ड में डोर- टू- डोर कचरा कलेक्शन का काम तो शुरू हो गया है, लेकिन गीला व सूखा कचरा लेने की अलग-अलग व्यवस्था नहीं है.
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