पटना : हाइकोर्ट के जज राकेश कुमार ने कहा, भ्रष्ट न्यायिक अफसरों को मिल रहा संरक्षण

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 29 Aug 2019 8:10 AM

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पटना : पटना हाइकोर्ट के सीनियर जज जस्टिस राकेश कुमार ने बुधवार को कहा कि राज्य की निचली अदालतों के भ्रष्ट न्यायिक अधिकारियों को संरक्षण मिल रहा है. जिस अधिकारी को भ्रष्टाचार के मामले में बर्खास्त होना चाहिए, उस अधिकारी को मामूली-सी सजा देकर छोड़ दिया जा रहा है. पूर्व आइएएस अधिकारी केपी रामय्या को […]

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पटना : पटना हाइकोर्ट के सीनियर जज जस्टिस राकेश कुमार ने बुधवार को कहा कि राज्य की निचली अदालतों के भ्रष्ट न्यायिक अधिकारियों को संरक्षण मिल रहा है.
जिस अधिकारी को भ्रष्टाचार के मामले में बर्खास्त होना चाहिए, उस अधिकारी को मामूली-सी सजा देकर छोड़ दिया जा रहा है. पूर्व आइएएस अधिकारी केपी रामय्या को जमानत देने के मामले में नाराज जस्टिस राकेश कुमार ने बिना किसी का नाम लिये कहा कि मेरे सहयोगी जजों ने भी मेरे द्वारा भ्रष्टाचार के खिलाफ उठायी गयी आवाज को दरकिनार कर दिया है.
उन्होंने कहा कि जब से मैंने न्यायमूर्ति पद की शपथ ली है, तब से यह देख रहा हूं कि सीनियर जज मुख्य न्यायाधीश को मस्का लगाने में मशगूल रहते हैं, ताकि उनसे कोई फेवर ले सकें और भ्रष्टाचारियों को भी फेवर दे सकें.
उन्होंने कहा कि हाइकोर्ट के न्यायाधीशों के बंगला आवंटन मामले में भी बहुत-सी बातों की अनदेखी की जाती है. जजों व मंत्रियों के आवासों के साज-सज्जा में बेवजह पैसे को पानी की तरह बहाया जाता है.
पैसा बहाने वाले को शायद यह मालूम नहीं होता कि यह देश के टैक्स देने वालों का पैसा है. अगर इस पैसे को देश या गरीबों के हित में लगाया जाये तो कल्याण का काम होगा. जस्टिस कुमार ने सिविल कोर्ट में एक स्टिंग मामले की जांच सीबीआइ को सौंप दी.
जस्टिस राकेश कुमार ने कहा कि पटना हाइकोर्ट द्वारा कई न्यायिक अफसरों के खिलाफ गंभीर शिकायतों की अनदेखी की गयी. एक अफसर के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्यवाही में आरोप साबित हुआ, जिसकी सजा बर्खास्तगी ही होनी थी.
उस अफसर के खिलाफ सजा के बिंदु पर हाइकोर्ट के सभी न्यायमूर्ति की फुल कोर्ट मीटिंग हुई, लेकिन उसे बर्खास्तगी की जगह मामूली सजा दी गयी. मेरे विरोध को भी सभी जजों ने एक सिरे से खारिज कर दिया. जिस केपी रमय्या अग्रिम जमानत याचिका को खारिज करते वक़्त खुद हाइकोर्ट ने भ्रष्टाचार के आरोपों को गंभीर माना था, उसे निचली अदालत ने जमानत दे दी.
पटना हाइकोर्ट के इतिहास में यह पहला न्यायिक आदेश है, जिससे हाइकोर्ट की अंदरूनी समस्याएं उजागर हुई हैं. जस्टिस राकेश कुमार ने हाइकोर्ट प्रशासन को निर्देश दिया कि आज के इस आदेश की कॉपी देश के मुख्य न्यायाधीश, सुप्रीम कोर्ट की कॉलेजियम, पीएमओ, केंद्रीय कानून मंत्रालय के साथ सीबीआइ निदेशक को भी भेज दी जाये.
महाधिवक्ता बोले, यदि जज ने सच में ऐसा कहा तो यह दुर्भाग्यपूर्ण
महाधिवक्ता ललित किशोर ने कहा कि यदि जस्टिस राकेश कुमार ने सच में ऐसा कहा है तो यह दुर्भाग्यपूर्ण है. उन्होंने कहा कि जिस वक्त कोर्ट में वह थे, मैं वहां नहीं था. मुझे कुछ वकीलों ने इसकी जानकारी दी है. लेकिन मैंने लिखित आदेश नहीं पढ़ा है.
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