मुजफ्फरपुर में बच्चों की मौत की वजह गरीबी व कुपोषण

Updated at : 01 Aug 2019 7:22 AM (IST)
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मुजफ्फरपुर में बच्चों की मौत की वजह गरीबी व कुपोषण

पटना : मुजफ्फरपुर के एइएस प्रभावित परिवारों के बच्चों की मौत का मुख्य कारण गरीबी और कुपोषण है. जीविका समूह ने बुधवार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के समक्ष पेश अपनी रिपोर्ट में ये बातें कही हैं. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सभी प्रभावित परिवारों को 31 अगस्त तक सभी सरकारी योजनाओं से जोड़ने का निर्देश दिया […]

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पटना : मुजफ्फरपुर के एइएस प्रभावित परिवारों के बच्चों की मौत का मुख्य कारण गरीबी और कुपोषण है. जीविका समूह ने बुधवार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के समक्ष पेश अपनी रिपोर्ट में ये बातें कही हैं. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सभी प्रभावित परिवारों को 31 अगस्त तक सभी सरकारी योजनाओं से जोड़ने का निर्देश दिया है. उन्हें राज्य सरकार की ओर से चलायी जा रही सभी योजनाओं का लाभ मिल सकेगा.

बुधवार को सीएम के समक्ष मुजफ्फरपुर के एइएस (एक्यूट इंसेफ्लाइटिस सिंड्रोम) से प्रभावित पांच प्रखंडों के 538 परिवारों के बीच करायी गयी आर्थिक-सामाजिक सर्वेक्षण की रिपोर्ट पेश की गयी.
इस क्रम में एक प्रजेंटशन भी दिया गया, जिसमें पीड़ितों की पूरी परिस्थिति को उजागर किया गया. रिपोर्ट के मर्म को समझने के बाद पर सीएम ने पीड़ितों की स्थिति को सुधारने के लिए 31 अगस्त तक सभी प्रमुख व जरूरी योजनाओं से इन्हें जोड़े जाने का निर्देश दिया.
सीएम ने कहा कि जिन परिवारों के पास अपना शौचालय नहीं है, इनके लिए शौचालय का निर्माण कराया जाये, स्वयं सहायता समूह से जोड़कर सतत जीविकोपार्जन योजना व हर घर नल का जल योजना समेत ऐसी अन्य कल्याणकारी योजनाओं से जोड़ा जाये. इस इलाके के सभी बच्चों का टीकाकरण कराया जाये.
तीन महीने के अंदर पांच वर्ष तक के सभी बच्चों का आंगनबाड़ी केंद्रों में नामांकन करा दिया जाये. साथ ही पीड़ित परिवारों को राशन कार्ड उपलब्ध करा दिये जायें. प्रेजेंटेशन के दौरान इन परिवारों के लिए पूरी कार्ययोजना के बारे में विस्तार से जानकारी दी गयी.
जीविका की सक्रियता बढ़ाएं
जीविका समूह से जुड़ने से समाज में सक्रियता बढ़ेगी और इससे परिवर्तन आयेगा. विभिन्न प्रकार की बीमारियों और उसके उपचार के बारे में लोगों को जागरूक करने में मदद मिलेगी. इसके माध्यम से वंचित परिवारों को सतत जीविकोपार्जन योजना एवं अन्य योजनाओं का लाभ दिलाने में सहूलियत होगी. जीविका की सक्रियता को तेजी से बढ़ाने के लिए काम करना होगा.
बैठक में डिप्टी सीएम सुशील कुमार मोदी, स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय, ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार, समाज कल्याण मंत्री रामसेवक सिंह, खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री मदन सहनी, मुख्य सचिव दीपक कुमार, विकास आयुक्त सुभाष शर्मा, शिक्षा अपर मुख्य सचिव आरके महाजन आदि मौजूद रहे.
538 परिवारों के बीच हुआ सर्वे, सीएम ने कहा-31 अगस्त तक सभी योजनाओं से जोड़े जायेंगे प्रभावित परिवार
सीएम ने कहा कि सर्वेक्षण के बाद जो जानकारी सामने आयी है, उसके आधार पर सभी पांच प्रखंडों के परिवारों को जिन्हें प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना के तहत लाभ नहीं मिल सकता है, उन्हें मुख्यमंत्री आ‌वास योजना के तहत लाभ दिलाया जाये. जो पुराने और जर्जर आवास हैं, उन्हें भी आवास का लाभ दिलाया जाये. उन्होंने कहा कि आंगनबाड़ी केंद्रों से बच्चे जुड़ेंगे, तो उन्हें पोषाहार मिलने के साथ ही अन्य सुविधाएं भी मिलेंगी.
उन्होंने कहा कि ग्रामीण परिवार की महिलाओं को स्वयं सहायता समूह से जोड़ा जा रहा है. इसके लिए जो लक्ष्य निर्धारित किये गये हैं, उस पर तेजी से काम करना होगा.
रिसर्च के लिए बना स्वचालित मौसम स्टेशन
विनय
मुजफ्फ्फरपुर : चमकी बुखार पर रिसर्च के लिए जिले में स्वचालित मौसम स्टेशन स्थापित किया गया है. भारतीय मौसम केंद्र के वैज्ञानिकों के दल ने मुशहरी के भारतीय लीची अनुसंधान केंद्र परिसर में माैसम की जानकारी के लिए नया केंद्र बनाया है. नये मौसम स्टेशन से मुजफ्फरपुर में अगले दस दिनों तक तापमान, आर्द्रता, हवा की दिशा व वेग की जानकारी मिलेगी.
यहां से रोज डाटा भारतीय मौसम केंद्र की वेबसाइट पर अपलोड होगा. फिलहाल इस केंद्र का रेडियस 10 किमी रखा गया है, लेकिन बाद में इसकी सीमा बढ़ाये जाने की संभावना है. भारतीय मौसम विज्ञान केंद्र ने स्वास्थ्य मंत्री डॉ हर्षवर्द्धन के निर्देश पर केंद्र स्थापित किया है. यह केंद्र गुरुवार से काम करने लगेगा.
तापमान व आर्द्रता के साथ बीमारी के संबंध पर रिसर्च
चमकी-बुखार पर रिसर्च करने वाले विशेषज्ञ यहां से प्राप्त डाटा का अध्ययन करेंगे. गर्मी शुरू होने के पहले से इस डाटा पर विशेषज्ञों की नजर रहेगी.
इससे पता चलेगा कि कितने तापमान व आर्द्रता पर बीमारी शुरू होती है? कितने तापमान व आर्द्रता पर बीमारी का आउटब्रेक होता है. केंद्र से प्राप्त डाटा के आधार पर बीमारी पर रिसर्च किया जायेगा. इसके माध्यम से विशेषज्ञ किसी दूसरे शहर में रह कर भी बीमारी पर रिसर्च कर सकते हैं.
वर्जन
करीब एक सप्ताह से मौसम केंद्र बनाने का काम चल रहा था, जो पूरा हो गया है. इससे प्राप्त डाटा सटीक होगा. इसके माध्यम से आने वाले समय में मौसम की स्थिति का पता चलेगा.
यहां से प्राप्त डाटा ऑटोमैटिक भारतीय मौसम विज्ञान केंद्र की वेबसाइट पर अपलोड होगा. मेरे साथ दिल्ली से आये कई वैज्ञानिकों के सहयोग से यहां केंद्र स्थापित हुआ है. इससे बीमारी पर रिसर्च में सहूलियत होगी.
आनंद शंकर, वैज्ञानिक, भारतीय मौसम विज्ञान केंद्र
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