पटना : एनजीओ की आड़ में पैसा दोगुना करने का खेल, मुंगेर का आकाश दीप भोपाल में बन गया था ‘दूना बाबा’
Updated at : 28 Jun 2019 9:06 AM (IST)
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पटना : राजीवनगर थाना क्षेत्र के दीघा-आशियाना रोड से गिरफ्तार किया गया आकाश दीप बिहार के मुंगेर का रहने वाला है. आकाश दीप भोपाल में ‘दूना बाबा’ बन गया था. अभिनव प्रयास के नाम से उसने एनजीओ शुरू किया था और एनजीओ की आड़ में सबसे पैसा लेकर पांच साल में दोगुना करने का दावा […]
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पटना : राजीवनगर थाना क्षेत्र के दीघा-आशियाना रोड से गिरफ्तार किया गया आकाश दीप बिहार के मुंगेर का रहने वाला है. आकाश दीप भोपाल में ‘दूना बाबा’ बन गया था. अभिनव प्रयास के नाम से उसने एनजीओ शुरू किया था और एनजीओ की आड़ में सबसे पैसा लेकर पांच साल में दोगुना करने का दावा करता था. आकाश के झांसे में आकर काफी लोगों ने आकाश को पैसा दिया था. करीब 30 करोड़ रुपये की ठगी करने के बाद वह भोपाल से फरार हो गया था. उसके खिलाफ कटनी कोर्ट से 2015 में वारंट जारी हो गया था.
लेकिन पुलिस की आंख में धूल झोंक कर आकाश पटना भाग आया था. यहां पर नाम व पहचान बदलकर वह रहता था. आकाश के इस धंधे में उसकी पत्नी शिखा राय भी शामिल थी. दोनों मिलकर लोगों की जेब काटते थे.
आकाश का फंडाफोड़ तब हुआ जब आकाश के ही एनजीओ में काम करने वाले संजय श्रीवास्तव भोपाल में जमानत पर जेल से छूटा और आकाश की जानकारी लेते हुए पटना आ गया. संजय यह पता लगाने में सफल रहा कि आकाश जगदेव पथ में पहचान बदल कर रहता है. संजय की निशानदेही पर राजीवनगर पुलिस बुधवार को आकाश दीप को गिरफ्तार कर लिया है. राजीवनगर पुलिस का कहना है कि भोपाल पुलिस से बात की जा रही है. उसे भोपाल पुलिस ट्रांजिट रिमांड पर पटना आकर ले जायेगी. क्योंकि आकाश के खिलाफ भोपाल में ही मामले दर्ज हैं.
कई लोग एनजीओ में करते थे काम, संजय को हो गयी थी जेल : जेल से जमानत पर छूटा संजय श्रीवास्तव का कहना है कि कई लोग एनजीओ में काम करते थे. इसमें राजेश सिन्हा, आशीष सिन्हा सिन्हा, संदीप श्रीवास्तव, एसके महोबिया, एसके दासगुप्ता और हेमंत भार्गव भी काम करते थे.
यूपी के ‘दूना बाबा’ गैंग की तरह काम करता था
दरअसल पैसा दूना करने के नाम पर ठगी करने का ट्रेंड पुराना है. आकाश यूपी के दूना बाबा गैंग के तर्ज पर काम कर रहा था.
यहां बता दें कि वर्ष 2007 में यूपी के गोरखपुर, देवरिया, कुशीनगर समेत अन्य जिलों में एक दूना बाबा गैंग सक्रिय था. यह गैंग यह झांसा देता था कि पैसा लगायें और चौबीस घंटे में दोगुना पैसा ले जायें. इस गैंग का नाम ही दूना बाबा गैंग था.
बड़ी बात यह है कि यह गैंग किसी भी जिले के एक गांव में चले जाते थे और स्थानीय अपराधिक छवि वाले लोगों के संरक्षण में धंधा करते थे. पैसा दूना करने के लिए शर्त यह थी कि अगर आप 10 हजार रुपये लगाते हैं तो किसी और व्यक्ति को भी मैनेज कर के लायें और उससे भी पैसा लगवायें. उसके पैसा लगाते ही पहले व्यक्ति को पैसा दूना करके दिया जायेगा. जब यह गैंग बड़ी रकम इकठ्ठा कर लेता था तो संरक्षण देने वालों का आधा हिस्सा देकर भाग जाते थे.
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