पटना : मदरसों का बन रहा नया सिलेबस, छात्र-छात्राओं का ड्रॉप आउट रोकने में यूएनएफपीए कर रहा मदद
Author Prabhat khabar digital desk
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मिडिल के बाद मदरसों में ड्रॉप आउट की दर 88% छवि बदलने का प्रयास पटना : बिहार के मदरसों में कक्षा आठ के बाद ड्रॉप आउट की दर करीब 88 फीसदी है, जबकि बिहार की सामान्य स्कूली एजुकेशन में इसी कक्षा में ड्रॉप आउट की दर 12-15 फीसदी के बीच है. लिहाजा मदरसों में ड्रॉप […]
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मिडिल के बाद मदरसों में ड्रॉप आउट की दर 88%
छवि बदलने का प्रयास
पटना : बिहार के मदरसों में कक्षा आठ के बाद ड्रॉप आउट की दर करीब 88 फीसदी है, जबकि बिहार की सामान्य स्कूली एजुकेशन में इसी कक्षा में ड्रॉप आउट की दर 12-15 फीसदी के बीच है. लिहाजा मदरसों में ड्रॉप आउट की इस दर को रोकने के लिए खास पाठ्यक्रम तैयार कराया जा रहा है.
इस्लामिक शिक्षा की दो बड़े विश्वविद्यालय मसलन जामिया मिलिया और मौलाना आजाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय इसके लिए पाठ्यक्रम तैयार कर रहे हैं. पाठ्यक्रम में 12-14 वर्ष की उम्र के बच्चों को इस्लामिक फ्रेमवर्क में ही राष्ट्रीयता का पाठ और आर्थिक तरक्की में भागीदारी की राह दिखायी जायेगी.
पटना में 27 मार्च को विशेष बैठक का होगा आयोजन
यूएनएफपीए बिहार में विशेष तौर पर अल्पसंख्यक बच्चों के लिए किशोर-किशोरियां कार्यक्रम के जरिये ड्रॉप आउट रोकने में मदद कर रहा है. दोनों नामचीन विश्वविद्यालयों ने पाठ्यक्रम करीब करीब तैयार कर लिया है. पटना में 27 मार्च को एक विशेष बैठक भी बुलायी गयी है.
बिहार मदरसा बोर्ड के चेयरमैन अब्दुल क्यूम अंसारी ने बताया कि बिहार के मदरसे बदलाव के लिए तैयार हैं. हम अपने बच्चों का भविष्य बनाना चाहते हैं. बिहार के मदरसों में इस पाठ्यक्रम को दो चरणों में लागू किया जायेगा. पहले चरण में सीमांचल के जिलों के और दूसरे फेज में समूचे बिहार के मदरसों में इसे प्रभावी कर दिया जायेगा. यह पाठ्यक्रम इसी साल लागू होगा.
पाठ्यक्रम में जोड़ी जा रहीं ये विशेष किताबें
– इस्लामिक फ्रेमवर्क में ही मॉर्डन एजुकेशन : इसमें आधुनिकता के साथ परंपरागत इस्लामिक शिक्षा को और मजबूत किया जायेगा.
– विद्यार्थियों की नागरिकता : बच्चों को बताया जायेगा कि उसका नागरिक बोध क्या है.
– बच्चों में रिस्पॉन्सिबिलिटी : बच्चों को सिखाया जायेगा कि उनकी राष्ट्र,समाज और समाज के प्रति क्या जवाबदेही है. उसका राष्ट्रीय विकास में इस तरह योगदान हो सकता है.
– बच्चे की पहचान : पढ़ाई के दौरान बच्चों को उनकी असल पहचान के बारे में बताया जायेगा, जिसके केंद्र में देश और समाज होगा.
– रिलेशनशिप : धार्मिक समाज के अलावा उन्हें दूसरे वर्गों के साथ संबंध विकसित करने की जानकारी भी दी जायेगी.
समाज का होगा विकास
पाठ्यक्रम तैयार है. मदरसों की पढ़ाई में विशेष सुधार किये बिना ड्रॉप आउट दर रोकी नहीं जा सकती है. इससे मदरसों में पढ़ने वाले बच्चे मुख्य धारा से सीधे जुड़ जायेंगे. समाज और देश दोनों का विकास होगा.
नदीम नूर, बिहार स्टेट चीफ, यूएनएफपीए
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