बाढ़ : बिचौलियों के हाथों की कठपुतली बन गये किसान
Author Prabhat khabar digital desk
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बाढ़ : प्रखंड के किसान बिचौलियों के हाथों कठपुतली बन कर रह गये हैं. उनकी फसल की कीमत नहीं मिल पा रही है. बिचौलिये और व्यापारी उनका आर्थिक शोषण कर रहे हैं. रकम भुगतान के लिए मोहलत बिचौलिये ले रहे हैं. इस कारण धान उत्पादकों के निजी कामों काे हर्ज हो रहा है. उनकी पीड़ा […]
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बाढ़ : प्रखंड के किसान बिचौलियों के हाथों कठपुतली बन कर रह गये हैं. उनकी फसल की कीमत नहीं मिल पा रही है. बिचौलिये और व्यापारी उनका आर्थिक शोषण कर रहे हैं. रकम भुगतान के लिए मोहलत बिचौलिये ले रहे हैं.
इस कारण धान उत्पादकों के निजी कामों काे हर्ज हो रहा है. उनकी पीड़ा को सुनने वाला कोई नहीं है. मिली जानकारी के अनुसार बाढ़ प्रखंड की 13 पैक्स में अब तक धान की खरीद शुरू नहीं की गयी है. पैक्स अध्यक्षों और सरकारी नीति के बीच चल रहे टकराव का खामियाजा धान उत्पादक किसानों को भुगतना पड़ रहा है.
बताया जाता है कि क्रय केंद्र में सात लाख रुपये की मिनिमम कैश क्रेडिट निर्धारित की गयी है. इसके कारण पैक्स अध्यक्षों ने खुला विद्रोह शुरू कर दिया. पैक्स अध्यक्षों का कहना है कि कैश क्रेडिट पूर्व वर्ष की भांति मिलनी चाहिए और आरटीजीएस की व्यवस्था से धान उत्पादकों को पेमेंट हो, ताकि उन्हें परेशानी न हो और भ्रष्टाचार भी न हो सके.
कम राशि सरकारी स्तर पर दिये जाने के कारण हंगामा होने का खतरा बढ़ गया है. इस कारण पैक्स अध्यक्ष धान खरीद करने से कतरा रहे हैं. फिलहाल बाढ़, बेलछी व पंडारक प्रखंड में धान खरीदने का काम सिफर है. गत वर्ष बाढ़ प्रखंड में 17000 क्विंटल के आसपास धान की खरीद हुई थी. इस बार धान की खरीद शुरू तक नहीं हुई है. सरकारी स्तर पर पहल नहीं किये जाने के कारण किसानों की हालत खराब होती जा रही है और बिचौलिये मनमानी कर रहे हैं.
बिचौलिये 1200 रुपये प्रति क्विंटल धान की खरीद कर रहे
खुले बाजार में 1200 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से बिचौलिये धान की खरीद कर रहे हैं. व्यापारियों के हाथों की कठपुतली बन चुके किसान सरकारी तंत्र पर आस छोड़ चुके हैं. बेढ़ना पश्चिमी पैक्स अध्यक्ष जयप्रकाश सिंह व राणा बीघा पैक्स अध्यक्ष अनिल सिंह ने बताया कि सरकारी नीति में गड़बड़ी के कारण धान की खरीद बंद है. किसान शैलेंद्र सिंह, दिवाकर कुमार, विनय सिंह, राजा करन सिंह तथा प्रेम कुमार सहित उत्पादकों ने बताया कि धान की बिक्री नहीं हो रही है. इस कारण लागत राशि फंसी हुई है.
वहीं, बिचौलिये गांव में धान की खरीद को लेकर मनमानी कर रहे हैं. कई किसान बेबसी के कारण धान बेच रहे हैं. छोटे किसानों को ज्यादा नुकसान उठाना पड़ रहा है, जबकि बड़े किसानों ने धान का स्टाक कर लिया है.
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