पटना : पीएमसीएच में बढ़ा डेंगू मरीजों का लोड, गैर व्यावसायिक ब्लड बैंक नहीं होने से परेशानी
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 09 Nov 2018 8:47 AM
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पटना : शहर सहित गांवों से भी डेंगू के संभावित मरीज सरकारी व प्राइवेट अस्पतालों में इलाज कराने पहुंच रहे हैं. मरीजों की समस्या तब बढ़ जाती है, जब प्लेटलेट्स की मांग को पूरा करने के लिए प्राइवेट ब्लड बैंक का सहारा लेना पड़ रहा है. सरकारी ब्लड बैंकों की कमी के कारण प्राइवेट ब्लड […]
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पटना : शहर सहित गांवों से भी डेंगू के संभावित मरीज सरकारी व प्राइवेट अस्पतालों में इलाज कराने पहुंच रहे हैं. मरीजों की समस्या तब बढ़ जाती है, जब प्लेटलेट्स की मांग को पूरा करने के लिए प्राइवेट ब्लड बैंक का सहारा लेना पड़ रहा है.
सरकारी ब्लड बैंकों की कमी के कारण प्राइवेट ब्लड बैंकों में प्लेटलेट्स की मनमानी कीमत वसूली जा रही है. इधर शहर के छोटे अस्पतालों व अनुमंडलीय अस्पतालों में गैर व्यावसायिक ब्लड स्टोरेज यूनिट खोले जाने का काम अधर में लटक गया है. शहर के जयप्रभा अस्पताल, आईजीआईएमएस व एनएमसीएच अस्पताल में ब्लड बैंक की सुविधा है. लेकिन सूत्रों की मानें, तो शाम छह बजे के बाद इन अस्पतालों के ब्लड बैंक बंद हो जाते हैं. ऐसे में मरीज पीएमसीएच जाते हैं. क्योंकि, पीएमसीएच में 24 घंटे ब्लड बैंक खुले रहते हैं.
नहीं खुला गैर व्यावसायिक ब्लड बैंक : शहर के गार्डिनर रोड अस्पताल व राजेंद्र नगर आंख अस्पताल में गैर व्यावसायिक ब्लड बैंक खोले जाने की योजना कुछ स्वयंसेवी संगठनों ने बनायी थी. 18 सितंबर, 2017 को भेजे गये इस प्रस्ताव को सवा साल से ऊपर हो गये, लेकिन धरातल पर कुछ भी काम नहीं हुआ.
डेंगू मरीजों का आंकड़ा 1 हजार के पार
एक हजार से अधिक मरीजों में डेंगू की पुष्टि हो चुकी है. बड़ी बात तो यह है कि एक हजार मरीज अकेले सिर्फ पीएमसीएच के वायोरोलॉजी विभाग के लैब ने पुष्टि की है. वहीं बाकी सरकारी व प्राइवेट अस्पतालों को मिला दिया जाये, तो आंकड़ा काफी अधिक बढ़ सकता है. डेंगू का खौफ मरीजों के अलावा आम लोगों में देखने को मिल रहा है. पीएमसीएच, गार्डिनर आदि अस्पतालों में लोग जांच कराने पहुंच रहे हैं.
मशीन होती तो परेशानी हो जाती दूर
प्रस्तावित योजना के अनुसार गैर व्यावसायिक ब्लड बैंक में सिंगल डोनर प्लेटलेट्स की मशीन कोब एस्पेक्ट्रा लगायी जाती है. अगर यह मशीन लग जाती है, तो डेंगू मरीज व डोनर दोनों को ज्यादा परेशानियों का सामना नहीं करना पड़ेगा. डॉक्टरों की मानें, तो सामान्य तरीके से एक दिन व कोब एस्पेक्ट्रा मशीन से पांच घंटे में प्लेटलेट्स को आसानी से डोनर के खून से निकाला जा सकता है.
मां वैष्णो देवी सेवा समिति के संस्थापक सदस्य मुकेश कुमार हिसारिया का कहना है कि प्लेटलेट्स के अभाव में डेंगू मरीजों की मौत नहीं हो, इसके लिए हमने गैर व्यावसायिक ब्लड बैंक शुरू करने के लिए एक प्रस्ताव बना कर स्वास्थ्य विभाग को सवा साल पहले भेजा था. विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों ने स्वीकृति भी दी. अगर गैर व्यावसायिक ब्लड बैंक खुल जाता, तो मरीजों को नि:शुल्क प्लेटलेट्स की सुविधा शुरू हो जाती.
प्लेटलेट्स की कमी नहीं हो, इसके लिए सभी सरकारी अस्पताल के ब्लड बैंकों को अलर्ट करते हुए प्लेटलेट्स व खून का स्टॉक रखने का निर्देश जारी किया गया है. सभी सरकारी ब्लड बैंक में खून व प्लेटलेट्स पूरी मात्रा में है. कई अनुमंडलीय अस्पतालों में ब्लड स्टोरेज यूनिट भी खुल गये हैं, रही बात कुछ अस्पतालों में 24 घंटे ब्लड बैंक नहीं खोले जाने की, तो इस मामले का पता लगा रहा हूं.
—डॉ पीके झा, सिविल सर्जन
पीएमसीएच में फिर मिले 28 डेंगू के मरीज, 23 पटना के
डेंगू का डंक कम होने का नाम नहीं ले रहा है. मरीजों में लगातार दहशत का माहौल बनते जा रहा है. पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल में रोजाना नये डेंगू के मरीज मिल रहे हैं.
गुरुवार को पीएमसीएच के वॉयरोलॉजी विभाग ने 28 मरीजों में डेंगू की पुष्टि की. इसमें अकेले सिर्फ पटना से 23 मरीज शामिल हैं. रोजाना मिल रहे डेंगू के नये मरीजों के बाद पीएमसीएच से लेकर स्वास्थ्य विभाग तक हड़कंप मचा हुआ है. इस आंकड़े के साथ अब तक पीएमसीएच में सिर्फ 1037 मरीज डेंगू के पाये गये हैं. इन मरीजों का शहर के सरकारी व प्राइवेट अस्पतालों में इलाज चल रहा है.
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