बिहार एड्स कंट्रोल सोसाइटी के आंकड़ों में खुलासा, एचआईवी मां के 70 फीसदी बच्चे हो रहे स्वस्थ

Updated at : 02 Nov 2018 7:23 AM (IST)
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बिहार एड्स कंट्रोल सोसाइटी के आंकड़ों में खुलासा, एचआईवी मां के 70 फीसदी बच्चे हो रहे स्वस्थ

आनंद तिवारी एचआईवी के वायरस फैलने में आयी है कमी पटना : एड्स रोगियों के लिए एक सकारात्मक खबर है. एचआईवी पॉजिटिव महिलाओं से उनके बच्चों में एचआईवी के वायरस फैलने के मामलों में कमी आयी है. अब एचआईवी प्रभावित मां के 70 फीसदी बच्चे स्वस्थ पैदा हो रहे हैं. बिहार एड्स कंट्रोल सोसाइटी व […]

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आनंद तिवारी
एचआईवी के वायरस फैलने में आयी है कमी
पटना : एड्स रोगियों के लिए एक सकारात्मक खबर है. एचआईवी पॉजिटिव महिलाओं से उनके बच्चों में एचआईवी के वायरस फैलने के मामलों में कमी आयी है. अब एचआईवी प्रभावित मां के 70 फीसदी बच्चे स्वस्थ पैदा हो रहे हैं.
बिहार एड्स कंट्रोल सोसाइटी व पटना ऑब्स एवं गायनी के आंकड़ों से इस बात का खुलासा हुआ है. एड्स कंट्रोल सोसाइटी का दावा है कि प्रीवेंशन ऑफ पैरंट टू चाइल्ड ट्रांसमिशन (पीपीपीसीटी) के कार्यक्रम के तहत चल रहे कार्यक्रम का नतीजा है कि लोगों में जागरूकता देखने को मिल रही है.
दो साल के अंदर तेजी से आयी गिरावट : आंकड़े के अनुसार 2014-15 व 2015-16 में करीब 1080 गर्भवती महिलाओं को एचआईवी पॉजिटिव पाया गया था. ये सभी महिलाएं पटना के अलावा बिहार के अलग-अलग जिलों की रहने वाली हैं.
डिलिवरी के बाद 745 बच्चों में एचआईवी के लक्षण नहीं दिखे. यानी करीब 70 प्रतिशत ऐसे बच्चे थे जिनमें मां के एचआईवी वायरस उनमें नहीं आया. ये सभी बच्चे स्वस्थ हैं. जबकि गर्भ में पल रहा बच्चा अपने पोषण के लिए मां पर ही निर्भर होता है.
पीपीटीसीटी कार्यक्रम के तहत आ रही जागरूकता : बिहार एड्स कंट्रोल सोसाइटी के निदेशक डॉ एनके गुप्ता का कहना है कि पटना सहित पूरे बिहार में प्रिवेंशन ऑफ पेरेंट टू चाइल्ड ट्रांसमिशन (पीपीटीसीटी) कार्यक्रम चलाया जा रहा है. इस कार्यक्रम को गर्भवती महिलाओं से उनके बच्चों में एचआईवी के वायरस को रोकने के लिए शुरू किया गया है. कार्यक्रम के जरिये इतनी बड़ी सफलता देखने को मिलती है.
वहीं पटना ऑब्स एवं गायनी सोसाइटी से जुड़ी डॉ कल्पना सिंह ने बताया कि आंकड़ों के अनुसार पूरे पटना जिले के सरकारी व प्राइवेट अस्पतालों को मिला कर 2016 में 201 एचआईवी पॉजिटिव महिलाएं थीं. इनमें 172 महिलाओं ने एचआईवी निगेटिव बच्चे को जन्म दिया जो कि काफी अच्छी पहल है. हालांकि बाकी बच्चे एचआइवी पॉजिटिव पाये गये. वहीं जागरूकता नहीं होने से बाकी बच्चों में एचआईवी पॉजिटिव मिले हैं.
प्रीवेंशन ऑफ पैरंट टू चाइल्ड ट्रांसमिशन (पीपीपीसीटी) के कार्यक्रम की वजह से मिल रही सफलता
आज भी 5 से 6 महीने बाद आती हैं जांच कराने
एनएमसीएच की स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ अमिता सिन्हा ने कहा कि एचआईवी जांच को लेकर लोगों में पहले से अधिक जागरूकता आयी है. लेकिन एचआईवी पॉजिटिव महिलाओं में इसको लेकर जागरूकता की बड़ी कभी देखने को मिलती है. आज भी बहुत सी महिलाएं एचआईवी पॉजिटिव गर्भावस्था के 5 से 6 महीने में जांच के लिए आती हैं.
गर्भावस्था के दौरान जितनी जल्दी मां का एचआईवी जांच कर ली जाती है, उतनी जल्दी बच्चे को इन्फेक्टेड होने से बचाया जा सकता है. ऐसे में हर गर्भवती महिला को गर्भधारण की शुरुआत में ही एचआईवी की जांच करा लेनी चाहिए. ताकि समय रहते उन्हें दवाएं देकर बच्चे को संक्रमित होने से बचाया जा सके.
और कमी आयेगी
बिहार एड्स कंट्रोल सोसाइटी के पूर्व संयुक्त निदेशक डॉ देवेंद्र ने बताया कि पटना सहित पूरे बिहार के सरकारी अस्पतालों में पीपीटीसीटी कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है. इस कार्यक्रम के तहत एचआईवी मां के बच्चे को स्वस्थ रहे इस उद्देश्य को देखते हुए जागरूक किया जाता है.
यही वजह है कि 70 प्रतिशत एचआइवी मां के बच्चे अब स्वस्थ हो रहे हैं. आने वाले दिनों में और कमी आयेगी और लक्ष्य है कि सभी बच्चों को एचआईवी के वायरस से बचना है.
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