एयर क्वालिटी इंडेक्स सुधारने में नाकामयाब सरकारी एजेंसियां, घातक धूल के कणों से पटा पटना शहर

Updated at : 15 Oct 2018 5:58 AM (IST)
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एयर क्वालिटी इंडेक्स सुधारने में नाकामयाब सरकारी एजेंसियां, घातक धूल के कणों से पटा पटना शहर

पटना : त्योहार के सीजन में बारीक लेकिन घातक धूलकणों से पटना की आबोहवा बुरी तरह प्रभावित हो रही है. पटना का वायु गुणवत्ता का सूचकांक (एयर क्वालिटी इंडेक्स ) लगातार नीचे जा रहा है. एयर क्वालिटी इंडेक्स 163 पहुंच गया है. ये इंडेक्स कैटेगरी के हिसाब से मोडरेट है. लेकिन, इसमें लगातार इजाफा इसे […]

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पटना : त्योहार के सीजन में बारीक लेकिन घातक धूलकणों से पटना की आबोहवा बुरी तरह प्रभावित हो रही है. पटना का वायु गुणवत्ता का सूचकांक (एयर क्वालिटी इंडेक्स ) लगातार नीचे जा रहा है. एयर क्वालिटी इंडेक्स 163 पहुंच गया है. ये इंडेक्स कैटेगरी के हिसाब से मोडरेट है. लेकिन, इसमें लगातार इजाफा इसे पूअर कैटेगरी के करीब लाता जा रहा है.
यही चिंता की बात है. अभी कुछ समय पहले तक एयर क्वालिटी इंडेक्स 150 से नीचे ही रहा था. जानकारी हो कि 100 से 200 के बीच एयर क्वालिटी इंडेक्स मोडरेट (मध्यम प्रदूषण युक्त ) माना जाता है. इससे ऊपर पूअर कैटेगरी आती है. ये खास तौर पर घातक होती है. अलबत्ता मोडरेट कैटेगरी दमा, अस्थमा और लंग्स की बीमारियों के लिए खासी घातक मानी जाती है.
पटना का एयर क्वालिटी इंडेक्स एक अरसे से मोडरेट कैटेगरी में : शासन स्तर पर पटना शहर की गुणवत्ता सुधारने के लिए तमाम दिशा निर्देश दिये गये हैं. लेकिन, शहर की तमाम सरकारी विभागों के स्थानीय अफसरों में समन्वय न होने की वजह से जमीनी तौर पर सुधार देखे नहीं जा सके हैं.
फिलहाल जब समूचा शहर त्योहार के उल्लास में डूबा हुआ है. वहां की गुणवत्ता पर संबंधित एजेंसियों का बिल्कुल ध्यान नहीं है. शहर में कचरा अटा पड़ा है. दूसरे बिना किसी एहतियाती उपाय किये निर्माण कार्य किये जा रहे हैं. पटना शहर की हवा की गुणवत्ता की असली वजह पीएम 2़ 5 है. पीएम 2़ 5 बेहद बारीक सूक्ष्म कण हैं.
इनका साइज 2़ 5 माइक्रॉन होता है. इसका साइज हवा की मोटाई से भी कम होता है. ये कण ठाेस और द्रव्य दोनों तरह के रसायनों से बने होते हैं. जानकारी हो कि समूचे बिहार में गया ही इकलौता ऐसा शहर है, जिसने अपनी वायु की गुणवत्ता को ठीक से सुधारा है. वह संतोषजनक कैटेगरी में आ चुका है. जबकि, पटना और मुजफ्फरपुर अभी भी उसी मोडरेट श्रेणी में शुमार हैं. बेगूसराय भी मोडरेट कैटेगरी में शामिल हो चुका है.
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