पटना : वाई-फाई कैंपस का हाल : कहीं छात्र नदारद तो कहीं लापरवाही की भेंट चढ़ गयी योजना
Updated at : 03 Oct 2018 6:37 AM (IST)
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सितंबर 2017 में ही सभी कॉलेज कैंपस में मुफ्त वाई-फाई योजना कर दी थी बहाल पटना : राज्य में उच्च शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए तकनीक के प्रयोग को ज्यादा से ज्यादा बढ़ावा दिया जा रहा है. इसी क्रम में सभी सरकारी विश्वविद्यालयों और कॉलेज कैंपस में छात्रों को मुफ्त वाई-फाई योजना शुरू की […]
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सितंबर 2017 में ही सभी कॉलेज कैंपस में मुफ्त वाई-फाई योजना कर दी थी बहाल
पटना : राज्य में उच्च शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए तकनीक के प्रयोग को ज्यादा से ज्यादा बढ़ावा दिया जा रहा है. इसी क्रम में सभी सरकारी विश्वविद्यालयों और कॉलेज कैंपस में छात्रों को मुफ्त वाई-फाई योजना शुरू की गयी थी. सितंबर 2017 से शुरू हुई यह योजना एक साल पूरा होते-होते तकरीबन पूरी तरह से फेल हो गयी है. विश्वविद्यालय या कॉलेज कैंपस में यह मुफ्त इंटरनेट सेवा सही से काम नहीं कर रही है.
पटना के कुछ कॉलेजों में यह काम भी करती है तो आधा-अधूरे तरीके से. आधा से ज्यादा समय तक यह सेवा बंद ही रहती है. कई कॉलेजों में छात्र ही नदारद हैं, तो कहीं यह योजना शिक्षण संस्थानों की लापरवाही की भेंट चढ़ गयी है.
इस योजना का मुख्य उदे्श्य छात्रों को उच्च शिक्षा के क्षेत्र में तकनीक की मदद से ज्यादा से ज्यादा सहूलियतें और अवसर उपलब्ध करवाना है.
छात्र अतिरिक्त जानकारी या ज्ञान के सार्वभौमिक स्रोत के रूप में इंटरनेट का उपयोग कर सकें और देश-दुनिया के अलग-अलग शिक्षण संस्थानों की गतिविधि की जानकारी लेने के अलावा किसी संबंधित विषय पर होने वाले सभी तरह के शोध संबंधित परिधि से जुड़ने में यह माध्यम बेहद ही सक्षम साबित हो सकता है, परंतु ये सभी उद्देश्य मुख्य रूप से कॉलेज प्रशासन की लापरवाही के कारण महज दिखावा बनकर रह गये हैं.
शुरू में कंपनी स्तर पर समस्या, बाद में व्यवस्था बन गयी समस्या
कैंपस मुफ्त वाई-फाई योजना को स्थापित करने में शुरुआती समस्या इसका टेंडर या जिम्मेदारी लेने वाली कंपनी एलएंडटी के स्तर पर आयी. शुरुआत से ही इस योजना में कई तरह की समस्याएं निरंतर आती रहीं, परंतु तमाम कोशिशों के बाद जब यह सिस्टम जमीन पर उतरा तो इसे संचालित करने वाली पूरी व्यवस्था ही इसके लिए समस्या बन गयी.
शुरुआत में कंपनी के स्तर पर सर्वर तैयार करने, सामानों को इंस्टॉल करने में देरी, नेटवर्क कनेक्टिविटी, कॉलेजों में इनके समुचित संचालन करने समेत अन्य दिक्कतें आयी. जब ये समस्याएं दूर हुईं, तो अधिकांश संस्थानों में बिजली और इसके रख-रखाव की समस्या आने लगी.
इसे दूर करने के लिए तमाम यूनिटों को सोलर से जोड़ा गया. अब कॉलेज या विश्वविद्यालयों में इसे सुबह ऑन करने और शाम को इसे बंद करने की कोई जहमत ही नहीं उठाता था. इससे कई संस्थानों में इसका संचालन सही से नहीं हो पाता है. रख-रखाव ठीक से नहीं होने से कई संस्थानों में इसका यूपीएस ही खराब हो गया है. इससे भी इसके संचालन में समस्या आ रही है.
कॉलेज प्रशासन की तरफ से की जाती हैं अजीब तरह की बातें
कुछ नामचीन कॉलेज के प्राचार्य इस वाई-फाई में खर्च होने वाली बिजली का बिल नहीं देना चाहते. जबकि इसका बिल महीने में कुछ सौ का ही आता है.
एक मेडिकल संस्थान ने इसका उपयोग करने के लिए छात्रों से पहले फॉर्म भरने की शर्त रख दी है. इस वजह से भी छात्र इस सुविधा से दूर हो गये. संस्कृत कॉलेज जैसे संस्थान का कहना है कि उन्हें समय पर पैसे ही नहीं मिलते तो वे इसकी देखभाल कैसे करें. इस कारण से इन संस्थानों में इस पर कोई ध्यान ही नहीं देता है. कई संस्थानों में तो छात्र ही नहीं आते हैं. इससे यह बेकार पड़े हुए हैं. इनका कोई उपयोग ही नहीं होता है. कई संस्थानों ने हर बार लॉग-इन करने पर छात्रों के लिए पासवर्ड का प्रबंध कर रखा है, इससे भी छात्र इससे दूर हो रहे हैं.
सामान्य की तुलना में तकनीकी संस्थानों में स्थिति बेहतर
सामान्य शिक्षण संस्थानों की तुलना में तकनीकी शिक्षण संस्थानों में इस वाई-फाई योजना की स्थिति बेहतर है. यहां छात्रों की संख्या निरंतर बनी रहने और प्रबंधन की तरफ से इसका ध्यान रखने के कारण कुछ एक संस्थानों में यह सेवा अच्छा प्रदर्शन कर रही है जबकि सामान्य संस्थानों में छात्रों और शिक्षकों का टोटा होने के कारण यह सेवा ठप है. इस कारण कॉलेज प्रबंधन भी इस पर ध्यान नहीं देता.
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