बालिका गृह :सुप्रीम कोर्ट ने पटना हाईकोर्ट के आदेश पर लगायी रोक, जांच को नहीं गठित होगी सीबीआई की नयी टीम

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 19 Sep 2018 8:03 AM

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नयी दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने मुजफ्फरपुर बालिका गृह यौन उत्पीड़न कांड की जांच के लिए नया जांच दल गठित करने के पटना हाईकोर्ट के आदेश पर मंगलवार को रोक लगा दी. कोर्ट ने कहा कि इस तरह का आदेश न सिर्फ जांच के लिए, बल्कि पीड़ितों के हितों के लिए भी नुकसानदेह होगा. कोर्ट […]

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नयी दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने मुजफ्फरपुर बालिका गृह यौन उत्पीड़न कांड की जांच के लिए नया जांच दल गठित करने के पटना हाईकोर्ट के आदेश पर मंगलवार को रोक लगा दी.
कोर्ट ने कहा कि इस तरह का आदेश न सिर्फ जांच के लिए, बल्कि पीड़ितों के हितों के लिए भी नुकसानदेह होगा. कोर्ट ने मामले की जांच के लिए सीबीआई के विशेष निदेशक को नया जांच दल गठित करने के हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगाते हुए कहा कि मौजूदा जांच दल को बदलने का कोई कारण नहीं है.
इसे सीबीआई निदेशक ने गठित किया था. हाईकोर्ट ने एक गैर सरकारी संगठन द्वारा संचालित इस बालिका गृह में लड़कियों के साथ दुष्कर्म और यौनशोषण की घटनाओं की जांच के लिए 29 अगस्त को सीबीआई के विशेष निदेशक को नया जांच दल गठित करने का आदेश दिया था. जस्टिस मदन बी लोकूर और जस्टिस दीपक गुप्ता की पीठ ने इस बात पर भी गौर किया कि मामले की जांच कर रहे दल पर जांच के तरीके को लेकर कोई आरोप नहीं लगे हैं.
कोर्ट ने कहा कि हमें ऐसी कोई वजह नजर नहीं आती कि मामले की जांच कर रहे मौजूदा जांच दल को इस समय बदला जाना चाहिए. यह जांच के लिए और उन बच्चियों के हित के लिए भी नुकसानदेह होगा, जिनका मुजफ्फरपुर बालिका गृह में यौन उत्पीड़न हुआ. शीर्ष अदालत ने निर्देश दिया कि जांच वही दल जारी रखेगा, जिसका गठन सीबीआई निदेशक ने 30 जुलाई को किया था. पीठ ने सीबीआई से मामले में सीलबंद लिफाफे में दो स्थिति रिपोर्ट भी दाखिल करने को कहा, जिसे हाईकोर्ट के समक्ष दाखिल किया गया था और मामले की अगली सुनवाई की तारीख 20 सितंबर को निर्धारित कर दी.
सरकार की आर्थिक मदद से चलने वाले इस बालिका गृह की 34 लड़कियों के साथ दुष्कर्म होने की पुष्टि मेडिकल जांच में हुई है. इसका संचालन एक गैर सरकारी संगठन सेवा संकल्प समिति करती थी, जिसका प्रमुख ब्रजेश ठाकुर है.
मामले का खुलासा राज्य सरकार के समाज कल्याण विभाग को टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज (टिस) की ओर से सौंपी गयी ऑडिट रिपोर्ट से हुआ. यह मामला सुर्खियों में आने के बाद ब्रजेश ठाकुर सहित 11 व्यक्तियों के खिलाफ 31 मई को प्राथमिकी दर्ज की गयी थी. बाद में राज्य सरकार की सिफारिश पर यह मामला सीबीआई को सौंप दिया गया था.
सीबीआई की कार्रवाई रिपोर्ट पटना हाईकोर्ट में पेश
पटना : मुजफ्फरपुर बालिका गृह यौनशोषण मामले में सीबीआई ने मंगलवार को अपनी कार्रवाई रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में पटना हाईकोर्ट में पेश किया. मुख्य न्यायाधीश मुकेश आर शाह और न्यायाधीश आशुतोष कुमार की खंडपीठ ने इस मामले को लेकर दायर तीन लोकहित याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई की. कोर्ट में सीबीआई ने एक हस्तक्षेप याचिका दायर कर अदालत को बताया कि किसी भी जांच के लिए टीम का गठन सीबीआई मुख्यालय करता है.
इस मामले में जांच के लिए सीबीआई के स्पेशल डायरेक्टर को जो निर्देश दिया गया है, उसे संशोधित किया जाये. सीबीआई की याचिका पर कोर्ट ने नाराजगी जाहिर की. इसके बाद सीबीआई ने इसे वापस ले लिया. कोर्ट ने सीबीआई को अगली सुनवाई 20 सितंबर को यह बताने को कहा है कि पूर्व के आदेश का पालन हुआ है या नहीं. मालूम हो कि पिछली सुनवाई में कोर्ट ने सीबीआई के स्पेशल डायरेक्टर को यह निर्देश दिया था कि वे इस मामले की जांच के लिए नये सिरे से टीम का गठन करें.
मीडिया को इस मामले की रिपोर्टिंग की छूट देने के मामले में हाईकोर्ट ने कहा कि मीडिया से संबंधित मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है. वहां से निष्पादित होने के बाद ही इसमें कोई भी आदेश या निर्देश दिया जायेगा. कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई के लिए 20 सितंबर की तिथि निर्धारित की है.
जांच के बीच में सीबीआई एसपी के ट्रांसफर पर हाईकोर्ट ने उठाये थे सवाल
पटना : हाईकोर्ट ने इस मामले में बीच में ही जांच से जुड़े सीबीआई के एसपी के तबादले पर सवाल उठाते हुए जांच एजेंसी से पूछा था कि जांच अधिकारी का तबादला कैसे हो गया. हाईकोर्ट ने सीबीआई को इसमें स्थिति साफ करने और सभी तथ्य कोर्ट के सामने रखने को कहा था.
हालांकि सीबीआई के डीआईजी ने तुरंत सभी तथ्य रखने में असमर्थता जाहिर की थी. साथ ही हाईकोर्ट ने सीबीआई की अब तक की जांच पर असंतुष्टि जताते हुए कहा था कि मामले की गंभीरता को देखते हुए सरकार ने इस मामले की जांच सीबीआई को सौंपी थी. ऐसे में एजेंसी को हर तारीख पर जांच रिपोर्ट सौंपनी होगी. अब इस मामले की अगली सुनवाई 27 सितंबर को होगी.
सुप्रीम कोर्ट ने कहा
जांच टीम को बदलने का कोई औचित्य नहीं, टीम में फेरबदल से जांच होगी प्रभावित
अगर जरूरी हुआ तो वह हाईकोर्ट से लंबित मामले को अपने पास ट्रांसफर कर लेगा और खुद मॉनीटरिंग करेगा
सीबीआई पटना हाईकोर्ट में पहले दाखिल की गयी जांच की प्रगति रिपोर्ट पेश करे
अब 20 सितंबर को आगे की सुनवाई
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