स्नैक्स के नाम पर पटना के सिनेमा हॉल और मल्टीप्लेक्स में मची लूट, 70 में एक लीटर पानी व 180 में पॉपकॉर्न का डिब्बा
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 26 Jul 2018 6:55 AM
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अनिकेत त्रिवेदी पटना : राजधानी के सिनेमा हॉल और मल्टीप्लेक्स में जलपान की वस्तुओं पर मनमानी कीमत वसूली जा रही है. यूं कहें कि यहां सारे नियम कायदों को धता बता कर उपभोक्ताओं को लूटा जा रहा है. दरअसल सिनेमा हॉल और मल्टीप्लेक्स में कोल्ड ड्रिंक, पॉपकाॅर्न, बोतलबंद पानी, मोमोज से लेकर अन्य खाने की […]
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अनिकेत त्रिवेदी
पटना : राजधानी के सिनेमा हॉल और मल्टीप्लेक्स में जलपान की वस्तुओं पर मनमानी कीमत वसूली जा रही है. यूं कहें कि यहां सारे नियम कायदों को धता बता कर उपभोक्ताओं को लूटा जा रहा है. दरअसल सिनेमा हॉल और मल्टीप्लेक्स में कोल्ड ड्रिंक, पॉपकाॅर्न, बोतलबंद पानी, मोमोज से लेकर अन्य खाने की वस्तुओं के मनमाने दाम तय किये गये हैं
इस परिदृश्य में सिनेमा घर के अंदर स्नैक्स की दुकानों पर आप कुछ भी खरीदें, तो आप की जेब कटनी पक्की बात है. दरअसल यहां सामान्य बोतलबंद पानी से साढ़े तीन गुना कीमत और पॉपकार्न पर दस गुना से अधिक कीमत वसूली जा रही है. पाॅपकाॅर्न का सौ से डेढ़ सौ ग्राम वाला डिब्बा 180 रुपये में दिया जा रहा है.
कुल मिला कर यहां खाने पीने की कोई भी सामग्री सौ रुपये से अधिक की है. कहने को केवल बोतलबंद पानी की कीमत सौ रुपये से कुछ कम (सामान्य से साढ़े तीन गुना अधिक ) सत्तर रुपये हैं. इसके अलावा शहर के कुछ बड़े मॉल में तो किसी भी वस्तु की न्यूनतम कीमत 150 रुपये से ऊपर रखी गयी है. यह मनमानी वसूली पैक्ड और अनपैक्ड दोनों तरह की वस्तुओं पर की जा रही है.
– नियम तो है मगर सख्ती नहीं : नियम के तहत सभी प्रकार के पैक्ड व अनपैक्ड उत्पाद उपभोक्ता संरक्षण के नियम में आते हैं. खास तौर पर पैक्ड सामानों पर अंकित अधिकतम मूल्य से अधिक नहीं लिया जा सकता है. एमआरपी में ही टैक्स, ट्रांसपोर्ट व अन्य खर्च जुड़ा हुआ होता है. लेकिन, केवल सर्विस टैक्स देने के नाम पर समान के वास्तविक कीमत से दोगुना पैसा वसूला जा रहा है.
एक ट्रे की कीमत एक हजार से अधिक
बाहर ही रखवा लिया जाता है सामान
सिनेमा घरों की मनमानी है कि अगर कोई व्यक्ति बाहर से कोई भी सामान लेकर जाता है, तो उसे चेकिंग प्वाइंट पर ही रोक दिया जाता है. यहां तक की तैनातकर्मी आम लोगों को भीतर पानी तक नहीं ले जाने देते हैं.
भले ही इसके लिए कोई सरकारी स्तर पर नियम नहीं है. लेकिन, सिनेमाघर भूख-प्यास के नाम पर लोगों को लूट रहे हैं. सबसे बड़ी बात है कि अंदर के दुकानदार वैसी वस्तुओं को भी अपने-अपने पैकेट में बेचते हैं, जो मार्केट में कंपनी विशेष की पैकेट में आते हैं. पैक्ड से अनपैक्ड और फिर अपने ब्रांड में पैक्ड करने के पीछे भी पैसे बनाने का खेल है.किसी अन्य राज्य के हाईकोर्ट ने सामानों केदर निर्धारण को लेकर निर्देश जारी किया गया है. उसका अध्ययन कराया जा रहा है.
– कुमार रवि, डीएम
– किसी ने शिकायत नहीं की : सिनेमा घरों में मनमानी कीमत को लेकर जिला प्रशासन व खाद्य व उपभोक्ता संरक्षण विभाग के अधिकारियों से जब बात की गयी, तो अधिकांश से इस बात को सही माना. लेकिन, जिम्मेदार अधिकारी का तर्क था कि कभी किसी ने कोई शिकायत नहीं की. वहीं एक अधिकारी ने यह भी कह दिया कि सिनेमा एक्ट में इस तरह की बात नहीं है कि कोई कार्रवाई की जाये.
पैक्ड- केवल पानी ही कंपनी की बोतल में बेचा जाता है.
अनपैक्ड- कोल्ड ड्रिंक को सिनेमा हॉल वाले अपनी पैकिंग में बेचते हैं. पॉपकार्न, मोमोज, समोसा, पेटीज से लेकर अन्य कई खाने वाली वस्तुएं.
मुंबई हाईकोर्ट ने दिया था निर्णय
सिनेमा हॉल और मल्टीप्लेक्स में बाहर से खाद्य पदार्थ के रोक को मुंबई उच्च न्यायालय ने कानूनी नहीं बताया था. कोर्ट ने एक जनहित याचिका की सुनवाई में कहा था कि मॉल या थियेटर ने खाद्य पदार्थ का बेचना गैर कानूनी है. कोर्ट ने कहा था कि अगर मेटल डिटेक्टर है तो कोई घातक चीज अंदर कैसे ले जा सकता है. इसलिए बाहर से सामान ले जाने देना चाहिए. इसको लेकर सरकार को कार्रवाई करनी चाहिए.
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