पटना : ‘राजद व कांग्रेस अतिपिछड़ो के विरोधी’
Updated at : 06 Jul 2018 5:15 AM (IST)
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पटना : राजद और कांग्रेस हमेशा से अतिपिछड़ा विरोधी रहे हैं. कांग्रेस ने केंद्र में पिछड़ा वर्ग आयोग की रिपोर्ट 10 वर्षों तक लागू नहीं की. राजद ने बिहार में पिछड़ा वर्ग को आरक्षण दिये बिना 2001 में पंचायत का चुनाव करा लिया. आज भी कांग्रेस केंद्र की नौकरियों में आरक्षण के लिए पिछड़ा वर्ग […]
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पटना : राजद और कांग्रेस हमेशा से अतिपिछड़ा विरोधी रहे हैं. कांग्रेस ने केंद्र में पिछड़ा वर्ग आयोग की रिपोर्ट 10 वर्षों तक लागू नहीं की. राजद ने बिहार में पिछड़ा वर्ग को आरक्षण दिये बिना 2001 में पंचायत का चुनाव करा लिया. आज भी कांग्रेस केंद्र की नौकरियों में आरक्षण के लिए पिछड़ा वर्ग के वर्गीकरण के लिए गठित आयोग का विरोध कर रही है.
ये बातें गुरुवार को उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने कहीं. वे भाजपा प्रदेश कार्यालय में आयोजित अतिपिछड़ा मोर्चा की कार्यसमिति की बैठक को संबोधित कर रहे थे. मोदी ने कहा कि 50 के दशक में कांग्रेस ने जहां पिछड़ों के लिए गठित काका कालेलकर कमीशन की रिपोर्ट को ठंडे बस्ते में डाल दिया. वहीं मोरारजी देसाई की सरकार द्वारा गठित बीपी मंडल आयोग की रिपोर्ट 1980 में आ गयी थी.
उस रिपोर्ट को भी कांग्रेस ने लागू नहीं की. यह रिपोर्ट तब लागू हुई, जब 1989 में केंद्र में बीपी सिंह की सरकार बनी. इसी प्रकार नौकरियों में आरक्षण के लिए बिहार में 1971 में कर्पूरी ठाकुर की सरकार ने मुंगेरी लाल कमीशन का गठन किया था. कर्पूरी फाॅर्मूले की तर्ज पर अतिपिछड़ों को केंद्र सरकार की नौकरियों में आरक्षण का लाभ देने के लिए नरेंद्र मोदी की सरकार ने पिछड़े वर्गों की सूची के वर्गीकरण के लिए आयोग का गठन किया है, तो कांग्रेस इसका भी विरोध कर रही है.
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