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सृजन घोटाला : 2003 से जुड़े हैं तार, आरोपी महेश मंडल के मौत की जांच के लिए बोर्ड गठित

Updated at : 22 Aug 2017 7:03 AM (IST)
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सृजन घोटाला : 2003 से जुड़े हैं तार, आरोपी महेश मंडल के मौत की जांच के लिए बोर्ड गठित

पटना : भागलपुर का सृजन घोटाला राज्य के अब तक के सबसे बड़े घोटाले के रूप में सामने आ रहा है. इसकी जांच में कई नामचीन से लेकर सामान्य किस्म के लोग सामने आये हैं. डीजीपी पीके ठाकुर ने कहा कि सृजन घोटाले के तार वर्ष 2003 से जुड़े हुए हैं. सृजन के पास 2003 […]

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पटना : भागलपुर का सृजन घोटाला राज्य के अब तक के सबसे बड़े घोटाले के रूप में सामने आ रहा है. इसकी जांच में कई नामचीन से लेकर सामान्य किस्म के लोग सामने आये हैं. डीजीपी पीके ठाकुर ने कहा कि सृजन घोटाले के तार वर्ष 2003 से जुड़े हुए हैं. सृजन के पास 2003 से ही सरकारी राशि ट्रांसफर होने लगी थी. कुछ पदाधिकारियों के यहां छापेमारी के दौरान 2003 के कागजात मिले हैं, जिससे यह बात साबित होती है.

अभी इतने वित्तीय वर्ष की जांच पूरी नहीं हुई है, लेकिन अब तक हुई जांच में 870 करोड़ 88 लाख रुपये की गड़बड़ी सामने आ चुकी है. सोमवार को सूचना भवन के संवाद कक्ष में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा कि इस घोटाले की जांच का दायरा अभी पीछे या शुरुआत के वर्षों तक नहीं पहुंचा है. इसका दायरा बढ़ने पर घोटाले की रकम और इसमें शामिल लोगों की पूरी फेहरिस्त सामने आती जायेगी.
हालांकि, इस मामले को सीबीआइ के पास राज्य सरकार ने रेफर कर दिया है, लेकिन जब तक सीबीआइ मामले को टेक-ओवर नहीं करती है, तब तक इसकी जांच राज्य इओयू (आर्थिक अपराध इकाई) की तरफ से गठित एसआइटी करती रहेगी. मामला सीबीआइ के टेक-ओवर करने के बाद बरामद किये गये तमाम दस्तावेज और जांच की पूरी प्रक्रिया उसे सुपुर्द कर दिया जायेगा.
डीजीपी ने कहा कि अब तक हुई जांच में कुल 11 एफआइआर दर्ज हो चुकी है. इनमें सबसे अधिक भागलपुर में नौ मामले दर्ज हुए हैं. जल्द ही एक मामला और दर्ज होने जा रहा है. इसी तरह सहरसा और बांका में एक-एक मामला दर्ज हुआ है. उन्होंने कहा कि इस मामले में किसी को छोड़ा नहीं जायेगा. जैसे-जैसे जांच का दायरा बढ़ता जायेगा और इसमें जिस भी स्तर के लोगों के नाम सामने आते जायेंगे, वैसे-वैसे उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जायेगी. अब तक 18 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है.
करीब आधा दर्जन लोग फरार चल रहे हैं, जिनकी तलाश जारी है. अब तक 18 से ज्यादा उन संदिग्ध लोगों के बैंक एकाउंट को भी फ्रीज कर दिया गया है, जिनका बैंक ट्रांजेक्शन इस मामले में संदिग्ध पाया गया है. इन बैंक खातों में कितने रुपये जमा हैं, इसका आकलन किया जा रहा है. जब उनके पूछा गया कि क्या इसमें किसी बड़े राजनेता या आइएएस अधिकारी का भी नाम सामने आने की संभावना है, तो उन्होंने कहा कि जांच अभी चल रही है, ऐसे में फिलहाल कुछ कह नहीं सकते हैं.
जांच जैसे-जैसे बढ़ता जायेगा, वैसे-वैसे अन्य स्तर के आरोपितों के नाम सामने आते जायेंगे. अभी जांच मुख्य रूप से इस बिंदु पर ही केंद्रित है कि पैसे का गबन किन-किन लोगों ने मिल कर किया है. यह भी देखा जा रहा है कि इन रुपये से कौन-कौन से लोग लाभान्वित हुए थे. इस दौरान एडीजी (मुख्यालय) एसके सिंघल, एडीजी (सीआइडी) विनय कुमार, एएसपी सुशील कुमार समेत अन्य अधिकारी मौजूद थे.
प्रिया और अमित के खिलाफ लुक-ऑउट नोटिस जारी
डीजीपी ने बताया कि सृजन समिति के मुख्य कर्ता-धर्ता रजनी प्रिया और अमित कुमार के खिलाफ लुक-ऑउट नोटिस जारी कर दी गयी है, ताकि ये दोनों देश छोड़ कर कहीं बाहर नहीं भाग सकें. उनके पासपोर्ट को जब्त करने के लिए पटना स्थित क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय को अनुरोध कर दिया गया है. लुक-आउट नोटिस से संबंधित सभी औपचारिकताएं पूरी करने के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय और ब्यूरो ऑफ सिविल एविऐशन सिक्योरिटी से भी पत्राचार कर दिया गया है.
महेश मंडल के मौत की जांच के लिए बोर्ड गठित
डीजीपी ने कहा कि गिरफ्तार नाजिर महेश मंडल की मौत के सही कारणों की जांच के लिए डॉक्टरों के एक बोर्ड का गठन कर दिया गया है. मानवाधिकार आयोग के नियमों के अनुसार इसका गठन किया गया है. इसकी रिपोर्ट आने के बाद पूरी स्थित स्पष्ट हो जायेगी. जहां भी लापरवाही पायी जायेगी या जो दोषी पाये जायेंगे, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जायेगी. उन्होंने कहा कि गिरफ्तारी के समय उसकी बीमारी के बारे में जानकारी थी और उसे इसके मुताबिक सभी स्तर पर उचित इलाज और सुविधाएं लगातार मुहैया करायी गयीं. लेकिन भागलपुर के जेएलएमसीएच में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गयी.
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