भक्ति से मिलती है आंतरिक शांति और प्रभु की प्राप्ति : प्रभंजनानंद शरण

Updated at : 10 Mar 2026 3:46 PM (IST)
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भक्ति से मिलती है आंतरिक शांति और प्रभु की प्राप्ति : प्रभंजनानंद शरण

सामूहिक सुंदरकांड पाठ के साथ भगवान हनुमान की हुई पूजा

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लखमोहना में संगीतमय रामकथा से गूंजा भक्तिमय माहौल श्री सीताराम महायज्ञ सह हनुमत प्राण प्रतिष्ठा के अवसर पर आयोजित रामकथा फोटो कैप्शन- कथा सुनती महिलायें प्रतिनिधि, अकबरपुर श्री सीताराम महायज्ञ सह हनुमत प्राणप्रतिष्ठा के अवसर पर लखमोहना गांव के मैदान में आयोजित संगीतमय रामकथा में श्रीराम जय राम के भजनों से माहौल भक्तिमय बना रहा. कथा सुनने के लिए काफी संख्या में महिलाएं पहुंची थीं. इससे पहले कथा स्थल पर स्थापित भगवान हनुमान की पूजा की गयी और सामूहिक सुंदरकांड का पाठ किया गया. कथा का वाचन अयोध्या से पधारे स्वामी श्री प्रभंजनानंद शरण जी महाराज ने किया. उन्होंने कहा कि भक्ति हमारे जीवन में वैभव, ऐश्वर्य और संपत्ति तो नहीं देती, लेकिन आंतरिक शांति, प्रसन्नता और प्रभु से मिलाती है. माया में हमें सांसारिक वैभव, ऐश्वर्य और संपत्ति तो मिलती है, लेकिन जीवन अशांत रहता है और हृदय में सदैव उथल-पुथल मची रहती है. इसलिए व्यक्ति को माया का परित्याग कर भक्ति का आचरण करना चाहिए, जो चिर और सनातन है. उन्होंने कहा कि विनम्रता और सहनशीलता मानव जीवन का श्रेष्ठ आभूषण है. महान वह नहीं है जिसके जीवन में सम्मान और प्रतिष्ठा हो, बल्कि महान वह है जिसके जीवन में सहनशीलता हो. हमारा सुख इस बात पर निर्भर नहीं करता कि हमारे पास कितनी संपत्ति है, बल्कि इस बात पर निर्भर करता है कि हमारे जीवन में कितनी संतुष्टि है. स्वामी जी ने कहा कि समर्थ होने का अर्थ यह नहीं है कि आप दूसरों को कितना झुका सकते हैं, बल्कि यह है कि आप स्वयं कितना झुक सकते हैं. अभिमानी और अहंकारी व्यक्ति समाज में सदैव अपमानित होता है, जबकि विनम्र व्यक्ति को सदैव सम्मान मिलता है. उन्होंने धनुष यज्ञ प्रसंग का उल्लेख करते हुए कहा कि रामजी ने धनुष तोड़ा, लेकिन उसकी डोरी नहीं टूटी. इसका अर्थ है कि कठोर धनुष टूट गया, लेकिन विनम्र डोरी नहीं टूटी. विनम्र व्यक्ति को इंसान क्या, भगवान भी नहीं तोड़ते हैं. उन्होंने कहा कि जो संपत्ति प्रभु का विस्मरण करा दे, वह संपन्नता दुखदायी है. जो बाहर से तृप्त करती है, लेकिन भीतर अशांति और खालीपन छोड़ जाती है. कथा के माध्यम से उन्होंने लोगों को सदमार्ग पर चलने और प्रभु का स्मरण करने के लिए प्रेरित किया. मौके पर अध्यक्ष सीताराम सिंह, उदय सिंह, अनिल सिंह, सुनील सिंह, शेखर सिंह, रंजय सिंह, उमेश सिंह, संजीत कुमार, कुमार गौरव व सुजय सिंह मौजूद थे.

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