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चमकी बुखार को लेकर स्वास्थ्य विभाग अलर्ट

Updated at : 06 May 2024 11:19 PM (IST)
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चमकी बुखार को लेकर स्वास्थ्य विभाग अलर्ट

बचाव व सावधानियों को लेकर दिये गये निर्देश

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नवादा कार्यालय. चमकी बुखार को लेकर सदर अस्पताल को अलर्ट पर रखा गया है. इसको लेकर लोगों को जागरूक किया जा रहा है. चिकित्सकों ने बताया कि बच्चे को तीनों से चार बार खाना खिलाना चाहिए, नियमित अंतराल पर पानी पिलाना चाहिए. तेज धूप में बाहर जाने से रोकना चाहिए और सड़ा-गला मौसमी फल नहीं खाने देना चाहिए. इससे बच्चों को चमकी बुखार से लड़ने में मदद मिलेगी. गर्मी बढ़ने के साथ ही चमकी बुखार को लेकर स्वास्थ्य महकमा अलर्ट मोड पर है.

चमकी से निबटने के लिए बनाये गये वार्ड:

सोमवार को जिला स्वास्थ्य विभाग के डीपीएम ने चमकी बुखार यानी एइएस से निबटने की तैयारियों के बारे में जानकारी दी. उन्होंने कहा कि नवादा सदर अस्पताल में चमकी बुखार के लिए 13 बडों का एक अलग वार्ड बनाया गया है. और जिले के प्रत्येक पीएचसी मे पांच बेड़ों का वार्ड बनाया गया है. चमकी बुखार को लेकर जिला स्वास्थ्य समिति अलर्ट मोड पर है. बुखार को लेकर सारी तैयारी कर ली गयी है. दवाईयों की पूरी स्टॉक के रखी गयी है. डॉक्टर और एंबुलेंस को भी अलर्ट मोड पर रखा गया है. चमकी बुखार से निबटने के लिए स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह से तैयार है. विभाग के द्वारा दिये गये जानकारी के अनुसार इस वर्ष अभी तक कोई भी चमकी बुखार के मरीज नहीं मिले हैं.

18 प्रकार की दवाईयां उपलब्ध:

स्वास्थ्य विभाग ने बताया कि जिले के सभी हेल्थ वर्कर, आंगनबाड़ी सेविका-सहायिका व एनजीओ कर्मियों को एडवांस प्रशिक्षण दिया जा रहा है. साथ ही सभी स्वास्थ्य केन्द्रों पर चमकी बुखार के इलाज में प्रयुक्त होनेवाली 18 प्रकार की दवाईयां भी उपलब्ध हैं. चमकी बुखार से ग्रसित बच्चों के लिए प्रत्येक पीएचसी पर एडीफाइड रूम में पांच -पांच बेड मौजूद है.

स्वास्थ्य को लेकर रहे सचेत

जिले में भीषण गर्मी और उष्ण लहर से जन जीवन अस्त- व्यस्त है. इस मौसम में लू प्रभावित मरीजों की संख्या में इजाफा होता है. इधर बच्चों में एक्यूट इंसेफलाइटिस सिंड्रोम (एइएस) के लक्षण भी दिखने लगते हैं. यह बुखार आम बोलचाल की भाषा में यह चमकी बुखार के नाम से प्रचलित है. गर्मी के प्रभाव में आकर बच्चों के शरीर में ऐंठन होने लगता है. बच्चे सुस्त हो जाते है. बुखार चढ़ जाता है और मानसिक स्थिति भी बिगड़ने लगती है. बुखार बढ़ने पर बच्चे बेश भी हो जाते हैं और जान भी चली जाती है. आम तौर पर यह में बीमारी उत्तर बिहार के मुजफ्फरपुर में अधिक देखने को मिलती है. हालांकि हाल के वर्षों में नवादा जिले में चमकी बुखार का एक भी मामला सामने नहीं आया है. लेकिन जिला स्वास्थ्य विभाग बढ़ी गर्मी में चमकी बुखार को लेकर खास नजर बनाये हुए हैं.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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