जेई और चमकी बुखार के खिलाफ जिले में सतर्क हुआ स्वास्थ्य विभाग
Updated at : 12 Jun 2019 7:07 AM (IST)
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नवादा नगर : राज्य के विभिन्न हिस्सों में फैले एइएस (एक्यूट इन्सेफलाईटिस सिंड्रोम) एवं जेई (जापानी इन्सेफलाईटिस) से पीड़ितों की बढ़ोतरी के बाद जिला में इसको लेकर जागरूकता दिख रही है. स्वास्थ्य विभाग इसे गंभीरता से लेते हुए जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण विभाग प्रभावित क्षेत्रों में रोग के प्रति जागरूकता बढ़ाने पर जोर दे […]
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नवादा नगर : राज्य के विभिन्न हिस्सों में फैले एइएस (एक्यूट इन्सेफलाईटिस सिंड्रोम) एवं जेई (जापानी इन्सेफलाईटिस) से पीड़ितों की बढ़ोतरी के बाद जिला में इसको लेकर जागरूकता दिख रही है. स्वास्थ्य विभाग इसे गंभीरता से लेते हुए जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण विभाग प्रभावित क्षेत्रों में रोग के प्रति जागरूकता बढ़ाने पर जोर दे रही है. जिले के स्वास्थ्य केंद्रों में सुविधाएं उपलब्ध करायी गयी है.
सिविल सर्जन डॉ श्रीनाथ प्रसाद ने बताया कि राज्य के अन्य जिलों में एइएस व जेई को लेकर जिले में भी अलर्ट जारी किया गया है. इसके लिए जिला वेक्टर बोर्न जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ उमेश चंद्र की निगरानी में कोर कमेटी का गठन किया गया है. साथ ही चिकित्सकों को एईएस/ जेई पर प्रशिक्षण प्रदान कर हर स्थिति में मुस्तैद रहने के लिए निर्देशित भी किया गया है. सामुदायिक स्तर पर रोग के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए आशा एवं एएनएम को भी जिम्मेदारी दी गयी है.
जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ उमेश ने बताया कि अभी तक इस साल जिले में जेई या एईएस के एक भी केस सामने नहीं आया है. गया में यह बीमारी बरसात के मौसम में ज्यादा होता है, इसके बावजूद इस गंभीर रोग से निबटने की तैयारी पूरी कर ली गयी है. इसके लिए जिले के सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर किट उपलब्ध करा दिया गया है. साथ ही सामुदायिक स्तर पर रोग के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए आशा एवं एएनएम को भी जिम्मेदारी दी गयी है.
कुछ उपायों के माध्यम से बच्चे को इस रोग से बचाया जा सकता है. इसके लिए बच्चे को तेज धूप से बचाएं, बच्चे को दिन में दो बार नहाएं, गरमी बढ़ने पर बच्चे को ओआरएस या नींबू का पानी दें, रात में बच्चे को भरपेट खाना खिलाकर ही सुलाएं, तेज बुखार होने पर गीले कपडे से शरीर को पोछें, बिना चिकित्सकीय सलाह के बुखार की दवा बच्चे को ना दें, बच्चे की बेहोशी की हालत में उसे ओआरएस का घोल दें एवं छायादार जगह लिटायें एवं दांत चढ़ जाने की स्थिति में बच्चे को दाएँ या बाएं करवट लिटाकर अस्पताल ले जाएं. इसके अलावा तेज रौशनी से मरीज को बचाने के लिए आंख पर पट्टी का इस्तेमाल करें एवं यदि बच्चा दिन में लीची का सेवन किया हो तो उसे रात में भरपेट खाना जरुर खिलाएं.
क्या है मस्तिष्क ज्वर
एइएस को मस्तिष्क ज्वर भी कहा जाता है. समय से इलाज कराने पर यह ठीक हो सकता है. अत्यधिक गर्मी की शुरुआत होने से एइएस से ग्रसित बच्चों की संख्या में बढ़ोतरी शुरू होती है, जो बारिश की शुरुआत पर खत्म हो जाती है. जबकि जेई की शुरुआत बारिश के बाद शुरू होती है एवं ठंड की शुरुआत होते ही ख़त्म हो जाती है. इनके लक्षणों को जानकर इसका सटीक उपचार संभव है
क्या है मस्तिष्क ज्वर
एइएस को मस्तिष्क ज्वर भी कहा जाता है. समय से इलाज कराने पर यह ठीक हो सकता है. अत्यधिक गर्मी की शुरुआत होने से एइएस से ग्रसित बच्चों की संख्या में बढ़ोतरी शुरू होती है, जो बारिश की शुरुआत पर खत्म हो जाती है. जबकि जेई की शुरुआत बारिश के बाद शुरू होती है एवं ठंड की शुरुआत होते ही ख़त्म हो जाती है. इनके लक्षणों को जानकर इसका सटीक उपचार संभव है
तेज बुखार आना
चमकी व पूरे शरीर या किसी खास अंग में ऐंठन होना
दांत का चढ़ जाना
बच्चे का सुस्त होना या बेहोश हो जाना
शरीर में हरकत या सेंसेशन का खत्म हो जाना
ये करने से बचें
बच्चे को मस्तिष्क ज्वर से बचाने के लिए कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है
बच्चों को खाली पेट लीची नहीं खिलाएं.
अधपके व कच्चे लीची बच्चों को खाने नहीं दें.
बच्चों को गर्म कपड़े या कंबल में नहीं लिटाएं.
बेहोशी की हालत में बच्चे के मुंह में बाहर से कुछ भी नहीं दें.
बच्चे की गर्दन झुका हुआ नहीं रहने दें.
आपातकाल की स्थिति में निःशुल्क एंबुलेंस के लिए टोल फ्री नंबर 102 पर करें संपर्क.
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