बिहार के इस मंदिर में 9 दिनों तक महिलाओं के प्रवेश पर रहता है रोक, जानें इसके पीछे की वजह...
Published by : Abhinandan Pandey Updated At : 06 Oct 2024 9:12 AM
Navratri 2024: बिहार के नालंदा जिला के मां आशापुरी मंदिर में नवरात्र के 9 दिन महिलाओं के प्रवेश पर रोक लगा राहत है. महिलाओं के मंदिर कैंपस में भी प्रवेश करने की इजाजत नहीं दी जाती है. साथ ही पुरुष भी इन 9 दिनों तक मंदिर के गर्भगृह में नहीं जा सकते हैं.
Navratri 2024: बिहार के नालंदा जिला के मां आशापुरी मंदिर में नवरात्र के 9 दिन महिलाओं के प्रवेश पर रोक लगा राहत है. महिलाओं के मंदिर कैंपस में भी प्रवेश करने की इजाजत नहीं दी जाती है. साथ ही पुरुष भी इन 9 दिनों तक मंदिर के गर्भगृह में नहीं जा सकते हैं. मां आशापुरी मंदिर की यह परंपरा सदियों पुरानी है. मां आशापुरी मंदिर गिरियक प्रखंड के घोसरावां गाँव में है.
मंदिर कैंपस और गर्भगृह में महिलाओं-पुरुषों का प्रवेश रोकने के पीछे की मुख्य वजह तांत्रिक क्रियाओं का होना है. बता दें कि नवरात्र के दौरान मंदिर में विशेष तंत्र-मंत्र की क्रियाएं की जाती हैं. जिससे बुरी शक्तियां सक्रिय हो जाती हैं. ऐसी आशंका जताई जाती है कि इस बीच अगर महिलाएं मौजूद रहेंगी तो बुरी शक्तियां उनके शरीर में प्रवेश कर सकती हैं. इस कारण पूजा विफल हो जाएगी.
बौद्ध भी यहां आकर तंत्र-मंत्र की करते थे साधना
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह परंपरा 9वीं शताब्दी से ही चली आ रही है. नौवीं शताब्दी में यह विश्व का सबसे प्रचलित बौद्ध साधना केंद्र हुआ करता था. बौद्ध यहां आकर तंत्र-मंत्र की साधना किया करते थे. दूर-दूर से तांत्रिक भी आते थे और नवरात्र के दौरान विशेष पूजा करते थे.
विशेष हवन के बाद महिलाओं को मिलता है प्रवेश
जानकारी के मुताबिक नवरात्रि के मौके पर मां आशापुरी मंदिर के गर्भ गृह में तीन पुजारियों का ही प्रवेश रहता है. सुबह और शाम को 4 से 5 घंटे तक चंडी पाठ होता है, जिसमें विशेष रूप से तांत्रिक विधि भी अपनाई जाती है. नवरात्रि के आखिरी दिन विशेष हवन के बाद महिलाओं को मंदिर में प्रवेश की अनुमति दे दी जाती है. यही बात पुरुषों के लिए भी लागू होती है. हालांकि पुरुष मंदिर कैंपस में आ सकते हैं.
संजय दत्त के पिता भी यहां लगा चुके हैं हाजिरी
अभिनेता संजय दत्त के पिता सुनील दत्त के अलावा कई बॉलीवुड हस्तियां भी मां के दरबार में हाजिरी लगा चुके हैं. वहीं बिहार के कई राज्यपाल, मुख्यमंत्री के साथ ही कई पॉलिटिशियन भी दरबार में पहुंच चुके हैं. मंदिर में लगे शिलापट्ट के आशापुरी महारानी की मूर्ति ईसा पूर्व 300 की है. मध्य प्रदेश के राजा यशोवर्मन ने आठवीं शताब्दी में यशोवर्मपुर नाम के इस इलाके को बसाया था.
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अभिनंदन पांडेय पिछले दो वर्षों से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत प्रिंट मीडिया से की और दैनिक जागरण, भोपाल में काम किया. वर्तमान में वह प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम के हिस्सा हैं. राजनीति, खेल और किस्से-कहानियों में उनकी खास रुचि है. आसान भाषा में खबरों को लोगों तक पहुंचाना और ट्रेंडिंग मुद्दों को समझना उन्हें पसंद है. अभिनंदन ने पत्रकारिता की पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल से की. पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने पत्रकारिता की बारीकियों को समझना शुरू कर दिया था. खबरों को सही तरीके से लोगों तक पहुंचाने की सोच ने उन्हें इस क्षेत्र की ओर आकर्षित किया. दैनिक जागरण में रिपोर्टिंग के दौरान उन्होंने भोपाल में बॉलीवुड के कई बड़े कलाकारों और चर्चित हस्तियों के इंटरव्यू किए. यह अनुभव उनके करियर के लिए काफी अहम रहा. इसके बाद उन्होंने प्रभात खबर डिजिटल में इंटर्नशिप की, जहां उन्होंने डिजिटल पत्रकारिता की वास्तविक दुनिया को करीब से समझा. बहुत कम समय में उन्होंने रियल टाइम न्यूज लिखना शुरू कर दिया. इस दौरान उन्होंने सीखा कि तेजी के साथ-साथ खबर की सटीकता भी बेहद जरूरी होती है. फिलहाल वह प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम के साथ काम कर रहे हैं. बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान उन्होंने कई बड़ी खबरों को रियल टाइम में कवर किया, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और वीडियो कंटेंट भी तैयार किए. उनकी कोशिश हमेशा यही रहती है कि पाठकों और दर्शकों तक सबसे पहले, सही और भरोसेमंद खबर पहुंचे. पत्रकारिता में उनका लक्ष्य लगातार सीखते रहना, खुद को बेहतर बनाना और एक विश्वसनीय पत्रकार के रूप में अपनी पहचान मजबूत करना है.
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