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बेला औद्योगिक क्षेत्र फेज-2: सुरक्षा चौकी पर कब्जा, सुरक्षा पर सवाल

Updated at : 18 Jun 2025 7:01 PM (IST)
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बेला औद्योगिक क्षेत्र फेज-2: सुरक्षा चौकी पर कब्जा, सुरक्षा पर सवाल

बेला औद्योगिक क्षेत्र फेज-2: सुरक्षा चौकी पर कब्जा, सुरक्षा पर सवाल

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फोटो-दीपक

औद्योगिक क्षेत्र फेज-2 का अतिक्रमित गार्ड रूम

वरीय संवाददाता, मुजफ्फरपुर

बेला औद्योगिक क्षेत्र फेज-2 के मुख्य द्वार पर बना गार्ड रूम अतिक्रमण की गिरफ्त में है. मुख्य गेट के भीतर बना गार्ड रूम व उससे सटा बरामदा, जो औद्योगिक इकाइयों की निगरानी व सुरक्षा के लिए बनाया गया था, छह वर्षों से वीरान है. यह भवन अब पूरी तरह से स्थानीय दुकानदारों के कब्जे में है. उन लोगों ने अपने सामान रखने का गोदाम इसे बना डाला है. इतना ही नहीं, भवन के बाहर अवैध रूप से बांस की चचरी का फाटक भी लगा दिया गया है. जिससे स्पष्ट है कि यहां किसी भी प्रकार की आधिकारिक गतिविधि नहीं होती है. यह स्थिति औद्योगिक क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है. गार्ड रूम का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि क्षेत्र में आने-जाने वाले वाहनों व व्यक्तियों पर नजर रखी जा सके, ताकि किसी भी अप्रिय घटना को रोका जा सके. लेकिन, जब सुरक्षा चौकी ही अतिक्रमण का शिकार हो जाए और वहां कोई गार्ड मौजूद न हो, तो औद्योगिक इकाइयों की सुरक्षा भगवान भरोसे ही है.स्थानीय उद्यमियों का कहना है कि गार्ड की अनुपस्थिति के कारण क्षेत्र में चोरी, सेंधमारी व अन्य आपराधिक घटनाओं का खतरा बढ़ गया है. असामाजिक तत्त्व बेरोकटोक क्षेत्र में प्रवेश करते हैं.

70 हजार जुर्माना पर तार अब भी लटके

फेज-2 के पास बड़ा हादसा बीते एक साल से टल रहा है, लेकिन बिजली विभाग की लापरवाही इस खतरे को लगातार बढ़ा रहा है. लगभग एक वर्ष पूर्व, एक तेज रफ्तार ट्रक ने यहां बिजली पोल को टक्कर मार कर गिरा दिया था.इस घटना के बाद, बिजली विभाग ने ट्रक मालिक से क्षतिपूर्ति के रूप में 70 हजार रुपये का भारी जुर्माना भी वसूला. लेकिन, जुर्माना वसूलने के बावजूद, बिजली विभाग ने आज तक नया पोल स्थापित नहीं किया है. इस गंभीर लापरवाही का नतीजा यह है कि दुर्घटनाग्रस्त पोल पर लटकने वाले बिजली के तार अब भी उसी तरह पेड़ों पर झूल रहे हैं. ये तार न केवल हवा में लहराते हुए एक खतरनाक स्थिति उत्पन्न कर रहे हैं, बल्कि किसी भी समय बड़े हादसे का कारण हो सकते हैं. बारिश के मौसम में या तेज हवा चलने पर इन तारों के टूटने, आपस में टकराने या नीचे गिरने का खतरा कई गुना बढ़ जाता है.

नया पोल लगाने में देरी क्यों

यह समझ से परे है कि जब बिजली विभाग ने क्षतिपूर्ति के लिए इतनी बड़ी राशि वसूल ली है, तो एक नया पोल लगाने व तारों को सुरक्षित करने में इतनी देरी क्यों कर रहा है. क्या विभाग किसी बड़े जान-माल के नुकसान का इंतजार कर रहा है? औद्योगिक क्षेत्र में बिजली की आपूर्ति अत्यंत महत्त्वपूर्ण होती है, और इस प्रकार की लापरवाही न केवल सुरक्षा को खतरे में डालती है, बल्कि औद्योगिक गतिविधियों को भी बाधित कर सकती है. नये पोल को लगाना और तारों को सुरक्षित तरीके से व्यवस्थित करना बेहद जरूरी है, ताकि किसी अनहोनी से बचा जा सके.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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