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बेला औद्योगिक क्षेत्र फेज 2: जानलेवा गड्ढा और यातायात का दंश

Updated at : 16 Jun 2025 8:13 PM (IST)
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बेला औद्योगिक क्षेत्र फेज 2: जानलेवा गड्ढा और यातायात का दंश

Deadly potholes and traffic jams

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वरीय संवाददाता, मुजफ्फरपुर

बेला औद्योगिक क्षेत्र, जो उत्तर बिहार के औद्योगिक विकास की धुरी माना जाता है. यहां बदहाल सड़कों और जानलेवा गड्ढों के कारण दुर्घटनाओं का अड्डा बनता जा रहा है. विशेष रूप से फेज-1 और फेज-2 में प्रतिदिन 5,000 से अधिक वाहनों का आवागमन होता है, जिससे यातायात का दबाव अत्यधिक रहता है. यह स्थिति तब और भयावह हो जाती है जब हम फेज-2 के मुख्य गेट के सामने मौजूद तीन से चार फीट गहरे एक खतरनाक गड्ढे की बात करते हैं. यह गड्ढा, जो खुले मुंह मौत को दावत दे रहा है, आए दिन छोटी-बड़ी दुर्घटनाओं का कारण बन रहा है.

ट्रकों और कंटेनरों के बीच लोगों का आवागमन

सड़क के दोनों ओर स्थानीय बाजार होने के कारण सुबह से शाम तक लोगों की भारी भीड़ रहती है. पैदल चलने वाले, साइकिल सवार, छोटे-बड़े वाहन – सभी एक ही संकरी सड़क पर बेतरतीब ढंग से चलते हैं. इसी भीड़-भाड़ के बीच औद्योगिक क्षेत्र में प्रवेश करने वाले भारी वाहनों, जैसे ट्रकों और कंटेनरों का निरंतर आवागमन होता है. भारी वाहनों की तेज रफ्तार और सड़क पर मौजूद गड्ढा मिलकर एक जानलेवा स्थिति उत्पन्न करते है. स्थानीय लोगों का कहना है कि लगभग हर दिन कोई न कोई दुर्घटना होती है. जिसमें कई बार लोग गंभीर रूप से घायल हो जाते हैं.

संघ की मांग जल्द सड़का हो निर्माण

इन दुर्घटनाओं में कई बार राहगीर या दुपहिया वाहन चालक भारी वाहनों की चपेट में आने से बाल-बाल बचते हैं. औद्योगिक क्षेत्र के कर्मचारी भी इस बात से चिंतित हैं कि उनकी जान हमेशा जोखिम में रहती है. प्रशासन की उदासीनता इस समस्या को और गंभीर बना रही है. उत्तर बिहार उद्यमी संघ के अनुसार बेला औद्योगिक क्षेत्र की सड़कों की मरम्मत और रखरखाव के लिए तत्काल कदम उठाने की आवश्यकता है. ताकि यहां के लोगों और उद्यमियों को एक सुरक्षित वातावरण मिल सके.

बेला के उद्यमी बिजली कनेक्शन शुल्क से त्रस्त: संशोधन की मांग

एक ओर बेला औद्योगिक क्षेत्र की आधारभूत संरचना बदहाली का शिकार है, वहीं दूसरी ओर यहां के उद्यमी बिजली आपूर्ति से जुड़े नियमों से भी खासे परेशान हैं. उत्तर बिहार उद्यमी संघ ने सरकार से बिजली कनेक्शन से संबंधित नियमों में संशोधन की पुरजोर मांग की है. उद्यमियों का कहना है कि 100 केवी का एक एचटी (हाई टेंशन) बिजली कनेक्शन लेने का सारा खर्च उन्हें ही वहन करना पड़ता है, जो लगभग 15 लाख रुपये तक पहुंच जाता है. यह राशि छोटे और मध्यम स्तर के उद्यमियों के लिए एक बड़ा वित्तीय बोझ है. समस्या यहीं समाप्त नहीं होती. कई फैक्ट्रियां मौसमी होती हैं, जिनका उत्पादन वर्ष के कुछ निश्चित महीनों में ही होता है. ऐसे में, उत्पादन हो या न हो, उद्यमियों को 100 केवी के कनेक्शन का एक निश्चित और मोटा मासिक शुल्क देना पड़ता है. यह शुल्क उद्यमियों की कमर तोड़ रहा है, खासकर उन लोगों की जो अभी अपने व्यवसाय को स्थापित करने की कोशिश कर रहे हैं. उद्यमी संघ का तर्क है कि यह नियम अव्यवहारिक और अन्यायपूर्ण है. उन्होंने मांग की है कि बिजली शुल्क को उत्पादन या उपभोग के आधार पर निर्धारित किया जाए, ताकि मौसमी फैक्ट्रियों को अनावश्यक बोझ से बचाया जा सके.

जानलेवा बिजली के तार और घने जंगल झाड़ से खतरा

बेला फेज टू औद्योगिक क्षेत्र के मुख्य द्वार की स्थिति ही बदहाल है. मेन गेट से प्रवेश करते ही सड़क के दोनों ओर घने पेड़ और जंगल के बीच जमीन से महज 4 फीट की ऊंचाई पर लटकते एलटी (लो टेंशन) बिजली के तार जानलेवा साबित हो सकती हैं. यह स्थिति राहगीरों और वाहन चालकों के लिए गंभीर खतरा बनी हुई है. स्थानीय निवासियों और उद्यमियों ने बताया कि कई बार बिजली विभाग और बियाडा को इसकी शिकायत की गयी है. लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है. इन लटकते तारों से कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है. खासकर बारिश के दिनों में यह खतरा और बढ़ जाता है. प्रशासन को इस ओर तत्काल ध्यान देकर जंगल-झाड़ की कटाई और बिजली के तारों को दुरुस्त कराने की मांग की गई है. ताकि किसी अनहोनी से बचा जा सके.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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