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यूरोप व अरब में लीची सिटी के शहद की काफी डिमांड

Updated at : 28 Mar 2019 7:07 AM (IST)
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यूरोप व अरब में लीची सिटी के शहद की काफी डिमांड

मुजफ्फरपुर : देश-विदेश में लीची सिटी के रूप में मशहूर मुजफ्फरपुर के शहद का डिमांड यूरोप व सऊदी अरब में है. यहां सबसे अधिक लीची के मंजर से शहद का उत्पादन होता है. गोल्डन कलर व कम वसा युक्त होने के कारण विदेश में ब्रेड के साथ मक्खन की जगह इसका प्रयोग किया जाता है. […]

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मुजफ्फरपुर : देश-विदेश में लीची सिटी के रूप में मशहूर मुजफ्फरपुर के शहद का डिमांड यूरोप व सऊदी अरब में है. यहां सबसे अधिक लीची के मंजर से शहद का उत्पादन होता है. गोल्डन कलर व कम वसा युक्त होने के कारण विदेश में ब्रेड के साथ मक्खन की जगह इसका प्रयोग किया जाता है. जिले में करीब 10 हजार मधुमक्खी पालक शहद उत्पादन से जुड़े हैं. लीची से शहद निकालने का समय 15 से 20 दिन का होता है. इतने ही दिनों में दो बार शहद निकल जाता है.

मुख्य रूप से मार्च माह में ही लीची से शहद का उत्पादन मधुमक्खी पालक करते हैं. इसके बाद सरसों, यूकेलिप्टस, करंज, सरबूजा, जामुन से शहद तैयार होता है. लीची से 30 हजार टन शहद तैयार होता है. जिले में हर साल एक हजार टन से अधिक शहद तैयार होता है. प्रोसेसिंग यूनिट, रिसर्च सेंटर, टेस्ट लैब व भंडारण की व्यवस्था नहीं है. यहां के मधुमक्खी पालक दिल्ली, पंजाब व राजस्थान स्थित विभिन्न कंपनियों को कच्चा माल देते हैं, प्रोसेसिंग के बाद पैकिंग कर विदेश निर्यात किया जाता है. मीनापुर, बोचहां, कांटी, मुशहरी, कुढ़नी व गायघाट में मधुमक्खी पालन होता है.
50-70 किलो शहद बेचने की मजबूरी शहद से कई बीमारियों की अचूक दवा बनायी जाती है. लेकिन इसके उत्पादन को बढ़ावा देने लिए ठोस प्लान नहीं बनाया जा रहा है.
यूं तो मधुमक्खी पालन कर शहद का उत्पादन पूरे सालों भर होता है, लेकिन सूर्यमुखी, सरसों, आम एवं लीची के समय उत्पादित शहद की बाजार में खास डिमांड रहती है. इसका उत्पादन करने के लिए विभाग की ओर से सब्सिडी के तौर पर ऋण तो उपलब्ध करायी जाती है.
लेकिन शहद की खरीद-बिक्री एवं भंडारण की ठोस व्यवस्था नहीं रहने से मधुमक्खी पालन से जुड़े लोगों को औने-पौने कीमत पर शहद बाजार में मजबूरन बेचना पड़ रहा है. इससे उत्पादन का लाभ मधुमक्खी पालकों को नहीं, बल्कि बिचौलियों को हो रहा है. किसान से 70-80 रुपये किलो की दर से शहद खरीदते हैं और इसे दोगुने दाम पर बेचते हैं. अधिकांश व्यापारी दिल्ली व पंजाब के हैं. सूबे से शहद आयात की सुविधा नहीं होने से दूसरे प्रदेश के कारोबारी पर मधुपालक आश्रित हैं.
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