संभल जाएं ! सबेरे छा रहा स्मॉग आपकी सेहत के लिए खतरनाक
Updated at : 23 Oct 2018 6:05 AM (IST)
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मुजफ्फरपुर : पिछले दो-तीन दिनों से जब आप सुबह में जब आपकी आंखें खुलती होंगी तो बाहर कोहरे जैसा दृश्य दिखता होगा. दरअसल यह बादलों की परत जैसे दिखने वाले धुएं व धूल-कणों से बना स्मॉग है, जो वातावरण में धूप की गर्मी आने तक मौजूद रहता है. यह हवा के प्रदूषित हो जाने का […]
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मुजफ्फरपुर : पिछले दो-तीन दिनों से जब आप सुबह में जब आपकी आंखें खुलती होंगी तो बाहर कोहरे जैसा दृश्य दिखता होगा. दरअसल यह बादलों की परत जैसे दिखने वाले धुएं व धूल-कणों से बना स्मॉग है, जो वातावरण में धूप की गर्मी आने तक मौजूद रहता है. यह हवा के प्रदूषित हो जाने का संकेत है और यह आपके लिए काफी खतरनाक है.
खासकर सुबह टहलने वालों के लिए यह काफी खतरनाक है. कोहरे जैसे ओस की बूंद लिये स्मॉग सांसों के जरिये फेफड़े में पहुंच रहा है. हालांकि शहर में सोमवार को वायु प्रदूषण का लेवल औसत रहा. समाहरणालय में लगे एयर पॉल्यूशन मॉनीटर में सुबह में 110, तो दोपहर में 80 पीएम 2.5 पार्टिकल्स रिकॉर्ड किया गया. दोपहर से लेकर रात तक वातावरण में गर्मी व हवाओं का दबाव होने के कारण स्मॉग नहीं दिखा.
मौसम बदलने से बढ़ रहा स्मॉग
मौसम में बदलाव के कारण सुबह में स्मॉग ज्यादा दिख रहा है. विशेषज्ञ बताते हैं कि तापमान में गिरावट से वायु का घनत्व बढ़ने व हवा नहीं चलने के कारण धूल व कार्बन के कण वातावरण की नमी के बीच उलझ कर वायुमंडल के निचले स्तर पर स्थिर हो रहे हैं. रात गहराने के बाद नमी जितनी बढ़ती है, ये धूल-कण उतने संघनित होते हैं. जबतक वातावरण में सूरज की गर्मी नहीं आती, धूलकण का यह स्मॉग ऊपर नहीं उठ पाता. यह वातावरण में हमारे आसपास ही मौजूद रहता है.
वातावरण में सल्फर डाईआक्साइड व नाइट्रोजन आक्साइड के साथ धूलकणों की मौजूदगी, स्मॉग की वजह बनती है. वाहनों के धुएं से ये दोनों गैस निकलती है. तापमान गिरने ये गैस ऊपर नहीं उठ पाती है. धूलकणों के साथ मिल कर यह कोहरे जैसा धुंध बनाता है. यह हमलोगों के लिए ज्यादा खतरनाक है.
डॉ डीपी राय, पूर्व प्रोफेसर, रसायन विभाग
स्मॉग के प्रभाव में सबसे अधिक श्वसन नली व फेफड़े आते हैं. जब हम सांस लेते हैं, तो हमारे शरीर के अंदर धूलकण व विषैली गैस भी जाती है. इससे संक्रमण का अधिक खतरा होता है. इससे दमा व सीओपीडी के मरीजों की परेशानी बढ़ जाती है. दमा का अटैक भी आ सकता है. कुछ लोगों में एलर्जी की समस्या भी आती है.
डॉ विजय कुमार, सांस व फेफड़ा रोग विशेषज्ञ
मुजफ्फरपुर. अगर आपके बच्चे को हल्का जुकाम और रात में खांसी परेशान करती है, तो इसे हल्के में न लें. तुरंत डॉक्टर के पास ले जाएं. संभव हो कि यह ब्रोंकोलाइटिस का लक्षण हो. सोमवार को एसकेएमसीएच की ओपीडी में आये 50 फीसदी बच्चे ब्रोंकोलाइटिस के शिकार थे. शिशु रोग विभागाध्यक्ष डॉ जीएस सहनी ने बताया कि इस तरह के लक्षण मिले, तो तुरंत डॉक्टर से दिखाएं. दो तीन दिनों में इलाज के बाद बच्चे ठीक हो जाते है. परेशानी बढ़ने पर बच्चे का पांजर मारने लगता है. मौसम में गिरवाट के कारण दो तीन हफ्ते तक इस बीमारी का असर रहेगा. अधीक्षक डॉ सुनील शाही ने बताया कि तापमान में बदलाव से मौसमी बीमारियों का प्रकोप बढ़ गया है.
बैक्टीरिया जनित बीमारियां हो रही हैं. बीमार होने वालों में बच्चों की संख्या अधिक है. खासकर पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चे सर्दी, खांसी, बुखार व उल्टी के साथ ही डायरिया और मच्छरजनित रोगों की चपेट में आ रहे हैं. अस्पताल प्रशासन ने मेडिसिन व शिशु रोग विभाग को अलर्ट कर दिया गया है. हालांकि अभी मौसमी बीमारी से भर्ती होने अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ सुनील शाही ने बताया कि वाले मरीजों की संख्या कम है.
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