मुंगेर के आन-बान-शान का प्रतिक किला पर मंडरा रहा संकट, ध्वस्त हो रहा दक्षिणी द्वार

Updated at : 20 May 2025 6:17 PM (IST)
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मुंगेर के आन-बान-शान का प्रतिक किला पर मंडरा रहा संकट, ध्वस्त हो रहा दक्षिणी द्वार

पीरनाफा शाह मजार के समीप उत्तरी द्वार जबकि तीसरा रास्ता पुरानी पुलिस लाइन की तरफ दक्षिणी द्वार है.

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– पुरातात्विक धरोहरों की अखंडता को बनाए रखने में प्रशासन एवं जनप्रतिनिधि उदासीन

– टूट-टूट कर गिर रहा किला के दक्षिणी द्वार की सिलबटे, बड़े हादसों का बन सकता है गवाह

मुंगेर

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बिहार के महत्वपूर्ण धरोहरों में एक है मुंगेर का ऐतिहासिक किला. सदियों से मुंगेर के उत्थान-पतन का साक्षी यह किला मुंगेर के आन-बान-शान का प्रतिक है. इस किला की तस्वीर मात्र देख लेने के बाद मुंगेर का नाम खुद-ब-खुद जेहन में आ जाता है. किंतु द्वापरयुग में बना यह किला कलयुग में अपने अस्तित्व को लेकर संघर्ष कर रहा है. किला का दक्षिणी द्वार अब टूट-टूट कर गिरने लगा है. ऐसे में इस ऐतिहासिक धरोहर को अधिक दिनों तक नजरअंदाज करना एक बड़ी भूल हो सकती है.

ध्वस्त होने के कगार पर है किला का दक्षिणी द्वार

मुंगेर का ऐतिहासिक किला रखरखाव के अभाव में धीरे-धीरे ध्वस्त हो रहा है. किला की दीवार भी कई स्थानों पर ध्वस्त हो चुकी है. कष्टहरणी घाट की तरफ किला की दीवार की तोड़ कर लोगों ने अतिक्रमण कर घर बना लिया है. मुंगेर किला में तीन द्वार हैं. एक रास्ता पुरब की ओर मुंगेर बाजार की ओर निकलती है, जिसे मुख्य द्वार कहा जाता है. वहीं एक द्वार पीरनाफा शाह मजार के समीप उत्तरी द्वार जबकि तीसरा रास्ता पुरानी पुलिस लाइन की तरफ दक्षिणी द्वार है. बताया जाता है कि मुंगेर में गंगा पुल बनने के बाद दक्षिणी द्वार होकर छोटे-बड़े वाहन इसी द्वार से होकर श्रीकृष्ण सेतु और अन्य जगहों के लिए गुजरने लगी है. लेकिन दक्षिणी द्वार का चौड़ाई व लंबाई दोनों काम होने और बड़े व्यवासयिक वाहनों के प्रवेश होने से धीरे-धीरे यह क्षतिग्रस्त होने लगा है. जिसके कारण किला का दक्षिणी द्यार ध्वस्त होने के कगार पर पहुंच गया है. इतना ही नहीं अब यह हादसों को आमंत्रण दे रहा है. जिस पत्थर के सिलबट पर किला का दक्षिणी द्वार टिकी हुई है वह टूट-टूट कर गिर रहा है.

ऐतिहासिक धरोहर है मुंगेर का किला

मुंगेर का किला ऐतिहासिक धरोहर है. इस किला का निर्माण महाराजा जरासंध ने द्वापर युग में ही करवाया था. लंबे समय के बाद यह किला काफी जीर्णशीर्ण हो गया था. जिसके बाद मीर कासिम ने जब मुंगेर में अपनी राजधानी बनायी तो जीर्ण-शीर्ण पड़े इस किले का जीर्णोद्धार किया और इसे पहले से और भी आकर्षक बना दिया. जिसके बाद यह किला लंबे वक्त से मुंगेर की शान बनी है. स्थानीय लोग इसे मीरकासिम की किला भी कहते हैं. बताया जाता है कि वर्ष 1934 में आयी विनाशकारी भूकंप ने किला को भारी नुकसान किया था. बाद में इसकी मरम्मति भी करायी गई. लेकिन एक बार फिर किला पर संकट मंडरा रहा है.

कहते हैं विधायक

मुंगेर के विधायक प्रणव कुमार ने कहा कि किला एवं इसके द्वार व दिवार को संरक्षित करने के लिए पुरातत्व विभाग से अनुरोध किया जायेगा. इसे लेकर वे जल्द ही राज्य के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मिलेंगे.

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