अब प्रतिदिन अधिकतम दो कक्षाओं का भी अतिथि शिक्षकों को होगा भुगतान

Published by : RANA GAURI SHAN Updated At : 06 Feb 2026 7:17 PM

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मुंगेर विश्वविद्यालय के सिंडिकेट सभागार में शुक्रवार को एकेडमिक काउंसिल की बैठक आयोजित की गयी. इसकी अध्यक्षता कुलपति प्रो संजय कुमार ने की.

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एकेडमिक काउंसिल की बैठक में कुल 20 मुद्दों पर अनुमोदन

मुंगेर. मुंगेर विश्वविद्यालय के सिंडिकेट सभागार में शुक्रवार को एकेडमिक काउंसिल की बैठक आयोजित की गयी. इसकी अध्यक्षता कुलपति प्रो संजय कुमार ने की. इस दौरान विश्वविद्यालय के शैक्षणिक मामलों के कुल 20 मुद्दों पर चर्चा कर उसे सर्वसम्मति से अनुमोदित किया गया. कुलपति ने बताया कि बैठक में सर्वप्रथम एकेडमिक काउंसिल के 9 सितंबर 2025 को हुए बैठक, 3 फरवरी को आयोजित नए शिक्षण कार्यक्रम और संबद्धता समिति की बैठक व परीक्षा बोर्ड की पिछली बैठकों के कार्यवृत्त पर चर्चा की गयी. इसके अतिरिक्त बैठक में चार वर्षीय स्नातक कार्यक्रमों के चौथे सेमेस्टर (एईसी-4) के एनजीओ/सामाजिक सेवा/खेल (स्वास्थ्य और कल्याण) के सामान्य पाठ्यक्रम को अपनाने को अनुमोदित किया गया. साथ ही विश्वविद्यालय के स्नातकोत्तर विभागों के प्रमुख द्वारा प्रस्तुत प्रोफेसर रैंक के दस बाहरी विषय विशेषज्ञों की सूची की स्वीकृति भी दी गयी. इसके अतिरिक्त बैठक में दर्शनशास्त्र विभाग एचएस कॉलेज हवेली खड़गपुर के सहायक प्राध्यापक डॉ सर्वजीत पाल को पीएचडी के लिये अध्ययन अवकाश/सैबेटिकल अवकाश प्रदान करने सभी महाविद्यालयों में कैंटीन खोलने और विश्वविद्यालय द्वारा रबर बोर्ड व हिमालय वन अनुसंधान संस्थान के साथ समझौता को लेकर भी चर्चा की गयी.

कुलपति ने बताया कि बैठक में निर्णय लिया गया कि विश्वविद्यालय के अंगीभूत महाविद्यालयों में अतिथि शिक्षकों द्वारा प्रतिदिन न्यूनतम दो कक्षाएं संचालित की जायेगी. साथ ही अतिथि शिक्षकों को प्रतिदिन केवल दो कक्षाओं (अधिकतम) का ही भुगतान किया जायेगा. इसके अतिरिक्त बैठक में

विश्वविद्यालय के घटक/संबद्ध कॉलेजों और स्नातकोत्तर विभागों में यथासंभव सुबह 8:00 बजे से शाम 5:00 बजे तक कक्षाएं संचालित करने, स्नातक/स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम में प्रवेश लेते समय छात्रों के पंजीकरण करने का निर्णय लिया गया. साथ ही सर्वसम्मत से निर्णय लिया गया कि शोधार्थियों को कक्षा लेने हेतु भी प्रेरित किया जायेगा, ताकि उनमें अध्यापन कौशल का विकास हो व विद्यार्थियों को भी अध्ययन का बेहतर लाभ मिल सके, जबकि पांचवीं और छठी पीएचडी प्रगति रिपोर्ट की स्वीकृति तभी दी जायेगी. जब प्रत्येक रिपोर्ट में कम से कम एक शोध पत्र और दो पावर प्वाइंट प्रस्तुतियां (एक डीआरसी के समक्ष और एक पीजीआरसी के समक्ष) शामिल होंगे. वही चार वर्षीय स्नातक कार्यक्रम में एईसी/भीएसी/एसईसी पाठ्यक्रमों में अध्यापन को लेकर पात्र उम्मीदवारों की शॉर्टलिस्ट व चयन पर विचार किया गया.

पीजी विभागों के लिये भी लिये गये महत्वपूर्ण निर्णय

एकेडमिक काउंसिल की बैठक में पीजी विभागों को लेकर भी कई निर्णय लिये गये. कुलपति ने बताया कि विश्वविद्यालय के पीजी विभागों में राज्य सरकार से स्वीकृति प्राप्त होने तक, शैक्षणिक सत्र 2026-28 से आगे बंगला व संस्कृत विषय में अध्ययनरत छात्रों का पीजी केंद्र, आरडी एंड डीजे कॉलेज, मुंगेर से स्थानांतरण किया जायेगा, जबकि पीजी के उन विषयों के लिए, जिनमें दस से कम छात्र नामांकित/पंजीकृत हैं. उसे मुंगेर विश्वविद्यालय के विश्वविद्यालय मुख्यालय स्थित स्नातकोत्तर विभागों में विश्वविद्यालय के स्नातकोत्तर विभागों व अन्य पीजी केंद्रों की संयुक्त (जॉइंट) पीजी कक्षाओं के संचालन किया जायेगा. मौके पर कुलसचिव प्रो घनश्याम राय, प्रो भवेशचंद्र पांडेय, प्रो देवराज सुमन, प्रो रंजना सिंह, डॉ अजफर शमशी, प्रो रंजन कुमार, प्रो हरिश्चंद्र शाही, डॉ अंशु कुमार राय आदि मौजूद थे.

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