नये सिद्धांत व प्रयोग के आधार पर नये सत्य को करना होता है पुनर्निर्धारित : डीएसडब्ल्यू

आरडी एंड डीजे कॉलेज ऑडिटोरियम में शनिवार को भौतिकी विभाग की ओर से राष्ट्रीय विज्ञान दिवस पर सेमिनार का आयोजन
मुंगेर. आरडी एंड डीजे कॉलेज ऑडिटोरियम में शनिवार को भौतिकी विभाग की ओर से राष्ट्रीय विज्ञान दिवस पर सेमिनार का आयोजन किया गया. इसकी अध्यक्षता कॉलेज के प्राचार्य प्रो बिजेंद्र कुमार ने की. मुख्य अतिथि के रूप में मुंगेर विश्वविद्यालय के डीएसडब्ल्यू प्रो महेश्वर मिश्रा थे. जबकि विशिष्ट अतिथि के रूप में डिप्टी रजिस्ट्रार-1 डॉ प्रियरंजन तिवारी, परीक्षा नियंत्रक प्रो दशरथ प्रजापति तथा दर्शनशास्त्र के शिक्षक प्रो संजय कुमार थे. कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन तथा कुलगीत गायन से की गयी. मंच संचालन भौतिकी विभाग के सहायक प्राध्यापक सह डिप्टी रजिस्ट्रार-2 डॉ अंशु कुमार राय ने किया. भौतिकी विभाग की छात्रा रूचिका, सुमन तथा प्रिया ने स्वागत गीत प्रस्तुत किया. भौतिकी विभागाध्यक्ष डॉ गोपाल प्रसाद चौधरी ने अतिथियों का स्वागत किया तथा विषय प्रवेश कराया. मुख्य अतिथि ने दर्शन और विज्ञान के संबंधों पर विस्तार से चर्चा की. उन्होंने कहा कि अंतिम सत्य कुछ भी नहीं है. नये-नये सिद्धांत और प्रयोग के आधार पर सत्य को पुनर्निर्धारित करना पड़ता है. प्राचार्य ने कहा कि इस तरह के कार्यक्रम से छात्रों में वैज्ञानिक अभिवृति का विकास होता है. डिप्टी रजिस्ट्रार-1 ने छात्र-छात्राओं को प्रश्न पूछते रहने के महत्व के बारे में बताया. उन्होंने कहा कि साइंस-डे का आयोजन इस लिये किया जाता है कि बच्चे विज्ञान के तार्किक निष्कर्ष तक पहुंचें. जब हम प्रश्न पूछने और उसके तार्किक निष्कर्ष पर पहुंचते हैं तो हम कई प्रकार की भ्रांतियां और कुरीतियों को भी दूर करने में सक्षम होते हैं. उन्होंने कहा कि भारत विविधताओं का देश है. यहां हमारे पास सीखने के लिए बहुत कुछ है, लेकिन उसके लिए जरूरी है कि हम प्रश्न पूछना सीखें, ताकि हम उसका निष्कर्ष ढूंढ़ने में सक्षम हो पायेंगे और यही विज्ञान हमें सिखाता है.
कुल 12 टीमों ने प्रस्तुत किया साइंटिफिक मॉडल
कार्यक्रम के दौरान भौतिकी विभाग की विभिन्न कक्षाओं के छात्र-छात्राओं की कुल 12 टीमों द्वारा वर्किंग साइंटिफिक मॉडल प्रस्तुत किया गया. चार प्रतिभागियों ने ओरल/ पावर प्वाइंट के माध्यम से अलग-अलग विषय वस्तु पर अपनी-अपनी प्रस्तुति दी. इस दौरान विद्यार्थियों ने वाईफाई, वेस्ट मैनेजमेंट पावर जेनरेशन, टेस्ला क्वाइल, स्मार्ट सिटी, पीआइआर मोशन, मेटल डिटेक्टर, लेजर सिक्योरिटी अलार्म सिस्टम, फ्यूचर फ्लाई ओवर, इलेक्ट्रामैग्नेटिक इंडक्शन, स्ट्रीट लाइट सेंसर और सोलर सेल का मॉडल प्रस्तुत किया.
बेहतर प्रदर्शन पर मिला पुरस्कार
साइंटिफिक मॉडल में प्रथम पुरस्कार वाईफाई के लिए गौरव और प्रियांशु, द्वितीय पुरस्कार वेस्ट मैनेजमेंट पावर जेनरेशन के लिए पियूष, नायब हसन व तृतीय पुरस्कार टेस्ला क्वाइल के लिए देव एवं पंकज राज को मिला. वहीं वुमेन इन साइंस पर ओरल टाक प्रस्तुत करने के लिए स्नातक सेमेस्टर-3 की छात्रा प्रीति को पुरस्कृत किया गया. मॉडल सहायक प्राध्यापक डॉ शुभंकर चक्रवर्ती तथा डा रूचि श्रीवास्तव के मार्गदर्शन में तैयार किया गया था. निर्णायक के रूप में रसायनशास्त्र विभागाध्यक्ष डॉ सूरज कोनार, तथा बीआरएम कॉलेज के भौतिकी विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ माधवी यादव थे. कार्यक्रम को सफल बनाने में डॉ कृष्ण कुमार भार्गव, डॉ कुमारी नेहा, निखिल, देवेश, ब्रजेश, अभिषेक, आयुष आदि ने महत्वपूर्ण भूमिका निभायी.
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