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श्रीकृष्ण की लीलाएं केवल कथाएं नहीं, जीवन जीने की शैली

Updated at : 30 Apr 2025 11:39 PM (IST)
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श्रीकृष्ण की लीलाएं केवल कथाएं नहीं, जीवन जीने की शैली

श्रीकृष्ण की लीलाएं केवल कथाएं नहीं, जीवन जीने की शैली

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संग्रामपुर. प्रखंड के बढ़ौनियां गांव स्थित माता काली मंदिर परिसर में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा महोत्सव का समापन बुधवार को श्रद्धा और भक्ति के साथ हो गया. वहीं कथा के पूर्व होली उत्सव मनाया गया. कथा के अंतिम दिन वृंदावन से पधारी कथा वाचिका ब्रज प्रिया किशोरी जी उर्फअदिति जी महाराज ने द्वारकाधीश भगवान श्रीकृष्ण के 16,107 विवाह, सुदामा चरित्र और भगवान दत्तात्रेय के 24 गुरुओं की प्रेरणादायक कथा का वर्णन किया. कथा विश्राम से पूर्व होली उत्सव के रंगों और भजन-कीर्तन के संग भक्तों ने भक्ति रस में डूबे रहे. कथा वाचिका ने श्रीकृष्ण के विवाह प्रसंग को विस्तार से बताते हुए कहा कि भगवान ने 16,107 कन्याओं का उद्धार कर उन्हें सम्मानपूर्वक पत्नी रूप में स्वीकार किया. यह विवाह केवल सांसारिक नहीं, बल्कि समाज को यह संदेश देने के लिए था कि संकट में पड़ी नारी को सम्मान देना ही धर्म है. श्रीकृष्ण की लीलाएं केवल कथाएं नहीं, जीवन जीने की शैली हैं. उन्होंने सुदामा चरित्र की भावुक कथा सुनाते हुए मित्रता और निष्काम भक्ति का उदाहरण प्रस्तुत किया. उन्होंने कहा कि सच्ची भक्ति वह है जो बिना किसी अपेक्षा के की जाए. सुदामा और श्रीकृष्ण की मित्रता इस बात का प्रतीक है कि ईश्वर अपने भक्त की भावनाओं को सर्वोपरि मानते हैं. कथा के अंतिम पड़ाव में उन्होंने भगवान दत्तात्रेय द्वारा लिए गए 24 गुरुओं की गूढ़ शिक्षाओं को बताया. उन्होंने कहा कि जीवन के हर क्षण, हर परिस्थिति और हर प्राणी से कुछ न कुछ सीखने की प्रवृत्ति ही हमें आध्यात्मिक प्रगति की ओर ले जाती है. पृथ्वी से लेकर अग्नि, जल, वायु, सर्प, मछली, हाथी, चिड़िया आदि सभी से भगवान दत्तात्रेय ने ज्ञान प्राप्त किया. इस दौरान भक्तों ने रंग-गुलाल लगाकर तथा फूलों की होली खेली. साथ ही “होली खेले रघुवीरा अवध में ” और “बरसाने वाली राधा ” जैसे भजनों पर झूमकर होली उत्सव मनाया.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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GUNJAN THAKUR

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By GUNJAN THAKUR

GUNJAN THAKUR is a contributor at Prabhat Khabar.

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